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त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ की शुरुआत, फडणवीस ने फहराया धर्मध्वज, राष्ट्रपति ने किया ध्वज पूजन

त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ की शुरुआत, फडणवीस ने फहराया धर्मध्वज, राष्ट्रपति ने किया ध्वज पूजन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

शनिवार, 31 अक्टूबर को त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर गोदावरी किनारे धर्मध्वज फहराया गया और सिंहस्थ कुंभ मेले का दौर औपचारिक रूप से शुरू हुआ।

नाशिक, महाराष्ट्र: त्र्यंबकेश्वर में शनिवार, 31 अक्टूबर को सिंहस्थ कुंभ मेले का दौर औपचारिक रूप से शुरू हो गया। गोदावरी के किनारे कुशावर्त तीर्थ पर कुंभ का पवित्र ध्वज, यानी धर्मध्वज, फहराया गया। उस वक्त वैदिक मंत्रों का पाठ चल रहा था, शंख बज रहे थे और साधु-महंत बड़ी तादाद में मौजूद थे।

ध्वजारोहण के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती थे। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उसी पवित्र जगह पर सिंहस्थ ध्वज पूजन किया। वहां उन्हें तांबे का एक पत्र (ताम्रपत्र) भेंट किया गया।

सुबह कुशावर्त तीर्थ पहुंचकर फडणवीस ने वहां मौजूद साधु-महंतों का स्वागत किया। फिर शंकराचार्य विधुशेखर भारती का भी स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत गोदावरी के विधिवत पूजन से हुई। पुरोहित मंत्रों से नदी की स्तुति करते रहे। उसके बाद संकल्प हुआ, जिसमें सभी प्राणियों के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की गई। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से हुई। उन्हें इसलिए बुलाया गया कि सिंहस्थ कुंभ मेले के सारे विधि-विधान और इंतजाम बिना किसी रुकावट के पूरे हों।

इसके बाद पुरोहितों ने देवताओं का आवाहन किया और ध्वजारोहण की अनुमति मांगी। गोदावरी-गंगा की प्रार्थना और सामूहिक प्रार्थना से पूरा परिसर भक्ति में डूब गया। फडणवीस ने ध्वज-दंड की पूजा की। धर्मध्वज और ध्वज का विधिवत पूजन हुआ और शंकराचार्य ने भी धर्मध्वज की पूजा की। शंख बजने के बाद ध्वज की आरती उतारी गई। शंकराचार्य और मुख्यमंत्री ने धर्मध्वज की परिक्रमा की और भगवान त्र्यंबकेश्वर से प्रार्थना की गई।

पुरोहितों के मंत्रोच्चार, शंखनाद और धार्मिक जयकारों के बीच ध्वज फहराया गया। माहौल उत्साह और मंगल भाव से भरा था। ध्वजारोहण के बाद पवित्र गोदावरी की आरती की गई।

ध्वज का महत्व: सिंहस्थ कुंभ मेले की ज्योतिषीय परंपरा में गुरु का सिंह राशि में प्रवेश अहम योग माना जाता है, और इसी वजह से ध्वजारोहण को खास धार्मिक महत्व मिलता है। इसी से सिंहस्थ का दौर शुरू होता है। धर्मध्वज को सिंहस्थ की पौराणिक परंपरा, गोदावरी की पवित्रता और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।

ध्वज पर सूर्य, चंद्र, गुरु, सिंह, मगरमच्छ, ओंकार, स्वस्तिक और घंटा बने हैं। सूर्य और चंद्र का संबंध अमृत कलश की रक्षा से जोड़ा गया है। गुरु और सिंह सिंहस्थ की ज्योतिषीय कालगणना से जुड़े हैं, जबकि मगरमच्छ गोदावरी की तीर्थ परंपरा को दर्शाता है। ओंकार और स्वस्तिक अध्यात्म, मंगल और कल्याण के भाव बताते हैं। बारह घंटे, दस दिशाएं और बीज मंत्र ह्रीं, हर एक का अपना धार्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ है।

ध्वजारोहण में विधायक हिरामन खोसकर, महापौर त्रिवेणी तुंगार, विशेष पुलिस महानिरीक्षक संजय ऐनपुरे, कलेक्टर आयुष प्रसाद, जिला परिषद के सीईओ ओंकार पवार, पुलिस अधीक्षक डॉ. एस. स्वामी, उपविभागीय अधिकारी पवनदत्ता, तहसीलदार गणेश जाधव, मुख्य अधिकारी गोविंद जाधव और अमोल चौधरी मौजूद थे। इनके साथ कई संत और महंत भी थे।

राष्ट्रपति मुर्मू का पूजन: बाद में उसी कुशावर्त तीर्थ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भक्तिमय माहौल में सिंहस्थ ध्वज पूजन किया। उनके पहुंचते ही विधि शुरू हो गई। पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने पवित्र गौतमी गंगा गोदावरी का विधिवत पूजन किया। फिर ध्वज पूजन हुआ और उसके बाद विशेष अर्घ्य के साथ गोदावरी की आरती की गई।

इस मौके का खास पल तब आया जब पुरोहित संघ ने राष्ट्रपति को आदर के साथ ताम्रपत्र भेंट किया।

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा अजित पवार, पालक मंत्री गिरीश महाजन, स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे और रोजगार गारंटी योजना व प्रोटोकॉल मंत्री जयकुमार रावल मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे।

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