भीमाशंकर नहीं, कर्जत के जंगल में कट रहे पेड़; पुणे वन विभाग ने किया साफ
पुणे वन विभाग ने कहा कि भीमाशंकर अभयारण्य में अवैध पेड़ कटाई नहीं हो रही। टोरंट के प्रोजेक्ट के लिए कटाई कर्जत तालुका में हो रही है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सोशल मीडिया पर खबरें चल रही थीं कि भीमाशंकर अभयारण्य में बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ कटाई हो रही है। अब पुणे वन और वन्यजीव विभाग ने साफ किया है कि अभयारण्य में ऐसी कोई अवैध कटाई नहीं चल रही।
विभाग के मुताबिक असल में टोरंट कंपनी के जलविद्युत ऊर्जा साठवण यानी पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए जो कटाई चल रही है, वह कर्जत तालुका के पाली और ढाक इलाके में हो रही है। यह इलाका भीमाशंकर से करीब 16 किलोमीटर दूर है। वन विभाग का कहना है कि इसी कटाई को अभयारण्य की कटाई समझ लिया गया और इससे लोगों में भ्रम फैला।
कर्जत की सह्याद्री घाटी में टोरंट कंपनी तीन हजार मेगावॉट क्षमता का पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट बना रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने 233 हेक्टेयर वन क्षेत्र दिया है। इस क्षेत्र में कुल 32 हजार 490 पेड़ काटे जाने हैं और अब तक 1 हजार 825 पेड़ काटे जा चुके हैं। वन क्षेत्र दूसरे काम के लिए देने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से कटाई शुरू की गई है।
पर्यावरण प्रेमियों और कार्यकर्ताओं का इस कटाई पर विरोध है। उन्हें डर है कि हजारों पेड़ कटने से जंगली जानवरों के प्राकृतिक ठिकाने, जैव विविधता और स्थानीय पानी के स्रोतों पर असर पड़ेगा। कार्यकर्ताओं का दावा है कि पुराने और प्राकृतिक जंगल का नुकसान सिर्फ नए पेड़ लगाने से पूरा नहीं हो सकता। जिस जगह कटाई हो रही है, वह पश्चिमी घाट के संवेदनशील क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय असर का गहराई से अध्ययन हो और दूसरी जगह पर भी विचार किया जाए।
राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि साफ ऊर्जा बनाने के लिहाज से यह प्रोजेक्ट अहम है। सरकार का कहना है कि इससे कोयले पर टिकी बिजली बनाने पर राज्य की निर्भरता घटेगी।
सरकार ने बताया है कि वन जमीन के इस्तेमाल से प्रकृति को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई के लिए 90 हजार नए पेड़ लगाए जाएंगे। सरकार के मुताबिक सारी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाइयां पूरी होने के बाद ही प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। यह भी भरोसा दिया गया है कि अगर प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा, तो उनकी शिकायतें सुनकर सही रास्ता निकाला जाएगा।
पुणे वन विभाग के वनसंरक्षक और वन्यजीव विभाग के उपवनसंरक्षक ने प्रेस नोट जारी करके यह सफाई दी है। उसमें कहा गया है कि भीमाशंकर अभयारण्य में कंपनी के प्रोजेक्ट के लिए अवैध कटाई की खबरें सोशल मीडिया समेत कई माध्यमों में चल रही हैं, लेकिन अभयारण्य में ऐसी कोई अवैध कटाई नहीं हो रही। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस सफाई को ध्यान में रखें और प्रशासन का सहयोग करें।
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