गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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फ्लाईओवर के खर्च पर PMC और महा-मेट्रो की खींचतान में अटके पुणे मेट्रो के दो विस्तार

फ्लाईओवर के खर्च पर PMC और महा-मेट्रो की खींचतान में अटके पुणे मेट्रो के दो विस्तार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

नल स्टॉप-माणिक बाग और खराडी-खड़कवासला कॉरिडोर का टेंडर फिर टला, जमा करने की तारीख अब 30 दिसंबर।

पुणे मेट्रो के चार प्रस्तावित विस्तारों में से दो पर काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। वजह यह है कि पुणे महानगरपालिका (PMC) और महा-मेट्रो के बीच इस बात पर सहमति नहीं बनी कि आसपास की सड़क से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर कौन बनाएगा और उसका खर्च दोनों में कैसे बंटेगा। इसी खींचतान की वजह से नल स्टॉप-माणिक बाग और खराडी-खड़कवासला कॉरिडोर के टेंडर की तारीख एक बार फिर आगे खिसक गई है। अब टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख 30 दिसंबर कर दी गई है।

पिछले दिसंबर में टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से यह आठवां विस्तार है। दूसरी तरफ वनाज-चांदनी चौक और रामवाड़ी-वाघोली रूट लागू होने की तरफ बढ़ रहे हैं, लेकिन बाकी दोनों कॉरिडोर में इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजाइन के अनसुलझे मसलों की वजह से बात अटकी हुई है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारों विस्तारों का शिलान्यास किया था। इसके बावजूद नगर निगम और मेट्रो एजेंसी के बीच चल रहे मतभेद से इन दोनों हिस्सों में काम की रफ्तार को लेकर चिंता पैदा हो गई है।

नल स्टॉप-माणिक बाग रूट के बारे में निगम अधिकारियों का कहना है कि यहां आंबेडकर चौक और कर्वे पुतले के पास दो फ्लाईओवर चाहिए। इनके डिजाइन पर PMC और महा-मेट्रो के बीच कई दौर की चर्चा हो चुकी है, और राजनीतिक प्रतिनिधियों के सुझावों के बाद बदलाव भी किए गए। डिजाइन बदलने के बाद महा-मेट्रो ने इन स्ट्रक्चरों को बनाने का अपना खर्च अनुमान निगम को सौंपा। PMC ने इस खर्च पर सवाल उठाया है। उसका कहना है कि यह अनुमान उसके अपने हिसाब से करीब 50 प्रतिशत ज्यादा है। खर्च के इसी फर्क की वजह से दोनों एजेंसियां अगले कदम पर राजी नहीं हो पाई हैं।

खराडी-खड़कवासला विस्तार की दिक्कत अलग किस्म की है। यहां मसला प्रस्तावित हाई-कैपेसिटी मास ट्रांजिट रूट (HCMTR) के साथ तालमेल बिठाने का है। PMC ने शुरू में डंडेकर ब्रिज चौराहे पर फ्लाईओवर सुझाया था। इसके बाद महा-मेट्रो ने मेट्रो कॉरिडोर का टेंडर शुरू कर दिया। लेकिन एक ही हिस्से में फ्लाईओवर, मेट्रो की लाइन और HCMTR तीनों को समेटने में डिजाइन और इंजीनियरिंग की मुश्किलें आईं।

आखिर में डंडेकर ब्रिज का फ्लाईओवर प्रस्ताव छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने संकेत दिया कि पु ला देशपांडे गार्डन और निलयम-पार्टी प्लाजा चौराहे के पास मौजूद रैंप बिना अतिरिक्त फ्लाईओवर के ट्रैफिक संभाल सकते हैं।

एक और विकल्प पर विचार चल रहा है। चुनिंदा हिस्सों में, जिनमें पु ला देशपांडे गार्डन से लक्ष्मीनारायण चौक तक का टुकड़ा भी शामिल है, डबल डेकर स्ट्रक्चर बनाया जा सकता है। इस योजना में ऊपर के तल पर मेट्रो चलेगी और नीचे की जगह से आम सड़क का ट्रैफिक गुजरेगा। दोनों को समेटने के लिए ठीक जगहों पर सिंगल कॉलम डिजाइन पर भी सोचा जा रहा है।

जब तक दोनों एजेंसियां खर्च के बंटवारे और इंफ्रास्ट्रक्चर के इंतजाम पर फैसला नहीं करतीं, तब तक ये दोनों विस्तार बाकी प्रस्तावित कॉरिडोर के मुकाबले अमल के शेड्यूल में पीछे रह सकते हैं।

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