शेवगांव में हजारों पेड़ कटे, पेड़ लगाने का पोस्टर लगाने वाला वन विभाग साधे है चुप्पी
अहिल्यानगर के शेवगांव तालुका में हजारों पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आए 10 दिन हो गए, पर दोषी अफसरों पर कार्रवाई का कोई ब्योरा नहीं है। पर्यावरण प्रेमी सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अहिल्यानगर उपवनसंरक्षक के वन विभाग ने शहर में बड़े-बड़े आकर्षक पोस्टर लगाए हैं। इन पर लिखा है, "एक पेड़ लगाओ.. 50 साल बाद वह पेड़ आपके कितने काम आता है, यह जान लीजिए।" पोस्टरों में एक पेड़ की अहमियत गिनाई गई है। कहा गया है कि एक पेड़ से 15 लाख रुपये का ऑक्सीजन बनता है, 40 लाख रुपये के पानी का रिसाइकलिंग होता है और 35 लाख रुपये की कीमत का वायु प्रदूषण रुकता है। साथ ही पेड़ पक्षियों का बसेरा भी बनता है।
लेकिन जिस विभाग का दफ्तर आम जनता को पर्यावरण का पाठ पढ़ा रहा है, उसी में कुछ लोगों की जेबें गर्म हो रही हैं। अब इस दोहरे चेहरे के पीछे की कड़वी सच्चाई सबके सामने आ गई है। पर्यावरण को बचाने और धरती को हरा-भरा रखने के नाम पर सरकारी स्तर पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी यह सब हुआ।
मामला अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तालुका का है। आरोप है कि वन विभाग के कुछ भ्रष्ट अफसरों और रिश्वतखोर कर्मचारियों की मिलीभगत से यहां हजारों पेड़ बेहिसाब, गैरकानूनी तरीके से और बेरहमी से काट दिए गए। यह बात सबूतों के साथ सामने आई है और इससे लोगों में भारी गुस्सा है।
यह मामला खुलते ही वन विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने फौरन जांच और कार्रवाई के आदेश देने का दिखावा किया। मगर इस गंभीर घटना को पूरे 10 दिन गुजर चुके हैं और अब तक यह साफ नहीं है कि दोषी अफसरों पर असल में क्या कानूनी कार्रवाई हुई। विभाग इस बारे में पूरी तरह गोपनीयता बरत रहा है। मीडिया और पर्यावरण प्रेमियों ने पूछा, फिर भी अफसर मुंह बंद किए बैठे हैं।
पर्यावरण प्रेमियों ने गंभीर आरोप लगाया है कि पेड़ काटने वाले तस्करों और रिश्वतखोरों से हफ्ता लिया गया है, इसीलिए इस मामले पर पर्दा डालने की साजिश रची जा रही है। शेवगांव तालुका से गुस्से में यह सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी रखवाले ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी फरियाद लेकर किसके पास जाए। दबी जुबान में यह चर्चा भी चल रही है कि ऊपरी स्तर के कुछ अफसर इन भ्रष्ट साथियों को बचा रहे हैं।
जिले के पर्यावरण प्रेमी, वन प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता इस लूट और बेजुबान पेड़ों की कटाई को देखकर बेहद आक्रामक हो गए हैं। उनका कहना है कि आज ऑक्सीजन की कमी से लाखों लोग जान गंवा रहे हैं। ऐसे में हजारों घने पेड़ों को निगलने वाले, जो जिंदगी भर प्राणवायु देते हैं, इन भ्रष्ट अफसरों पर सिर्फ खानापूर्ति वाला निलंबन काफी नहीं होगा।
मांग जोर पकड़ रही है कि पेड़ों की इस कटाई से परोक्ष रूप से इंसानी सेहत से खिलवाड़ करने वाले और पर्यावरण का दम घोंटने वाले दोषी अफसरों पर तुरंत "सदोष मनुष्यवध" का मामला दर्ज किया जाए और उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाए।
एक तरफ विज्ञापनबाजी का तमाशा किया जाता है और दूसरी तरफ अपने ही आशीर्वाद से लाखों-करोड़ों की दौलत वाले बेजुबान पेड़ों को लकड़ी माफिया के साथ मिलकर कटवा दिया जाता है। इस दोमुंहे कामकाज का पर्दाफाश हो चुका है। अब पूरे जिले की नजर इस पर है कि अहिल्यानगर के मुख्य वनसंरक्षक और जिला प्रशासन क्या सख्त रुख अपनाते हैं और क्या दोषी अफसरों पर सचमुच डंडा चलेगा।
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