दिवाली पर पुणे से निजी बसों का किराया चार गुना तक, RTO की मुहिम के बाद भी राहत नहीं
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पुणे RTO की विशेष मुहिम के बावजूद गांव और शहर लौटने वाले यात्रियों से निजी बस ऑपरेटर कई गुना किराया वसूल रहे हैं। यात्रियों और कार्यकर्ताओं की शिकायतें RTO के पास पहुंची हैं।
दिवाली की भीड़ में अपने शहर या गांव जाने वाले यात्रियों को निजी बसों के टिकट के लिए भारी रकम देनी पड़ रही है। कई मामलों में किराया सामान्य से करीब चार गुना है। यह हाल तब है, जब पुणे रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) ने दिवाली के दौरान ऑपरेटरों के खिलाफ विशेष मुहिम शुरू कर रखी है।
यवतमाल जाने वाले सौरभ काकलिया ने कहा, "हर साल किराया तीन से चार गुना ज्यादा रहता है। मैं गुरुवार को यवतमाल जा रहा हूं और 4,500 रुपये का टिकट बुक किया है।" इंदौर जाने वाले अंकुश खोले ने बताया कि वे 5 नवंबर को इंदौर जा रहे हैं। उन्होंने एक महीने पहले टिकट बुक किया था और 5,000 रुपये लगे। उनके मुताबिक सामान्य किराया 1,200 से 1,800 रुपये के बीच रहता है और अब तो यह और बढ़ गया होगा।
नागरिकों का आरोप है कि निजी ऑपरेटर और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म गुमराह करने वाले किराए दिखा रहे हैं और तय सीमा से काफी ज्यादा रकम वसूल रहे हैं। इससे चल रही कार्रवाई के असर पर सवाल उठ रहे हैं।
कार्यकर्ता प्राजक्ता कुलकर्णी ने बताया कि वे RTO गईं और अर्चना गायकवाड से मिलकर 23 अक्टूबर को निजी बस ऑपरेटरों की ज्यादा वसूली की शिकायत दी। कुलकर्णी के मुताबिक RTO ने बताया कि ऑपरेटरों को डाक से नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने पूछा कि कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई, जबकि त्योहार की भीड़ बढ़ने से बहुत पहले ही किराए की समस्या सामने आ गई थी। उनका कहना है, "RTO से मेरा सवाल है कि ये कार्रवाई चिट्ठी डाक से भेजकर क्यों की जा रही है। ऑपरेटर को नोटिस कब मिलेगा और वह जवाब कब देगा? RTO को कम से कम डेढ़ महीने पहले कार्रवाई शुरू करनी चाहिए थी, क्योंकि तब भी टिकट के दाम ऊंचे थे।"
कुलकर्णी ने दावा किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले किराए और बुकिंग के दौरान दिखने वाली असली कीमत में बड़ा फर्क मिल रहा है। Raj Ratan Travel, Purple Travels और Verma Travels जैसे ऑपरेटरों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 5 नवंबर के टिकट 6,000 से 7,000 रुपये के दायरे में दिख रहे थे। उनके अनुसार कुछ ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म होम पेज पर करीब 4,500 रुपये का किराया दिखाते हैं, लेकिन सीट चुनने वाले पेज पर पहुंचते ही दाम 5,000 रुपये से ऊपर चला जाता है। उनका कहना था कि त्योहार में घर जाने की मांग ज्यादा होती है, इसलिए यात्रियों के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचते।
