कर्जत में भाजपा नेता की मांग: पेड़ काटने की जगह उनका दोबारा रोपण करे सरकार
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भाजपा के कर्जत विधानसभा प्रमुख किरण ठाकरे ने कहा कि विकास से विरोध नहीं है, पर टोरेंट प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने की जगह उन्हें दूसरी जगह लगाया जाए।
रायगड जिले के कर्जत में भाजपा के नेताओं ने टोरेंट ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट को लेकर अपनी स्थानीय भूमिका सामने रखी है। भाजपा के कर्जत विधानसभा प्रमुख किरण ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर कहा कि पार्टी विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन पेड़ काटने की जगह उनका पुनर्रोपण होना चाहिए। उनके मुताबिक यह मांग सरकार के सामने रखी जाएगी।
भीमाशंकर और कर्जत की साय डोंगर पहाड़ियों में यह प्रोजेक्ट बन रहा है। इसके लिए 33 हजार पेड़ काटे जाने हैं। इनमें से हजारों पेड़ कट भी चुके हैं। स्थानीय लोगों ने इस कटाई का विरोध किया। इसके बाद प्रमुख विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने भी विरोध जताया और प्रोजेक्ट न होने देने का रुख लिया है।
प्रोजेक्ट की बात करें तो रायगड के कर्जत तालुका में प्रस्तावित टोरंट कंपनी का साई डोंगर जलविद्युत ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट तीन हजार मेगावॅट बिजली बनाएगा। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट है, फिर भी इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई चिंता की बात है। उनका रुख यह है कि इस प्रोजेक्ट से आने वाले विकास का विरोध नहीं है, पर पर्यावरण का नुकसान टालकर विकास करना जरूरी है।
किरण ठाकरे ने चीन की तर्ज पर पेड़ों के प्रत्यारोपण का तरीका अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अमेरिका, जापान और चीन जैसे देशों में पेड़ काटने की बजाय उन्हें जड़ समेत निकालकर दूसरी जगह लगाने के प्रयोग किए जाते हैं। उसके बाद चार साल तक पानी, जरूरी दवा-इलाज और विशेषज्ञों की मदद से इन पेड़ों की देखभाल होती है। ठाकरे ने कहा कि ऐसा ही तरीका कर्जत में भी अपनाया जाए।
इससे पहले मनसे प्रमुख राज ठाकरे और विधायक आदित्य ठाकरे जहां पेड़ कटे हैं, उस जगह पहुंचे थे और वहां जाकर अपना विरोध जताया था। महायुति में शामिल राष्ट्रवादी के स्थानीय नेताओं ने भी वृक्षतोड़ का विरोध किया था। अब कर्जत के भाजपा नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है।
कर्जत-भीमाशंकर की साय डोंगर में चल रही कटाई को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। स्थानीय लोग कटाई के साथ-साथ टोरेंट प्रोजेक्ट पर सरकार के फैसले का भी सीधा विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर स्थानीय सत्ता पक्ष के नेताओं में आपस में मतभेद दिख रहे हैं। शिवसेना शिंदे गुट के विधायक महेंद्र थोरवे प्रोजेक्ट के साथ हैं, जबकि राष्ट्रवादी अजित पवार गुट के नेता सुधाकर घारे इसके खिलाफ हैं। घारे ने पहले थोरवे पर टिप्पणी की थी कि थोरवे का रुख यह है कि स्थानीय लोग मर भी जाएं तो चलेगा, पर स्थानीय लोगों को मारने वाले प्रोजेक्ट आने दो। अब भाजपा ने भी अपनी स्थिति साफ कर दी है।
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