बारामती में 158 मिमी बारिश, नगर परिषद ने दो घंटे में मुख्य सड़कों से पानी निकाला
बारामती में सोमवार सुबह सात बजे तक 158 मिमी बारिश दर्ज हुई। नगर परिषद की टीम ने दो घंटे में मुख्य सड़कों से पानी निकालकर ट्रैफिक चालू कराया।
बारामती शहर में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया, लेकिन नगर परिषद की टीम ने सिर्फ दो घंटे में मुख्य सड़कों से पानी निकालकर ट्रैफिक फिर चालू करा दिया। सोमवार सुबह सात बजे तक शहर में 158 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जिससे निचले इलाके पानी में डूब गए थे।
बारिश सुबह होने से पहले ही शुरू हो गई थी और लगातार जारी रही। शहर के कई निचले इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया। मुख्य भिगवण रोड समेत कई प्रमुख रास्तों पर पानी बहने लगा, जिससे गाड़ियों का चलना मुश्किल हो गया। सुबह काम के लिए घर से निकलने वाले लोगों को परेशानी हो सकती थी, इसी बात को ध्यान में रखकर नगर परिषद प्रशासन ने फौरन इंतजाम शुरू कर दिए।
बारिश की तीव्रता और शहर के हालात की जानकारी मिलते ही उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने प्रशासन से संपर्क किया और जरूरी हिदायतें दीं। उन्होंने नगर परिषद अध्यक्ष सचिन सातव और मुख्य नगर अधिकारी पंकज भुसे से हालात की जानकारी ली। निचले इलाकों से पानी निकालने और ट्रैफिक चालू करने पर खास जोर दिया गया। सांसद पार्थ पवार और युवा नेता जय पवार ने भी जरूरी सूचनाएं दीं।
नगर परिषद अध्यक्ष सचिन सातव, मुख्य नगर अधिकारी पंकज भुसे, पार्षद और नगर परिषद के अफसर व कर्मचारी खुद मौके पर पहुंचे और काम की रफ्तार बढ़ाई। पानी निकालना, सड़कों की रुकावटें हटाना और ट्रैफिक चालू करना, इन सब कामों में संबंधित टीमें युद्धस्तर पर जुट गईं। सार्वजनिक निर्माण विभाग और ट्रैफिक विभाग के साथ तालमेल भी बिठाया गया। नतीजा यह रहा कि सिर्फ दो घंटे में मुख्य सड़कों के हालात पहले जैसे हो गए।
इस मौके पर दिवंगत अजित पवार की कार्यशैली को भी याद किया गया। बताया गया कि उन्होंने बारामती के विकास के साथ-साथ प्रशासन में फुर्ती, अनुशासन और लोगों के सवालों के प्रति जिम्मेदारी की संस्कृति कायम की थी। संकट के वक्त फौरन फैसला लेकर जमीन पर काम को पहले रखने की वही परंपरा इस बार फिर दिखी। बारिश का संकट बड़ा था, फिर भी जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के तालमेल से लोगों को राहत देने की कोशिश की गई।
एक रात में 158 मिमी बारिश, निचले इलाकों में जमा पानी और ट्रैफिक की चुनौती के बावजूद प्रशासन ने जिस तेजी से काम किया, उसकी चर्चा रही। इस कारगुजारी से यह संदेश मिला कि संकट कितना भी बड़ा हो, लोगों की मदद के लिए बारामती की व्यवस्था तैयार है।
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