सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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पिंपरी-चिंचवड में आयुक्त ने दो बड़े अफसरों से दो दिन में मांगा जवाब

पिंपरी-चिंचवड में आयुक्त ने दो बड़े अफसरों से दो दिन में मांगा जवाब तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

नगर निगम आयुक्त विजय सूर्यवंशी ने YCM अस्पताल के डीन डॉ. राजेंद्र वाबले और मुख्य उद्यान अधीक्षक महेश गारगोटे को कारण बताओ नोटिस दिया है।

पिंपरी-चिंचवड नगर निगम के आयुक्त विजय सूर्यवंशी ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस थमाया है। दोनों को दो दिन के भीतर लिखित में अपना जवाब देना होगा। नोटिस पाने वालों में यशवंतराव चव्हाण स्मृति (YCM) अस्पताल के डीन डॉ. राजेंद्र वाबले और नगर निगम के मुख्य उद्यान अधीक्षक महेश गारगोटे शामिल हैं।

नगर निगम में गड़बड़ी और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आयुक्त सूर्यवंशी ने सख्ती शुरू कर दी है। पिछले सात महीनों में वे 11 अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड कर चुके हैं। अब वरिष्ठ अधिकारियों को एक के बाद एक नोटिस दिए जा रहे हैं।

पहला मामला डॉ. वाबले का है। YCM अस्पताल के एक सहायक प्राध्यापक का अपमान करने के आरोप में उनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज हुआ है। नोटिस में आरोपों की गंभीरता और पुलिस की चल रही जांच का हवाला दिया गया है। उन पर यह इल्ज़ाम भी है कि सरकारी कर्मचारी को शोभा न देने वाला बर्ताव करके उन्होंने अपनी ड्यूटी में ईमानदारी नहीं रखी। आयुक्त ने साफ चेतावनी दी है कि दो दिन में जवाब संतोषजनक न हुआ या जवाब आया ही नहीं, तो नियमों के मुताबिक कार्रवाई होगी।

दूसरा मामला मुख्य उद्यान अधीक्षक महेश गारगोटे का है। उन पर आरोप है कि पिंपरी में एक निजी जगह पर हेरिटेज दर्जे वाले 52 पुराने पेड़ गैरकानूनी तरीके से काटे गए। कागजों में पेड़ों की संख्या और उम्र कम दिखाकर हेराफेरी की गई, ऐसा आरोप है। यह भी कहा गया है कि मौजूदा नियमों, सरकारी निर्देशों और प्रशासनिक मंजूरी को ताक पर रखकर पेड़ कटाई को बढ़ावा दिया गया। शिकायत में दर्ज है कि इस गड़बड़ी से नगर निगम को आर्थिक नुकसान हुआ और राजस्व का भी घाटा हुआ।

शहर के पेड़ों की हिफाजत, देखभाल और बगीचों के रखरखाव की जिम्मेदारी गारगोटे के पास है। इसके बावजूद ड्यूटी में कोताही बरतने के आरोप पर नोटिस में उनसे पूछा गया है कि उन पर अनुशासन भंग की कार्रवाई क्यों न की जाए।

आयुक्त सूर्यवंशी ने कड़ी चेतावनी दी है कि तय वक्त में संतोषजनक जवाब नहीं आया तो दोनों वरिष्ठ अधिकारियों पर सीधे अनुशासन भंग की सख्त कार्रवाई होगी। इस फैसले से नगर निगम के गलियारों में काफी हलचल मच गई है।

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