टोरेंट पावर प्रोजेक्ट पर निकम के समर्थन से भड़के संजय राउत, पेड़ों की कटाई पर सरकार को घेरा
रायगड के कर्जत में प्रस्तावित टोरेंट पावर के प्रोजेक्ट के लिए पेड़ कटने पर राजनीति गरमाई है। उज्ज्वल निकम के समर्थन के बाद संजय राउत ने कड़ा हमला बोला।
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रायगड जिले के कर्जत तालुका में टोरेंट पावर कंपनी का जलविद्युत ऊर्जा स्टोरेज प्रोजेक्ट प्रस्तावित है और इसे लेकर राजनीति गरमा गई है। विपक्ष और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंने इस पर सरकार को घेरा है। कर्जत के सायडोंगर और पाली खलाटी इलाके के जंगल में पेड़ों की कटाई का आरोप स्थानीय गांव वाले और पर्यावरण प्रेमी भी लगा रहे हैं।
इसी बीच वरिष्ठ विधिज्ञ, विशेष सरकारी वकील और बीजेपी के सांसद एड. उज्ज्वल निकम ने कहा है कि कर्जत पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट पर्यावरण के अनुकूल है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट की वस्तुस्थिति भी सामने रखी। निकम के पेड़ों की कटाई का समर्थन करने के बाद ठाकरे गुट के नेता और सांसद संजय राउत भड़क गए।
मंगलवार, 27 तारीख को मीडिया से बात करते हुए राउत ने कहा कि उन्हें निकम के लिए आदर है और वे उनके दोस्त हैं, लेकिन एक सांसदी के लिए उन्होंने अपनी इज्जत की धज्जियां उड़ा दी हैं। राउत के मुताबिक 10 पेड़ यानी एक कसाब है और वे पेड़ों और कसाब को एक ही तराजू में तौलते हैं। उन्होंने कहा कि निकम को समझना चाहिए कि जिन्होंने 2500 पेड़ काटे हैं, वे कसाब के बाप हैं।
राउत ने बताया कि पहले चरण में 33,000 पेड़ काटे जाने हैं, यानी पूरा जंगल खत्म किया जा रहा है। उनके मुताबिक वहां से भीमाशंकर वाइल्ड लाइफ 20 किलोमीटर दूर है और इस जंगल में आदिवासी रहते हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी के "एक पेड़ माँ के नाम" का हवाला देकर सवाल किया कि आदिवासियों के लगाए पेड़ों की भी तो माँ होती है। राउत ने कहा कि स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया है कि उस पहाड़ में ऐसी कई वनस्पतियां हैं जिनसे सांप, बिच्छू के जहर का इलाज होता है और लोगों की जान बचती है।
राउत का आरोप है कि देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने गुजरात की टोरेंट कंपनी को पूरा जंगल सौंप दिया है। उनके मुताबिक किसान विरोध करे तो उस पर बंदूक तानी जाती है और रायगड जिले से हजारों पुलिस वाले वहां तैनात हैं। राउत ने बताया कि उनकी और आदित्य ठाकरे की गांव वालों से बात हुई है और राज ठाकरे कल वहां जा रहे हैं। देश भर के पर्यावरणवादी भी उनसे संपर्क कर रहे हैं, यह लड़ाई यहीं नहीं रुकेगी।
कंपनी ने सफाई दी है कि यह प्रोजेक्ट 60 साल के लिए होगा और वन्यजीव संरक्षण किया जाएगा। इस पर राउत ने पूछा कि 200 और 300 साल पुराने पेड़ काटकर पौधे कहां लगाए जाएंगे, जगह कहां है। उन्होंने आरे में 3000 पेड़ कटने का जिक्र किया और कहा कि इस सरकार को शर्म नहीं आती। उन्होंने केंद्र और महाराष्ट्र से पर्यावरण मंत्रालय रद्द करने की बात भी कही।
राउत ने कहा कि वे उद्योग के खिलाफ नहीं हैं। उनके मुताबिक महाराष्ट्र यशवंतराव चव्हाण के जमाने से उद्योग के लिए अनुकूल राज्य रहा है और उन्हें मोदी या फडणवीस से यह सीखने की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें टाटा, बिड़ला, किर्लोस्कर और महिंद्रा जैसे उद्योगपति चाहिए, अडानी नहीं।
विदर्भ के बारे में राउत ने कहा कि चंद्रपुर के इलाके में अडानी को खदानें दी जा रही हैं और करीब 5000 पेड़ कटने वाले हैं। उन्होंने फडणवीस से इसका विरोध करने को कहा। साथ ही पूर्व वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार से आंदोलन खड़ा करने को कहा और बोले कि हम भी साथ आएंगे।
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