नासिक में रामतीर्थ पर 6,233 श्रद्धालुओं की गोदावरी आरती, हफ्ते में दूसरा गिनीज रिकॉर्ड
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नासिक, 31 अक्टूबर 2026: नासिक का नाम एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। शनिवार को रामतीर्थ पर 6,233 श्रद्धालुओं ने एक साथ गोदावरी नदी की आरती की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस भव्य समारोह में मौजूद थीं। यह आयोजन नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की तैयारियों के तहत हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम का हिस्सा था।
कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु, संत और आदिवासी समुदायों के लोग जुटे। नदी का किनारा आस्था और सांस्कृतिक विरासत के बड़े उत्सव में बदल गया। नासिक जिले के सात तालुकाओं के 650 गांवों से करीब 6,500 आदिवासी इसमें शामिल हुए।
सामूहिक आरती का आयोजन नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण के तहत रामतीर्थ गोदा आरती समिति ने किया। इसमें महाराष्ट्र के पालकमंत्री गिरीश महाजन का मार्गदर्शन रहा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने गोदावरी पूजन किया और संतों व धर्मगुरुओं की मौजूदगी में आरती देखी। नदी किनारे हजारों दीये जगमगाए, साथ में सामूहिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक प्रार्थनाएं हुईं।
सात दिन में दूसरा विश्व रिकॉर्ड: इससे पहले 25 अक्टूबर 2026 को रामतीर्थ पर 517 शंखवादकों ने एक साथ शंखनाद किया था और पहला विश्व रिकॉर्ड बना था। आयोजकों के मुताबिक सामूहिक आरती की तैयारी में नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण और रामतीर्थ गोदा आरती समिति के जरिए बारीक योजना और तालमेल रखा गया। 650 गांवों के आदिवासी समुदायों को इसमें शामिल किया गया।
आदिवासी भागीदारी: जिले के आदिवासी बहुल इलाकों से करीब 6,500 लोगों की मौजूदगी समारोह की खास बात रही। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भारत की सनातन सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने में आदिवासी समुदायों के योगदान का जिक्र किया। इस भागीदारी से यह भी दिखा कि प्रकृति से जुड़ी परंपराओं को जिंदा रखने में मूल निवासी समुदायों की भूमिका है। अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग एक जगह जुटे, जिससे सामाजिक सद्भाव और एकता में धार्मिक परंपराओं की भूमिका सामने आई।
सूखे पर चिंता: समारोह में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पड़े सूखे का मुद्दा भी उठा। अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने दुनिया भर में अत्यधिक मौसम की चुनौतियों का जिक्र किया और कहा कि सूखे ने महाराष्ट्र और देश के दूसरे हिस्सों में लोगों, खासकर किसानों को प्रभावित किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों और बाकी प्रभावित नागरिकों को जरूरी मदद देंगी और उनकी गरिमा व भलाई का ध्यान रखेंगी।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने भी सूखे से राहत के लिए प्रार्थना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि गोदावरी के आशीर्वाद से महाराष्ट्र में समृद्धि आएगी और किसानों का जीवन बेहतर होगा। उन्होंने राज्य के खेतिहर समुदायों में खुशहाली लौटने और महाराष्ट्र के फिर से समृद्ध और खेती में उपजाऊ बनने की प्रार्थना की।
गोदावरी संरक्षण पर जोर: कार्यक्रम में गोदावरी को बचाने की अहमियत भी रेखांकित की गई, जो नासिक और महाराष्ट्र के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम है। राष्ट्रपति ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर लगातार कोशिश करने की अपील की। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाला सिंहस्थ महाकुंभ बेहतर इंतजाम और जनभागीदारी से साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन में मिसाल कायम करेगा।
सात दिन में दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ नासिक की सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की तैयारियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। गोदावरी के किनारे हुई इस सामूहिक आरती में धार्मिक परंपराएं, जनभागीदारी और आदिवासी समुदायों का सांस्कृतिक योगदान एक साथ दिखा।
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