सूखे के बीच बावनकुले का आदेश: किसानों के बकाया का भुगतान 20 नवंबर तक करें
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राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अफसरों को निजी कुओं के अधिग्रहण का बकाया 20 नवंबर तक चुकाने को कहा है।
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को अफसरों को आदेश दिया कि जिन किसानों के निजी कुओं का इस्तेमाल पिछले दो साल में पानी की किल्लत दूर करने के लिए हुआ, उनका बकाया 20 नवंबर तक चुका दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि पैसा नहीं मिला तो किसान आगे अपने कुओं का अधिग्रहण करने देने से मना कर सकते हैं।
बावनकुले सूखा निवारण पर राज्य मंत्रिमंडल की उप-समिति के अध्यक्ष हैं। एक सरकारी बयान के मुताबिक यह आदेश उन कई फैसलों में से एक है जो मौजूदा हालात में प्रभावित किसानों और गांवों को राहत देने के लिए घोषित किए गए।
बावनकुले ने यह भी बताया कि रोजगार गारंटी योजना VB-G RAM G में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने के प्रस्ताव को परखने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। उनके मुताबिक इस प्रस्ताव पर सरकारी आदेश 10 दिन के भीतर आने की उम्मीद है।
बुधवार को हुई उप-समिति की बैठक में राज्य के सूखे के हालात की समीक्षा हुई। तय हुआ कि जल जीवन मिशन के अधूरे काम तेजी से निपटाए जाएंगे, बागों को बचाया जाएगा और जहां चारा ज्यादा है वहां से कमी वाले जिलों में चारा भेजने की सुविधा दी जाएगी।
बयान के अनुसार केंद्र की मदद वाली पानी की योजना जल जीवन मिशन के करीब 75 फीसदी काम पूरे हो चुके हैं। बाकी 25 फीसदी काम प्राथमिकता से करने को कहा गया है।
राज्य सरकार ने 358 में से 304 तालुकों में सूखा घोषित किया है, यानी राज्य का लगभग 85 फीसदी हिस्सा। दिवाली से पहले तुरंत मदद के तौर पर हर किसान को 5,000 रुपये की शुरुआती राहत का ऐलान भी हो चुका है।
बयान में कहा गया कि 5 करोड़ रुपये से कम लागत वाली योजनाओं के लिए कम से कम 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्र के दिशा-निर्देशों के हिसाब से अगले तीन महीने में नियोजन भी किया जाएगा। जिला नियोजन समितियों (DPC) का आवंटन बढ़ाया जाएगा और काम दोहराने से बचने के लिए मनरेगा और DPC की योजनाओं को जोड़ा जाएगा।
बावनकुले ने अफसरों से एक SOP बनाने को कहा, ताकि सरकारी, मंदिर या दूसरी जमीन पर बिना औपचारिक रिकॉर्ड के खेती करने वाले चार से पांच लाख परिवारों को केंद्र और राज्य की योजनाओं का फायदा मिल सके। परती और दूसरी जमीनों पर खेती करने वाले किसानों को ज्वार, मक्का और चना जैसी फसलें उगाने की इजाजत भी दी जाएगी।
उप-समिति ने अफसरों से पानी के स्रोत फिर से चालू करने, बागवानी फसलों को बचाने और सूखे से प्रभावित 13 जिलों के प्रस्तावों में तेजी लाने को कहा। जिन तालुकों में सूखा घोषित करना जरूरी हो सकता है, उन पर अफसरों को 15 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट देनी है। 13 और तालुकों को सूखा प्रभावित सूची में जोड़ने की संभावना भी जांची जा रही है।
बैठक में खासकर नांदेड़ और लातूर के गांवों में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कथित जबरन वसूली की शिकायतों पर भी चर्चा हुई। कंपनियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर पूछताछ की गई कि क्या वे नियमों के खिलाफ जाकर कर्जदारों की आमदनी के 50 फीसदी से ज्यादा रकम उधार दे रही हैं।
बावनकुले ने इन कंपनियों को सूखे जैसे हालात में किसानों और महिलाओं से जबरन कर्ज वसूलने के खिलाफ चेताया। बयान के मुताबिक ज्यादातर ऐसे कर्ज महिलाओं के नाम पर हैं, जिनकी सीमा करीब 55,000 रुपये और अवधि दो साल है। कंपनियों से कहा गया कि सूखे की वजह से चुकाने में नाकाम कर्जदारों से जबरन वसूली करने की बजाय पात्र कर्जों का नियमों के मुताबिक पुनर्गठन करें।
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