हिंगणे खुर्द प्रोजेक्ट के ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच के आदेश, पीएमसी ने मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
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अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर ने हिंगणे खुर्द के मोंटे रोज़ा प्रोजेक्ट को दिए गए फाइनल ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट पर विभागीय जांच का आदेश दिया है।
पुणे, 29 अक्टूबर 2026: पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) की अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर ने हिंगणे खुर्द के एक निर्माण प्रोजेक्ट को दिए गए फाइनल ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि सर्टिफिकेट देते वक्त यह ठीक से नहीं परखा गया कि काम पूरा हुआ था या नहीं और कानूनी शर्तें पूरी हुई थीं या नहीं।
कौर ने पीएमसी के सिटी इंजीनियर को चिट्ठी लिखी है। उसमें कहा गया है कि मोंटे रोज़ा (Monte Rosa) नाम के इस प्रोजेक्ट में काम अधूरा था, फिर भी फाइनल ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी हुआ दिखता है। चिट्ठी में यह सवाल भी उठाया गया है कि निर्माण मंजूर नक्शों के मुताबिक था या नहीं। साथ ही यह भी कि एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस और जरूरी Consent to Establish तथा Consent to Operate की जांच हुई थी या नहीं।
कौर ने चिट्ठी में लिखा, "ऐसा लगता है कि काम अधूरा रहते हुए, जरूरी जांच और वेरिफिकेशन के बिना फाइनल ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।"
चिट्ठी में अधिकारियों से कहा गया है कि आर्किटेक्ट विलास जगन्नाथ येले, या प्रोजेक्ट के लिए जिम्मेदार लाइसेंसधारी आर्किटेक्ट, का महानगरपालिका में रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस कम से कम एक साल के लिए सस्पेंड किया जाए और उन्हें ब्लैकलिस्ट में डाला जाए। चिट्ठी के मुताबिक आर्किटेक्ट ने काम अधूरा होने के बावजूद कंप्लीशन सर्टिफिकेट दे दिया, जिससे पीएमसी को गुमराह किया गया, ऐसा आरोप है।
कौर ने यह भी कहा है कि पीएमसी की हद में प्रोजेक्ट के मालिकों और डेवलपरों से जुड़ा जो काम चल रहा है, उसे रोका जाए। उनके जमा किए गए निर्माण प्रस्ताव अगले आदेश तक रोके जाएं। चिट्ठी में प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों में तुषार बिल्डर्स (Tushar Builders) और बी.के. इंफ्रा एलएलपी (B.K. Infra LLP) के नाम हैं।
इसके अलावा कौर ने जूनियर इंजीनियर निशिकांत चापेकर और डिप्टी इंजीनियर राहुल टिखे के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने को कहा है। आरोप है कि दोनों ने अपनी ड्यूटी में चूक और लापरवाही की। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें दी जाती रहे।
यह चिट्ठी प्रस्तावित कार्रवाई और शुरुआती निष्कर्ष बताती है। इससे यह साबित नहीं होता कि जांच का नतीजा क्या निकला, और न यह पुष्टि होती है कि आदेश में कही गई कार्रवाई लागू हो चुकी है।
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