शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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वैष्णवी हगवणे मामला: हाईकोर्ट से सास लता, सुशील और निलेश चव्हाण को सशर्त जमानत

वैष्णवी हगवणे मामला: हाईकोर्ट से सास लता, सुशील और निलेश चव्हाण को सशर्त जमानत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

मुंबई हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी और साफ कहा कि जमानत का मतलब बरी होना नहीं है।

वैष्णवी हगवणे की मौत के मामले में मुंबई हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस केस के तीन आरोपियों, यानी वैष्णवी की सास लता हगवणे, देवर सुशील हगवणे और परिवार के दोस्त निलेश चव्हाण को सशर्त जमानत दे दी है। यह मामला दहेज मौत प्रकरण के तौर पर पुणे ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र में चर्चा में रहा है।

कोर्ट ने तीनों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है। साथ में सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। वे गवाहों पर किसी तरह का असर नहीं डालेंगे और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। इसके अलावा अगले छह महीने तक हर महीने के पहले रविवार को उन्हें बावधन पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी।

शिकायत करने वाले पक्ष ने मांग की थी कि जमानत के आदेश पर तीन हफ्ते की रोक लगा दी जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह मांग ठुकरा दी। जमानत देते वक्त कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जमानत का मतलब निर्दोष साबित होना नहीं है और मुख्य मुकदमा आगे चलता रहेगा। अब देखना यह होगा कि केस में आगे क्या-क्या बातें सामने आती हैं।

इस मामले में बाकी तीन आरोपियों को राहत नहीं मिली है। वैष्णवी के पति शशांक हगवणे, ननद करिश्मा हगवणे और ससुर राजेंद्र हगवणे जेल में ही रहेंगे।

पुलिस ने इस केस में वैष्णवी के पति शशांक, सास लता, ननद करिश्मा, ससुर राजेंद्र, देवर सुशील और परिवार के दोस्त निलेश चव्हाण को गिरफ्तार किया था। निलेश चव्हाण को नेपाल से गिरफ्तार किया गया था। अब उसे भी जमानत मिल गई है।

मामले की शुरुआत 16 मई को हुई थी। उस दिन वैष्णवी हगवणे का शव भुकूम में उसके ससुराल में पंखे से लटका मिला था। शुरू में इसे खुदकुशी का मामला माना जा रहा था। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर चोट के निशान मिले, जिसके बाद केस ने नया मोड़ ले लिया। वैष्णवी के माता-पिता ने उसकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया। खुदकुशी या हत्या, इसे लेकर शक गहरा गया और राज्य में काफी हलचल मची।

हगवणे परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि होने की वजह से पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे और जांच की आलोचना हुई थी। इसके बाद जांच तेजी से आगे बढ़ी। पिंपरी चिंचवड पुलिस ने सोमवार 14 जुलाई को 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। वैष्णवी की मौत के 58 दिन बाद यह चार्जशीट दाखिल हुई थी।

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