पुणे पुलिस ने गूगल और एप्पल से कहा, रैपिडो ऐप हटाएं, बाइक टैक्सी बिना इजाज़त चल रही
पुणे पुलिस ने गूगल और एप्पल को चिट्ठी लिखकर रैपिडो ऐप को प्ले स्टोर और ऐप स्टोर से हटाने को कहा है।
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पुणे पुलिस ने गूगल और एप्पल को चिट्ठी लिखकर कहा है कि रैपिडो ऐप को प्ले स्टोर और ऐप स्टोर से हटा दिया जाए। शहर का प्रशासन कंपनी की बाइक टैक्सी सर्विस के खिलाफ कार्रवाई तेज़ कर रहा है, लेकिन यह सर्विस अभी भी शहर में चल रही है।
पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने इस कदम की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ऐप हटाने की मांग वाली चिट्ठियां दोनों टेक कंपनियों को पहले ही भेजी जा चुकी हैं।
यह कदम एक हफ्ते बाद उठाया गया है। पुणे के कलेक्टर जितेंद्र डूडी, जो रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) के प्रमुख भी हैं, ने एक हफ्ते पहले पुलिस को चिट्ठी लिखकर बाइक टैक्सी सर्विस बंद कराने को कहा था। करीब उसी समय कंपनी के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
RTO अधिकारियों का कहना है कि अगर रैपिडो को ज़रूरी इजाज़तें नहीं मिलीं, तो ऐप शहर में जल्द ही काम करना बंद कर सकता है। बाइक टैक्सी चलाने के लिए कंपनी की अर्ज़ी अभी ट्रांसपोर्ट विभाग के पास पेंडिंग है। एक RTO अधिकारी ने, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, कहा कि कंपनी को चेतावनी दी गई थी कि नियम नहीं माने तो कानूनी कार्रवाई होगी।
उसी अधिकारी ने यह भी कहा कि अगर रैपिडो राज्य की बाइक टैक्सी पॉलिसी की सारी शर्तें पूरी करती है, तो उसे मंज़ूरी मिल सकती है। लेकिन बिना इजाज़त सर्विस चलाने से उसके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
FIR के बावजूद पूरे पुणे में ऐप पर राइड्स चल रही हैं।
कुछ यात्रियों ने इस कार्रवाई पर ऐतराज़ जताया है। उनका कहना है कि शहर की पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा अच्छी नहीं है और ऑटोरिक्शा तथा कैब ड्राइवर अक्सर ज़्यादा पैसे लेते हैं या यात्रियों से बदतमीज़ी करते हैं।
ऑटोरिक्शा यूनियनों ने कार्रवाई का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने अधिकारियों की आलोचना भी की कि वे चिट्ठियां भेज रहे हैं, पर यह पक्का नहीं कर रहे कि सर्विस सच में बंद हो। यूनियनों ने राइडर्स के वेरिफिकेशन और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।
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