पिंपरी चिंचवड में टैंकर माफिया बेलगाम, कलेक्टर के OTP आदेश पर अमल नहीं
पिंपरी चिंचवड में पानी की किल्लत के बीच निजी टैंकर संचालकों पर कोई लगाम नहीं है। पुणे जिला कलेक्टर का OTP आधारित निगरानी व्यवस्था का आदेश महीनों बाद भी लागू नहीं हुआ।
पिंपरी-चिंचवड में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है और आरोप है कि निजी टैंकर संचालकों पर प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं रह गया है। आरोपों के मुताबिक कुओं और बोरवेल से रोज भारी मात्रा में पानी निकाला जा रहा है, फिर भी लोगों को टैंकर के लिए मनमाने दाम देने पड़ रहे हैं।
पुणे जिला कलेक्टर ने टैंकरों की निगरानी के लिए OTP आधारित व्यवस्था शुरू करने का आदेश दिया था। बताया गया है कि पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका (PCMC) के आयुक्त और संबंधित विभाग ने इस आदेश को अनसुना कर दिया। कलेक्टर ने PCMC आयुक्त को इसे तुरंत लागू करने के लिए कदम उठाने को कहा था, लेकिन आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं। महीनों बीत गए और व्यवस्था अब तक शुरू नहीं हुई।
वाकड, ताथवडे, पुनावले, मोशी और रावेत जैसे इलाकों में कई ऊंची रिहायशी सोसायटियां बन चुकी हैं और यहां इस व्यवस्था की सबसे ज्यादा जरूरत है। आरोप है कि टैंकर वाले कुओं और बोरवेल से चौबीसों घंटे पानी खींच रहे हैं, जिससे भूजल स्तर नीचे जा रहा है और कमी और बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि इसी कमी की वजह से उन्हें एक टैंकर के लिए 2,500 से 3,000 रुपये देने पड़ते हैं।
जिला प्रशासन ने टैंकरों पर नजर रखने के लिए नई तकनीक इस्तेमाल करने का फैसला किया था। प्रस्तावित सॉफ्टवेयर में हर अधिकृत टैंकर फेरे का रिकॉर्ड रहता और यह भी साफ पता चलता कि किन इलाकों में कितना पानी पहुंचा। उम्मीद थी कि इससे गड़बड़ियां रुकेंगी और लोगों को वाजिब दाम पर, समय पर पानी मिलेगा।
इस व्यवस्था की मुख्य बातें ये थीं। हर निजी और सरकारी टैंकर का सॉफ्टवेयर में रजिस्ट्रेशन जरूरी होता। टैंकर जब किसी हाउसिंग सोसायटी या ग्राहक को पानी देता, तो रजिस्टर्ड मोबाइल पर OTP जाता। ग्राहक यह OTP ड्राइवर को बताता और सॉफ्टवेयर में डालते ही फेरा पूरा दर्ज हो जाता। इसके अलावा GPS से यह भी देखा जाता कि टैंकर ने पानी कहां से भरा और कहां पहुंचाया। यानी ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP के बिना टैंकर डिलीवरी पूरी नहीं कर पाता। लेकिन यह योजना अब तक कागज पर ही है।
पूर्व पार्षद मारुति भापकर ने कहा कि महानगरपालिका ने OTP व्यवस्था लागू नहीं की, इसी वजह से निजी टैंकर वाले एक टैंकर के मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। भापकर के शब्दों में, "निजी टैंकर मालिक एक टैंकर के बहुत ज्यादा पैसे ले रहे हैं। उन पर कोई कंट्रोल नहीं है और आम लोगों का आर्थिक शोषण हो रहा है। अगर यह व्यवस्था समय पर लागू होती, तो प्रशासन के पास हर फेरे का सही रिकॉर्ड होता और पानी की कालाबाजारी रोकी जा सकती थी।" उन्होंने PCMC प्रशासन के कामकाज को "निराशाजनक और जनविरोधी" बताया। उन्होंने पूछा कि कलेक्टर के आदेश को अनदेखा करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या प्रशासन आंखें मूंदे ही रहेगा।
महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस के प्रदेश सचिव स्वप्निल बांसडे ने आरोप लगाया कि OTP निगरानी व्यवस्था न होने का सीधा फायदा टैंकर माफिया को मिल रहा है। बांसडे ने कहा, "शहर भर में कुओं और बोरवेल से दिन में भी और रात में भी, बिना इजाजत पानी निकाला जा रहा है। भूजल स्तर गिर गया है और पर्यावरण के जानकार आगे बड़े संकट की चेतावनी दे रहे हैं।" उनका कहना था कि कथित उल्लंघनों का पैमाना देखकर जल विभाग के अधिकारियों और टैंकर संचालकों की मिलीभगत पर सवाल उठते हैं।
रावेत के रहने वाले अमित बजारे ने कहा कि PCMC की सीमा में टैंकर माफिया बेरोकटोक चल रहा है। उनका आरोप है कि संचालक किल्लत का फायदा उठाकर हाउसिंग सोसायटियों से जरूरत से ज्यादा पैसे लेते हैं और खराब क्वालिटी का पानी देते हैं। बजारे ने जिला कलेक्टर और महानगरपालिका आयुक्त से बिना अनुमति चल रहे टैंकर संचालकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना लाइसेंस चल रहे कुओं और नियमों के खिलाफ पानी निकालने वाले टैंकरों को जब्त किया जाए। साथ ही जो लोग नकली कमी पैदा करके ऊंचे दाम पर पानी बेच रहे हैं, उन पर केस दर्ज हों।
OTP व्यवस्था की स्थिति पर PCMC से जवाब मांगा गया है। जवाब आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
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