मुंबई में सिग्नल फेल होने से लोकल घंटों लेट, यात्रियों ने सुनाई अपनी परेशानी
सिग्नल की गड़बड़ी से सेंट्रल रेलवे की लोकल ट्रेनें घंटों देरी से चलीं। यात्रियों ने बताया कि उन्हें कितनी परेशानी झेलनी पड़ी।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई में सिग्नल फेल होने की वजह से सेंट्रल रेलवे की लोकल ट्रेनें घंटों देरी से चलीं। एक यात्री ने बताया कि वह रोज की तरह दोपहर 12.40 बजे कल्याण से CSMT जाने वाली लोकल में बैठे। ट्रेन ठाणे स्टेशन तक बिना किसी दिक्कत के पहुंच गई, लेकिन मुलुंड के पास पहुंचते ही अचानक रुक गई। ट्रेन क्यों रुकी है, इस बारे में कोई घोषणा नहीं हुई।
ट्रेन वहां काफी देर खड़ी रही। फिर 30 सेकंड चलती और 20 मिनट या उससे ज्यादा रुक जाती। विक्रोली तक यही सिलसिला चलता रहा। आखिर में घोषणा हुई कि सफर के बीच में ट्रेन से न उतरें, क्योंकि यह खतरनाक हो सकता है। लेकिन हुआ क्या है, यह अब भी किसी ने नहीं बताया। यात्री बेचैन होने लगे थे।
तब तक दो घंटे की देरी हो चुकी थी। करीब 3.15 बजे, यानी पूरे तीन घंटे लेट, ट्रेन कुर्ला स्टेशन पहुंची। यहां एक महिला TC फर्स्ट क्लास के उस डिब्बे में चढ़ गई, जिसमें वह यात्री बैठे थे। उसने सबसे टिकट या पास दिखाने को कहा। यात्री इससे नाराज थे, पर किसी ने कुछ बोलने की हिम्मत नहीं की।
उन्होंने अपना वैध पास दिखाने से मना कर दिया और पूछा कि जब पूरा CR सिस्टम ठप है और यात्री इतने परेशान हैं, तो आज टिकट क्यों चेक हो रहे हैं। TC ने जवाब दिया, "मैं तो बस अपना काम कर रही हूं। मुझे अपनी ड्यूटी तो करनी ही है न?" वह करीब तीन घंटे से ट्रेन में थे और देरी से झुंझलाए हुए थे, इसलिए पास दिखाकर और वक्त बर्बाद करने को तैयार नहीं हुए।
उन्होंने TC से कहा कि पास चेक करना है तो सायन स्टेशन पर उनके साथ उतर जाएं, और खुद उतर गए। जैसा सोचा था, TC पीछे नहीं आई। उनका कहना है कि गलती पूरी तरह CR की थी, फिर भी अधिकारियों ने जरा भी हमदर्दी नहीं दिखाई। घंटों से लेट ट्रेन में TC को भेजना बिल्कुल गलत था।
रोहन कोली, स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट, मिड-डे: "दफ्तर जाते वक्त स्टेशन पर बहुत अफरातफरी थी, क्योंकि डोंबिवली में काफी देर तक कोई ट्रेन नहीं आई। शुक्र है कि करीब 2.50 बजे एक स्पेशल स्लो ट्रेन आ गई। लेकिन वह बहुत धीरे चल रही थी। भांडुप से ठीक पहले वह करीब 25 मिनट रुकी रही, जिससे सायन स्टेशन तक का मेरा सफर लगभग एक घंटा लंबा हो गया। जो यात्री घंटों से खचाखच भरी ट्रेन में खड़े थे, उन्हें बहुत दिक्कत हुई। मैंने करीब 4 बजे लोगों को रेलवे ट्रैक पर ठाणे की ओर पैदल चलते भी देखा।"
शिवदिनेश शर्मा, CSMT-घाटकोपर के नियमित यात्री: "आज कुर्ला से घाटकोपर जाना बहुत मुश्किल रहा। मैं प्लेटफॉर्म पर 35 मिनट से ज्यादा खड़ा रहा, पर कोई ट्रेन नजर नहीं आई। आखिर बाहर निकलकर कुर्ला से ऑटो-रिक्शा लिया। ड्राइवर ने 250 रुपये मांगे, यानी फंसे हुए रेल यात्रियों का खुलकर फायदा उठाया।"
राहुल यादव, जो कांजुरमार्ग से कल्याण की तरफ जा रहे थे: "मेरी 4 बजे एक जरूरी बिजनेस मीटिंग थी, लेकिन सिग्नल फेल होने की वजह से मैं पूरी तरह फंस गया और पहुंच नहीं पाया।"
सशांत नायर, CR लाइन के एक और नियमित यात्री: "जब भी ऐसी तकनीकी गड़बड़ी या केबल में आग से सिग्नल सिस्टम पर असर पड़ता है, तो उसका बोझ सड़क परिवहन और दूसरे साधनों पर आ जाता है। अगर पूरा नया हार्डवेयर लगाने में दिन लगेंगे, तो CR को सख्त निगरानी रखनी चाहिए, ताकि कल सुबह की भीड़ का वक्त भी ऐसी ही अफरातफरी में न बदल जाए।"
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।