सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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पुणे में सस्ते फ्लैट और प्लॉट का झांसा, 51 लोगों से 89 लाख की ठगी का आरोप, 13 पर केस दर्ज

पुणे में सस्ते फ्लैट और प्लॉट का झांसा, 51 लोगों से 89 लाख की ठगी का आरोप, 13 पर केस दर्ज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

भारती विद्यापीठ पुलिस ने इन्फ्राटेक के मालिक किसन ढवजी राठोड समेत 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। खरीदारों का कहना है कि दो साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ।

पुणे की भारती विद्यापीठ पुलिस ने सस्ते दाम पर फ्लैट और खुले प्लॉट देने के नाम पर 51 लोगों से कुल 89.07 लाख रुपए की कथित ठगी के मामले में 13 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें इन्फ्राटेक नाम की कंपनी के मालिक किसन ढवजी राठोड भी शामिल हैं। शिकायत के मुताबिक यह सब 2023 से 18 सितंबर 2024 के बीच हुआ।

शिकायत बिबवेवाडी के इंदिरानगर, अपर ओटा में रहने वाली 38 साल की नर्स वंदना ज्ञानदेव खंदारे ने दी है। पुलिस के मुताबिक वंदना अपना घर खरीदना चाहती थीं। जुलाई 2023 में उन्होंने सोशल मीडिया पर इन्फ्राटेक के हाउसिंग प्रोजेक्ट 'कात्रज वैली' का विज्ञापन देखा, जिसमें किफायती दाम पर फ्लैट का वादा था।

उन्होंने कंपनी से संपर्क किया तो मैनेजर अमोल गोरे ने उन्हें मांगदेवाडी के दफ्तर बुलाया। वहां उन्होंने 8 लाख और 14 लाख रुपए कीमत के फ्लैट बुक किए और शुरुआती रकम के तौर पर 2 लाख रुपए दिए। कंपनी की ओर से चैत्राली दहिवाल ने उनके साथ एग्रीमेंट पर दस्तखत किए। आरोप है कि सागर गोले और गोरे ने उनसे कहा था कि छह महीने बाद प्रोजेक्ट का भूमिपूजन होगा और उसके बाद निर्माण शुरू होगा।

एग्रीमेंट को छह महीने बीत गए, मगर काम शुरू नहीं हुआ। वंदना पूछताछ के लिए मांगदेवाडी दफ्तर गईं तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्हें यह भी पता चला कि फ्लैट बुक करने वाले कई और ग्राहक अपनी बुकिंग रद्द करवा कर पैसे वापस मांग रहे हैं।

जब वे खुद बुकिंग रद्द कर रकम लौटाने की मांग करने पहुंचीं, तो बताया गया कि गोरे, दहिवाल और गोले कंपनी छोड़ चुके हैं। उनका आरोप है कि बाकी स्टाफ से पैसे मांगने पर जवाब मिला, "हमने आपके पैसे नहीं लिए, जो करना है कर लो।" इसके बाद वे भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन पहुंचीं।

जांच में पुलिस को पता चला कि कंपनी ने हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट और खुले प्लॉट का वादा कर कथित तौर पर कई लोगों को अपनी ओर खींचा और बुकिंग की रकम ले ली, लेकिन किसी को कब्जा नहीं दिया। कुल 51 लोगों के 89,07,000 रुपए डूबने का आरोप है।

केस किसन ढवजी राठोड, सुशालिनी किसन राठोड और शिवकन्या राठोड के खिलाफ दर्ज है, जिन्हें कंपनी के मालिक बताया गया है। इनके अलावा प्रणवी भगवत अनेराव, चैत्राली विशाल दहिवाल, संजना राठोड, अनिल शंकर देशमुख, हनुमंत बाळू गोरे, राजेश रंगराव काकडे, बाळासाहेब कोंडिबा घोगरे, अभिषेक चंद्रशेखर ससावडे, सागर गोले और अमोल गोरे भी आरोपियों में हैं। इन्फ्राटेक से उसका पक्ष जानने की कोशिश की गई, पर कोई जवाब नहीं मिला। मामले की जांच पुलिस सब-इंस्पेक्टर पाटिल कर रहे हैं।

कई फ्लैट खरीदारों ने कहा कि उन्हें ठगा हुआ महसूस हो रहा है। करुणा विजय गायकवाड़ के मुताबिक कंपनी ने दो महीने के भीतर, दशहरे के आसपास, निर्माण शुरू करने का वादा किया था। खरीदारों से यह भी कहा गया कि जितनी जल्दी बड़ी रकम भरेंगे, उतनी जल्दी काम पूरा होगा। उन्होंने कहा, "असल में कोई काम शुरू नहीं हुआ। हमें लगता है कि हमारे साथ धोखा हुआ है।"

कल्पना गायकवाड़ ने बताया कि उन्होंने आंबेगांव के फ्लैट का विज्ञापन देखकर बुकिंग की थी। उनके मुताबिक हाईवे के पास किफायती घर की आस में कई मध्यमवर्गीय परिवारों ने जीवन भर की जमा पूंजी लगा दी, पर दो साल बाद भी कब्जा नहीं मिला। उन्होंने कहा, "बुनियादी खुदाई तक नहीं हुई है और कंपनी 'एग्रीमेंट' के बहाने अब भी पैसे मांग रही है। प्रशासन दखल दे और हमारी मेहनत की कमाई वापस दिलाने में मदद करे।"

2023 में फ्लैट बुक करने वाले संतोष पारडे ने बताया कि कंपनी ने फ्लैट के साथ सारी जरूरी सुविधाएं देने का वादा किया था। अब उन्हें पता चला है कि पुणे में कंपनी के करीब दस दफ्तर बंद हो चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से तुरंत संज्ञान लेने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और ग्राहकों को न्याय दिलाने की मांग की।

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