चक्कर खाकर गिरी 17 साल की लड़की, PMPML ड्राइवर ने बस सीधे ससून अस्पताल पहुंचाई
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पुणे में 29 अक्टूबर की सुबह PMPML की बस में बेहोश हुई 17 साल की लड़की को ड्राइवर राजेंद्र निकम और कंडक्टर गोरखनाथ चव्हाण ने समय पर ससून अस्पताल पहुंचाया।
पुणे में PMPML के दो कर्मचारियों की सूझबूझ से एक 17 साल की लड़की की जान बच गई। ड्राइवर राजेंद्र निकम और कंडक्टर गोरखनाथ चव्हाण ने लड़की के बेहोश होते ही बस का तय रूट छोड़ दिया और उसे सीधे ससून अस्पताल ले गए। 'पुणे जहां, वहां क्या कमी' वाली कहावत इस घटना के साथ याद की जा रही है।
बात 29 अक्टूबर की सुबह की है। मिली जानकारी के मुताबिक 17 साल की यह लड़की अपने माता-पिता और छोटे भाई के साथ PMPML की बस में सफर कर रही थी। सफर के बीच अचानक उसे चक्कर आया और वह नीचे गिर पड़ी। वह बेहोश हो गई थी।
बेटी को इस हालत में देखकर घरवालों के हाथ-पांव फूल गए। छोटा भाई घबराकर चिल्लाया, 'मेरी बहन को क्या हुआ?' और भागता हुआ कंडक्टर गोरखनाथ चव्हाण के पास पहुंचा। उसने उन्हें सारा हाल बताया।
मामला कितना गंभीर है, यह समझते ही चव्हाण ने बिना देर किए ड्राइवर राजेंद्र निकम को खबर दी। निकम ने आईने में देखा तो लड़की की हालत बहुत खराब लग रही थी और उसका पूरा परिवार बुरी तरह घबराया हुआ था। ऐसे तनाव के मौके पर निकम ने सिर ठंडा रखा और बड़ा फैसला लिया। उन्होंने न किसी स्टॉप की परवाह की, न सिग्नल की। तय रूट छोड़कर उन्होंने बस ससून अस्पताल के इमरजेंसी विभाग की तरफ दौड़ा दी।
कुछ ही देर में बस तेज रफ्तार से ससून अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के दरवाजे पर पहुंच गई। बस रुकते ही कंडक्टर चव्हाण फुर्ती से व्हीलचेयर ले आए और बेहोश लड़की को अंदर पहुंचाया।
ससून के डॉक्टरों ने भी एक पल गंवाए बिना इमरजेंसी इलाज शुरू कर दिया और लड़की को ऑक्सीजन लगाई। थोड़ी देर बाद डॉक्टरों ने बताया कि लड़की की हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। यह सुनकर घरवालों और बाकी सबकी जान में जान आई।
PMPML के इन कर्मचारियों की इस फुर्ती और समझदारी की हर तरफ से तारीफ हो रही है।
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