शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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उजनी के एआई डेटा सेंटर पर भिमानगर में रास्ता रोको, रोहित पवार की अगुवाई में चार घंटे हाईवे जाम

उजनी के एआई डेटा सेंटर पर भिमानगर में रास्ता रोको, रोहित पवार की अगुवाई में चार घंटे हाईवे जाम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

उजनी बांध इलाके में प्रस्तावित एआई डेटा सेंटर और दूसरे ऊर्जा प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों और मछुआरों की नाराजगी शनिवार (31 तारीख) को भिमानगर में सड़क पर उतर आई। विधायक रोहित पवार की अगुवाई में पुणे-सोलापुर राष्ट्रीय महामार्ग पर रास्ता रोको आंदोलन हुआ और करीब चार घंटे ट्रैफिक ठप रहा।

आंदोलन में इंदापुर, माढा, करमाळा, कर्जत और दौंड तालुका के हजारों किसान, मछुआरे और सर्वपक्षीय नेता शामिल हुए। रास्ता रोको सुबह 10 बजे शुरू हुआ। इसके चलते हाईवे के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और मुसाफिरों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए पुणे और सोलापुर जिला पुलिस ने बंदोबस्त लगा रखा था।

उजनी बांध इलाके में एआई डेटा सेंटर के अलावा अणुऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। स्थानीय लोगों को डर है कि इनसे उजनी के पानी के इस्तेमाल, खेती, पर्यावरण और मछुआरों के रोजगार पर असर पड़ेगा। इसी पृष्ठभूमि में भिमानगर के आंदोलन को लोगों का अपने आप जुटकर जोरदार साथ मिला।

मंच पर कई पार्टियों के नेता एक साथ दिखे। इनमें पूर्व मंत्री महादेवराव जानकर, सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटील, विधायक अभिजित पाटील, विधायक नारायण पाटील, विधान परिषद सदस्य प्रतापसिंह मोहिते-पाटील और पूर्व विधायक संजय शिंदे शामिल थे। अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। मांग यह रखी गई कि उजनी के पानी पर टिकी खेती को बचाया जाए, मछुआरों की रोजी-रोटी का ख्याल रखा जाए और स्थानीय लोगों को भरोसे में लिए बिना कोई प्रोजेक्ट न चलाया जाए।

रोहित पवार ने प्रोजेक्ट के खिलाफ सख्त रुख रखा। उन्होंने कहा, "उजनी हमारी जीवनदायिनी है। किसानों और मछुआरों को भरोसे में लिए बिना, उनकी जमीन पर हल चलाकर यह प्रोजेक्ट किसी भी हालत में यहां खड़ा नहीं होने देंगे।"

इसी बीच सोलापुर के अपर जिलाधिकारी आंदोलन की जगह पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों का निवेदन लिया और आश्वासन दिया कि किसानों और मछुआरों को भरोसे में लिए बिना प्रोजेक्ट पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद दोपहर 2.30 बजे आंदोलन स्थगित कर दिया गया।

प्रशासन के आश्वासन से आंदोलन को फिलहाल विराम मिला है, लेकिन उजनी का पानी, खेती का भविष्य, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण के सवाल अब भी बने हुए हैं। इसलिए इलाके के लोगों की नजर इस पर है कि राज्य सरकार इन प्रोजेक्ट को लेकर क्या रुख अपनाती है।

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