गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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SPPU में विरोध पर पाबंदी के खिलाफ छात्र संगठन 2 नवंबर से उतरेंगे आंदोलन में

SPPU में विरोध पर पाबंदी के खिलाफ छात्र संगठन 2 नवंबर से उतरेंगे आंदोलन में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

पुणे के सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में प्रगतिशील छात्र संगठनों ने 'सेव यूनिवर्सिटी डेमोक्रेसी' आंदोलन का ऐलान किया है।

पुणे के सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) प्रशासन के खिलाफ प्रगतिशील छात्र संगठनों ने मिलकर आंदोलन का ऐलान किया है। संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध पर रोक लगाई जा रही है, छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश है और कैंपस में विचारधारा के आधार पर भेदभाव हो रहा है। 'सेव यूनिवर्सिटी डेमोक्रेसी' नाम का यह आंदोलन 2 नवंबर से शुरू होगा।

यह फैसला 29 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी में हुई एक बैठक में लिया गया, जिसमें कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। संगठनों ने तय किया कि वे लोकतांत्रिक जगह के सिकुड़ने और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों को दबाने की कोशिश का मिलकर विरोध करेंगे।

संगठनों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी की मैनेजमेंट काउंसिल ने अगस्त 2026 में एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन, मार्च और कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाई गई। उन्होंने 2024 के एक सर्कुलर का भी जिक्र किया, जिसके मुताबिक बताया जाता है कि छात्रों को प्रदर्शन करने से कम से कम आठ दिन पहले इजाजत लेनी होती है और बिना इजाजत के कार्यक्रम पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐसी पाबंदियों के चलते छात्र अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आवाज नहीं उठा पाएंगे, जिनमें NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियां भी शामिल हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी की एंट्री पर लगी रोक पर भी सवाल उठाए, जैसे कैंपस के गेट पर पहचान पत्र की जांच और मुख्य प्रशासकीय इमारत में छात्रों की पहुंच पर नियंत्रण।

संगठनों का तर्क है कि सुरक्षा इंतजाम के नाम पर यूनिवर्सिटी का खुलापन और लोकतांत्रिक माहौल खत्म नहीं होना चाहिए। उनका यह भी आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खास विचारधारा के समूहों से जुड़े कार्यक्रमों को इजाजत मिल रही है, जबकि प्रगतिशील छात्र संगठनों पर रोक है। संगठनों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और सभी छात्र संगठनों के साथ बराबरी का बर्ताव करने की मांग की है।

NSUI पुणे के उपाध्यक्ष सिद्धांत जांभुलकर ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों से ज्यादा पाबंदियों को तरजीह दे रहा है। उन्होंने कहा, "यूनिवर्सिटी से उम्मीद की जाती है कि वह संवैधानिक मूल्यों, लोकतंत्र, विचारों की आजादी और सामाजिक न्याय को कायम रखे। लेकिन SPPU प्रशासन का मौजूदा रवैया पाबंदी और दमन को तरजीह देता दिख रहा है। विरोध पर अंकुश, छात्रों की एंट्री पर सख्त नियंत्रण और विचारधारा के आधार पर अलग बर्ताव गंभीर चिंता की बात है।"

जांभुलकर ने चेतावनी दी कि जिसे वह तानाशाही व्यवस्था बताते हैं, उसके खिलाफ छात्र संगठन एकजुट होंगे। उन्होंने कहा, "हम इस दमन से संवैधानिक रास्तों और सड़कों पर लोकतांत्रिक संघर्ष के जरिए लड़ेंगे। कैंपस में लोकतांत्रिक जगह, छात्रों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। लोकतंत्र को दबाने की किसी भी कोशिश को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स स्ट्रगल एक्शन कमेटी की SPPU इकाई के अध्यक्ष अभिषेक शेळके ने संगठनों के साथ कथित अलग बर्ताव पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, "अगर सत्ताधारी पार्टी से जुड़े सांस्कृतिक संगठनों को यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम करने की इजाजत है, तो प्रगतिशील छात्र संगठनों के प्रदर्शन पर रोक क्यों है? अलग नियम और इंसाफ के अलग पैमाने क्यों हैं?" उन्होंने कहा कि संगठन छात्रों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

बैठक में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के सिद्धांत जांभुलकर, रिपब्लिकन विद्यार्थी परिषद के सूरज गायकवाड, यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स स्ट्रगल एक्शन कमेटी के अभिषेक शेळके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के अजय बनसोडे, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के पवन जाधव, सम्यक विद्यार्थी आंदोलन के प्रज्योत गायकवाड और न्यू स्टूडेंट्स एंड यूथ फेडरेशन की धनश्री लवांड मौजूद थे। इनके साथ दूसरे छात्र संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

शामिल संगठनों ने बताया कि 2 नवंबर का आंदोलन कैंपस में लोकतांत्रिक जगह को बचाने, शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदी का विरोध करने और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों व अभिव्यक्ति की आजादी को सुरक्षित रखने पर केंद्रित रहेगा।

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