फडणवीस का निर्देश: ऐप टैक्सी में सभी ड्राइवरों को बराबर मौका देने वाला प्लेटफॉर्म बने
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समुच्चय वाहन नीति को असरदार तरीके से लागू करने के लिए ऐसी तकनीक विकसित करने को कहा है, जो स्वतंत्र टैक्सी ड्राइवरों और एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े ड्राइवरों को बराबर मौका दे।
मुंबई: महाराष्ट्र में स्वतंत्र टैक्सी ड्राइवरों और एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े ड्राइवरों को सवारी बांटने में बराबर मौका मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सबको समान अवसर देने वाला अलग तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए और उसके जरिए समुच्चय वाहन नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मकसद यह है कि यात्री परिवहन के क्षेत्र में पारदर्शी और निष्पक्ष मुकाबले का माहौल बने।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने महाराष्ट्र मोटार व्हेईकल एग्रीगेटर रूल्स, 2026 के तहत समुच्चय वाहन नीति को लागू करने पर मुख्यमंत्री के सामने विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इसमें स्वतंत्र टैक्सी ड्राइवरों के रोजगार की सुरक्षा और उन्हें न्यायसंगत मौका दिलाने से जुड़े कई मुद्दे रखे गए।
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि राज्य में ओला, उबर और दूसरी एग्रीगेटर कंपनियों के जरिए यात्री परिवहन का कारोबार बढ़ रहा है। इसी बीच स्वतंत्र टैक्सी ड्राइवरों को सवारी मिलने, कमाई करने और बड़े फ्लीट ऑपरेटरों से मुकाबला करने में दिक्कतें आने की शिकायतें हैं। सरनाईक ने मौजूदा व्यवस्था की खामियां दूर कर ऐसी पारदर्शी और तकनीक पर टिकी व्यवस्था की जरूरत बताई, जो सभी ड्राइवरों को बराबर मौका दे।
स्वतंत्र ड्राइवरों की एक शिकायत यह है कि ऐप से सवारी बांटने में जो एल्गोरिदम इस्तेमाल होता है, उसका तरीका साफ नहीं है। एयरपोर्ट जैसी बड़ी जगहों से ज्यादा कमाई वाली ट्रिप में बड़े फ्लीट ऑपरेटरों के ड्राइवरों को तरजीह मिलने की भावना जताई जा रही है, जबकि स्वतंत्र ड्राइवरों को अपेक्षाकृत कम कमाई वाली ट्रिप मिलती हैं। इसलिए जरूरत रखी गई कि सवारी बांटने की प्रणाली पारदर्शी हो और तकनीक के जरिए किसी भी ड्राइवर के साथ नाइंसाफी न हो।
एक और शिकायत कार्रवाई को लेकर है। स्वतंत्र ड्राइवरों की छोटी-मोटी गलतियों पर भी अकाउंट बंद करने या सस्पेंड करने जैसी कार्रवाई होने की शिकायतें हैं। दूसरी तरफ यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या बड़े फ्लीट ऑपरेटरों पर भी उन्हीं पैमानों से कार्रवाई होती है। प्रेजेंटेशन में कहा गया कि एवरेस्ट फ्लीट्स, मूव फ्लीट और कैर्रम फ्लीट जैसे बड़े फ्लीट ऑपरेटरों को कथित तौर पर मिलने वाली तरजीह का असर स्वतंत्र ड्राइवरों के कारोबार पर पड़ रहा है। इसलिए सभी ड्राइवरों के लिए एक जैसे नियम, एक जैसे पैमाने और निष्पक्ष कार्यप्रणाली की जरूरत बताई गई।
मांग यह भी की गई कि किराया तय करने, इंसेंटिव देने, ड्राइवरों का मूल्यांकन करने और सवारी बांटने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता रहे। ड्राइवरों की कमाई, काम के घंटे, बीमा सुरक्षा, भविष्य निर्वाह निधि (पीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) जैसी सामाजिक सुरक्षा की बातें भी साफ होनी चाहिए, ऐसी मांग रखी गई।
प्रेजेंटेशन में सवारी बांटने, जियो-फेंसिंग, लाइव जियो-लोकेशन और बढ़े हुए किराये के निर्धारण जैसी तकनीकी प्रणालियों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की जरूरत भी रखी गई। कहा गया कि इन प्रणालियों के कामकाज पर असरदार निगरानी रखी जाए और उनका इस्तेमाल सभी ड्राइवरों के हित में हो।
निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि समुच्चय वाहन नीति का मकसद सिर्फ एग्रीगेटर कंपनियों के जरिए यात्री परिवहन को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि स्वतंत्र टैक्सी ड्राइवरों समेत सभी संबंधित पक्षों को बराबर मौका देना है। इसलिए ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित करने पर जोर दिया जाए, जो तकनीक से सवारी बांटने में पारदर्शिता लाए और बड़ी कंपनियों के दबदबे या किसी भी तरह के भेदभाव से बचे।
इस व्यवस्था से स्वतंत्र टैक्सी ड्राइवरों के रोजगार की सुरक्षा होगी, स्थानीय भूमिपुत्रों को कारोबार में बराबर मौका मिलेगा और यात्री परिवहन क्षेत्र में न्यायसंगत मुकाबला बनेगा। साथ ही यात्रियों को सुरक्षित, अच्छी क्वालिटी की और किफायती सेवा मिले, इसके लिए सरकार समुच्चय वाहन नीति का अमल ज्यादा पारदर्शी और असरदार बनाने की कोशिश में लगी रहेगी।
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