बुधवार, 4 नवंबर 2026

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गिरनी कामगार संघर्ष समिति कर्जत के शेलू में घर लेने को राज़ी, कीमत घटाने की शर्त

गिरनी कामगार संघर्ष समिति कर्जत के शेलू में घर लेने को राज़ी, कीमत घटाने की शर्त तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

करीब 20,000 मिल मज़दूरों की नुमाइंदगी करने वाली समिति ने शेलू प्रोजेक्ट में घर लेने का फ़ैसला किया है, पर कीमतें और कम करने की शर्त रखी है।

मुंबई में घर पाने के लिए मिल मज़दूरों की दशकों पुरानी लड़ाई अब जल्द ख़त्म होने के करीब है। गिरनी कामगार संघर्ष समिति (GKSS) ने तय किया है कि वह कर्जत के शेलू में प्रपोज़्ड प्रोजेक्ट में घर लेने को तैयार है। यह समिति करीब 20,000 मज़दूरों को रिप्रेजेंट करती है। हालांकि मज़दूरों ने एक शर्त भी रखी है। वे चाहते हैं कि घरों की कीमतें और कम की जाएं।

यह फ़ैसला वसई में मिल मज़दूरों की एक दिन की मीटिंग में लिया गया। मीटिंग में मिल मज़दूरों के लिए सरकार की हाउसिंग पॉलिसी पर बात हुई। रिहैबिलिटेशन को लेकर दशकों से जो अनिश्चितता बनी हुई है, उस पर भी चिंता जताई गई।

पहले हालात अलग थे। कई मिल मज़दूर संगठन मुंबई से दूर घर बनाने के प्रपोज़ल का विरोध करते रहे थे। उनका कहना था कि बुज़ुर्ग मज़दूरों और उनके परिवारों को शिफ्ट करेंगे तो उनकी रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा और मुंबई से उनका कनेक्शन टूट जाएगा। अब मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के दूसरे हिस्सों में बेहतर कनेक्टिविटी और शहरीकरण की वजह से उनका रुख बदल गया है।

शेलू प्रोजेक्ट का शिलान्यास इस साल 1 मई को किया गया था। इसके तीन दिन बाद, 4 मई को कर्मयोगी AVP रियल्टी को वर्क ऑर्डर जारी किया गया। गिरगांव टाउनशिप नाम के इस प्रोजेक्ट में 31,005 घर बनाने का प्रपोज़ल है।

मुंबई में मिल मज़दूरों को घर देने का पहला फ़ैसला 1991 में हुआ था। उस वक़्त महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री सुधाकरराव नाइक की लीडरशिप वाली कांग्रेस सरकार थी। इतने साल बाद भी मज़दूर घर का इंतज़ार कर रहे हैं।

मीटिंग में सरकार की आलोचना की गई कि वह मुंबई में घर देने के अपने बार-बार किए गए वादे पूरे नहीं कर पाई। मज़दूरों की तरफ़ से बताया गया कि सरकार ने हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर मंगाने के वास्ते तीन सरकारी प्रस्ताव जारी किए हैं। लेकिन इनमें भी मुंबई में घर देने का कोई साफ़ वादा नहीं है।

यानी मज़दूर अब मुंबई से दूर कर्जत में घर लेने को राज़ी हैं, पर कीमतों में और कमी की उनकी शर्त बनी हुई है। साथ ही मुंबई में घर देने को लेकर सरकार की तरफ़ से साफ़ बात न होने की शिकायत भी कायम है।

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