कुलकर्णी ने यह भी बताया कि 4 नवंबर को उनकी शिकायत पर RTO से फोन आया। अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया कि ज्यादा किराया लेने वाले ट्रैवल ऑपरेटरों पर विभाग जुर्माना लगा सकता है, लेकिन टिकट बुकिंग ऐप पर कार्रवाई साइबर पुलिस के अधिकार में आती है। उन्होंने एक वाकया भी बताया। शिकायत के बाद Prasanna Purple Travels से जुड़े एक टिकट विक्रेता ने इंदौर का टिकट 3,000 रुपये में दिलाने की पेशकश की। कुलकर्णी ने इसे ठुकरा दिया और पूछा कि सिर्फ शिकायत करने वालों को सस्ता टिकट देना कहां तक ठीक है, जबकि बाकी यात्री ऊंचे दाम चुकाते रहें। उनका मुख्य सवाल है कि ऑपरेटरों पर लगने वाले जुर्माने से उन यात्रियों को क्या राहत मिलेगी, जो पहले ही बढ़े दामों पर टिकट बुक कर चुके हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से दखल देने की अपील की है।
नागरिक प्रणव टोम्पे ने बताया कि उन्होंने भी ज्यादा किराए की शिकायत RTO में दी है, पर WhatsApp या ईमेल से अब तक जवाब नहीं मिला। उनकी शिकायत में पुणे से यवतमाल के 6 नवंबर 2026 के सफर का Sindh Radhe Travels का टिकट है। उन्होंने AC स्लीपर टिकट के लिए 4,497 रुपये दिए। उन्होंने मांग की कि अधिकारी जांचें कि यह किराया सरकारी नियमों के हिसाब से है या नहीं।
टोम्पे ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 67 के तहत जारी 27 अप्रैल 2018 के महाराष्ट्र सरकारी आदेश का हवाला दिया। उसके मुताबिक निजी कॉन्ट्रैक्ट-कैरेज बसों को संबंधित महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के किराए का 1.5 गुना ही लेना है। उन्होंने इस रूट का MSRTC किराया 1,275 रुपये बताया और उसका 1.5 गुना 1,912.50 रुपये निकाला। उन्होंने माना कि यह हिसाब साधारण सेवा श्रेणी के आधार पर है और RTO से कहा कि AC स्लीपर बस की लागू सीमा तय करने के बाद देखा जाए कि नियम टूटा या नहीं। उन्होंने विभाग से संदर्भ किराया जांचने, वसूली की पड़ताल करने, उल्लंघन साबित होने पर कार्यवाही शुरू करने और ऑपरेटर से ज्यादा ली गई रकम लौटाने का निर्देश देने की मांग की। साथ ही शिकायत का संदर्भ नंबर और की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है।
पुणे RTO के अधिकारियों ने कहा कि निजी कॉन्ट्रैक्ट-कैरेज बसें संबंधित श्रेणी के MSRTC किराए का 1.5 गुना से ज्यादा नहीं ले सकतीं। उनके मुताबिक, "त्योहारों में यात्रियों की मांग बढ़ने से ज्यादा किराए की शिकायतें आम तौर पर बढ़ जाती हैं। विशेष मुहिम ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के निर्देश पर शुरू की गई।" जांच टीमों को बसों और बुकिंग ऑफिस दोनों की जांच करने और ऑनलाइन व ऑफलाइन टिकट देखकर तय सीमा से ज्यादा लेने वाले ऑपरेटरों को पकड़ने के लिए कहा गया है।
असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर राहुल फसले ने माना कि ऑपरेटर बहुत ज्यादा किराया ले रहे हैं। उन्होंने कहा, "लेकिन जांच के दौरान हम बसें रोक नहीं सकते, क्योंकि मंजिल पर पहुंचने वाले यात्री रुकावट पर एतराज करते हैं।" फसले ने बताया कि परमिट की शर्तें तोड़ने पर जुर्माना लगाया जा रहा है और नोटिस दिए जा रहे हैं। जवाब संतोषजनक न हो तो परमिट रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाती है, जिसमें वक्त लगता है। ऑपरेटरों को नोटिस का जवाब देने के लिए तीन दिन दिए जाते हैं। उन्होंने कहा, "फिलहाल हम उन्हें चेतावनी दे रहे हैं, जुर्माना लगा रहे हैं और उल्लंघन पर नोटिस जारी कर रहे हैं।" रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर अर्चना गायकवाड और डिप्टी RTO स्वप्निल भोसले ने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।
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