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पुणे में बालकनी में कपड़े सुखाने पर रोक की तैयारी, लोगों ने बताया दखलअंदाजी

पुणे महानगरपालिका मुख्य सड़कों की तरफ वाली बालकनी में धुले कपड़े सुखाने पर पाबंदी की नीति बना रही है। निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं।

पुणे में बालकनी में कपड़े सुखाने पर रोक की तैयारी, लोगों ने बताया दखलअंदाजी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे महानगरपालिका (PMC) एक ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत मुख्य सड़कों की तरफ खुलने वाली बालकनी में धुले कपड़े सुखाने पर रोक लगेगी। निगम का कहना है कि इससे शहर का "विजुअल पॉल्यूशन" कम होगा, शहर की सुंदरता बढ़ेगी और नागरिक व्यवस्था बनी रहेगी। अवैध होर्डिंग के बाद अब पुणे की स्काईलाइन के लिए बालकनी में सूखते कपड़े नया मुद्दा बन गए हैं।

इसके साथ ही PMC खाली प्लॉट के चारों तरफ हरी सेफ्टी नेट लगाना जरूरी करने की भी योजना बना रही है, ताकि शहर में कचरा और निर्माण का मलबा गैरकानूनी तरीके से न फेंका जा सके। लेकिन इस प्रस्ताव पर पुणे के लोगों और शहर के कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह मनमाना फैसला है और निजी जगह में सीधी दखलअंदाजी है। उन्होंने निगम की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि पहले शहर का बुनियादी ढांचा, सफाई और स्वच्छता ठीक की जाए, क्योंकि वही उनकी सुरक्षा और भलाई से जुड़े हैं।

ये घोषणाएं नगर आयुक्त नवल किशोर राम ने PMC के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के "स्वच्छ संवाद" कार्यक्रम में कीं। वहां वरिष्ठ अधिकारी और फील्ड में काम करने वाले निगम कर्मचारी मौजूद थे। राम ने कहा कि शहर तेजी से फैल रहा है, इसलिए पुणे के विजुअल कैरेक्टर को बचाने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। उन्होंने व्यस्त सड़कों के किनारे रिहायशी इमारतों के बिखरे हुए नजारे पर चिंता जताई और कहा कि सड़क किनारे की बालकनी में टंगे गीले कपड़े शहर की पूरी तस्वीर और खूबसूरती को नुकसान पहुंचाते हैं।

राम ने कहा, "शहर की खूबसूरती और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार प्रशासन के पास है। मुख्य सड़कों पर सामने वाली बालकनी में कपड़े टांगने से शहर का विजुअल हार्मनी बिगड़ता है। ऐसी आदतों पर रोक लगाने के लिए हम एक सख्त नियमावली पर विचार कर रहे हैं।" निगम अधिकारियों के मुताबिक अमल की रणनीति, जनजागरूकता अभियान और नियम न मानने पर जुर्माने वाली गाइडलाइन सात दिन के अंदर तैयार होने की उम्मीद है।

इस पाबंदी पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया आई है। कोथरूड के निवासी रमेश कुलकर्णी ने कहा, "शहर की खूबसूरती जरूरी है, लेकिन बालकनी निवासियों के लिए निजी जगह है, खासकर घनी आबादी वाले अपार्टमेंट में, जहां घर के अंदर कपड़े सुखाने की जगह लगभग होती ही नहीं। जब इससे कहीं बड़े और जरूरी शहरी मसले तुरंत ध्यान मांग रहे हैं, तब कपड़े टांगने पर रोक पूरी तरह गैरजरूरी और दखलअंदाजी लगती है।"

विमान नगर की निवासी अनन्या देशमुख ने भी यही बात दोहराई कि घर की रोजमर्रा की जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "आजकल के फ्लैट में अंदर धूप कम आती है, इसलिए रोज के कपड़े सुखाने के लिए बालकनी ही अकेली काम की जगह है। लोगों को अपने ही घर में कपड़े सुखाने पर जुर्माना लगाने से पहले PMC को असली विजुअल पॉल्यूशन हटाने पर ध्यान देना चाहिए, जैसे अवैध होर्डिंग, बड़े-बड़े बैनर और मुख्य सड़कों पर ऊपर लटकते केबल के खतरनाक जाल।"

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी निगम के फोकस पर सवाल उठाया और प्रशासन से कहा कि वह अपनी ताकत बुनियादी ढांचे की समस्याओं की तरफ लगाए। सामाजिक कार्यकर्ता क्वानीज सुखरानी ने कहा, "नागरिक अपनी बालकनी में क्या करते हैं, इसे नियंत्रित करने के बजाय PMC को झुग्गियों में सफाई सुधारने और फुटपाथ पर फैले अतिक्रमण हटाने जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी ऊर्जा और संसाधन लगाने चाहिए। पुणे में पैदल चलने वालों के पास चलने की सुरक्षित जगह नहीं है और बस्तियों में बुनियादी साफ-सफाई रोज का संघर्ष है। यही प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।"

खाली जमीन को लेकर PMC साथ ही सख्त गाइडलाइन भी तैयार कर रही है। पुणे के खुले प्लॉट अक्सर घरेलू कचरे और निर्माण के मलबे की डंपिंग साइट बन जाते हैं। प्रस्तावित निर्देश के तहत मालिकों को अपनी जमीन के चारों तरफ हरी सुरक्षा जाली और ठीक से बाड़ लगानी होगी, ताकि सफाई बनी रहे और बिना इजाजत कचरा न फेंका जा सके।

नवल किशोर राम ने पुणे के बढ़ते दायरे और करीब 80 लाख तक पहुंच चुकी आबादी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि PMC के 16,000 करोड़ रुपये के बजट और 25,000 कर्मचारियों के साथ शहर का बुनियादी ढांचा संभालना बहुत बड़ी चुनौती है। प्रशासन ने कई इलाकों में सार्वजनिक शौचालयों की खराब हालत पर भी चिंता जताई और खराब देखरेख वाली सफाई सुविधाओं को नागरिक सम्मान का गंभीर मामला बताया। झुग्गी बस्तियों में कचरा संग्रह की फीस भरने वाले कम हैं, इसलिए वहां की सफाई सुधारने के लिए PMC झुग्गी इलाकों में निगम की तरफ से मुफ्त सफाई और कचरा संग्रह सेवा देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

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