गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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पुणे में पदवीधर पर महाविकास आघाडी, शिक्षक की दोनों सीटें महायुती के नाम

पुणे में पदवीधर पर महाविकास आघाडी, शिक्षक की दोनों सीटें महायुती के नाम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

विधान परिषद की पदवीधर और शिक्षक सीटों में महाविकास आघाडी को तीन और महायुती को दो सीटें मिलीं।

विधान परिषद की पदवीधर और शिक्षक सीटों के नतीजे बुधवार, 28 तारीख को सामने आए। इन नतीजों में महाविकास आघाडी और महायुती के बीच कड़ा मुकाबला दिखा। पदवीधर की तीनों सीटें महाविकास आघाडी ने जीतीं, जबकि शिक्षक की दोनों सीटें सत्ताधारी महायुती के खाते में गईं। यानी महायुती को पांच में से सिर्फ दो सीटें मिलीं।

इस नतीजे से महायुती के नेताओं ने नाराजगी जताई है और हार का ठीकरा शिवसेना पर फोड़ा है। भाजपा ने शिवसेना पर आरोप लगाया है कि सहयोगी दल का साथ छूटने की वजह से महायुती को नुकसान हुआ। महायुती के दलों ने कहा है कि अब वे हार पर आत्मचिंतन करेंगे।

पुणे पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी की हर्षदा देशमुख-जाधव ने भाजपा की डॉ. स्मिता जाधव को हराया। बताया जा रहा है कि पिछले दो साल की तैयारी और पार्टी की संगठनात्मक ताकत के दम पर हर्षदा देशमुख-जाधव ने यह जीत हासिल की। दूसरी तरफ भाजपा के भीतर की नाराजगी का सीधा नुकसान डॉ. स्मिता जाधव को हुआ।

पिछले चुनाव में इसी सीट से राष्ट्रवादी के अरुण लाड जीते थे। इस चुनाव से पहले अरुण लाड के बेटे शरद लाड ने भाजपा में प्रवेश कर लिया। इसी वजह से हर्षदा देशमुख-जाधव ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। चर्चा यह भी है कि उनका मायका सातारा और ससुराल पुणे होने का फायदा उन्हें निर्वाचन क्षेत्र की रणनीति में मिला।

इस नतीजे के मुख्य कारणों में कई बातें गिनाई जा रही हैं। भाजपा से इच्छुक शरद लाड ने जोरदार तैयारी की थी, लेकिन भाजपा ने ऐन वक्त पर डॉ. स्मिता जाधव को उम्मीदवारी दे दी। उम्मीदवारी घोषित होने के बाद स्मिता जाधव ने भाजपा में प्रवेश किया। कहा जा रहा है कि थोपी गई उम्मीदवारी से भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता नाराज हुए और इसका बड़ा असर स्मिता जाधव पर पड़ा। उनके पीछे बड़ी ताकत खड़ी होने के बावजूद मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के संगठनात्मक नेटवर्क का सीधा फायदा हर्षदा देशमुख-जाधव को मिला।

नौजवानों की नाराजगी का भी जिक्र हो रहा है। कुछ दिन पहले पुणे में एमपीएससी पेपर लीक को लेकर आंदोलन हुए थे। उसमें शरद पवार की पार्टी ने जो भूमिका ली, वह भी चर्चा में रही थी।

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावडे ने शिंदेसेना समर्थित उम्मीदवार सचिन सानप को हराया। इस सीट को लेकर महायुती में बड़ा पेच फंसा था, मगर आखिर में भाजपा ने सीट अपने पास रखी। इसके बाद सचिन सानप ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा और शिंदेसेना ने उन्हें समर्थन दिया। नतीजा यह हुआ कि महायुती के भीतर ही दोस्ताना मुकाबला हुआ, जिससे गावडे की जीत आसान हुई।

गावडे की जीत के कारणों में कोल्हापुर की संगठनात्मक ताकत, नया युवा चेहरा और संगठन के काम का अनुभव गिना जा रहा है। भाजपा और शिंदेसेना के दोस्ताना मुकाबले से वोटों का गणित भी गावडे के पक्ष में बैठा। निर्दलीय उम्मीदवार दत्तात्रय सावंत ने जो वोट लिए, वे भी गावडे के काम आए। विरोधी वोटों के बंटने से उनकी जीत का रास्ता और साफ हो गया।

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