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महाराष्ट्र में साढ़े 54 महीने में 13,928 किसानों की खुदकुशी, RTI में खुलासा

जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच महाराष्ट्र में दर्ज किसान आत्महत्याओं के आंकड़े RTI से सामने आए हैं।

महाराष्ट्र में साढ़े 54 महीने में 13,928 किसानों की खुदकुशी, RTI में खुलासा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र में जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच 13,928 किसानों की आत्महत्या दर्ज की गई। यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत राज्य सरकार के राहत और पुनर्वास विभाग से मिली है। इस हिसाब से हर दिन औसतन आठ से ज़्यादा मौतें हुईं। आंकड़ों के साथ खेती की तंगी, मुआवज़े के नामंज़ूर होने और ज़िलेवार डेटा न बताने को लेकर चिंता भी जताई गई है।

विभाग के मुताबिक, कुल 13,928 मामलों में से 8,945 मामले आर्थिक मदद के लिए योग्य पाए गए। 4,042 मामलों को अयोग्य घोषित कर दिया गया, जबकि 941 मामलों की जांच अभी चल रही है।

योग्य पाए गए 8,945 मामलों में से 8,650 परिवारों को हर एक को Rs 1 लाख का मुआवज़ा मिल चुका है। कुल मिलाकर इन परिवारों को Rs 86.50 crore दिए गए। वहीं 295 परिवार अभी भी पेमेंट का इंतज़ार कर रहे हैं।

रिजेक्ट हुए 4,042 केस सभी 13,928 दर्ज मामलों का लगभग 29% हैं। इससे सवाल उठता है कि क्लेम को परखने के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया क्या इस्तेमाल किए गए और क्या परिवारों को रिजेक्शन की वजह ठीक से बताई जा रही है।

यंग व्हिसलब्लोअर्स फ़ाउंडेशन के एक्टिविस्ट जीतेंद्र घाडगे ने 54 महीने की अवधि के लिए ज़िले के हिसाब से और महीने के हिसाब से किसान आत्महत्या के आंकड़े मांगे थे। उनका मकसद खेती की परेशानी के लेवल में ज्योग्राफिकल पैटर्न और बदलावों की पहचान करना था।

24 जुलाई को विभाग की पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर स्नेहल सावंत ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि यह जानकारी अलग-अलग डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस में उपलब्ध है। उन्होंने घाडगे को उन ऑफिस से संपर्क करने की सलाह दी।

इसके बाद घाडगे ने 18 अगस्त को पहली अपील फाइल की। 8 सितंबर को सुनवाई हुई। उसके बाद विभाग ने पूरे राज्य के लिए एक साथ आंकड़े तो दिए, लेकिन मांगा गया ज़िला-लेवल का ब्रेकडाउन नहीं बताया।

घाडगे ने कहा कि एक दशक में यह पहली बार है जब विभाग ने ज़िले के हिसाब से किसान आत्महत्या का डेटा देने से मना किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीनियर सरकारी अधिकारियों ने जानकारी रोकने के लिए विभाग पर दबाव डाला। अधिकारियों पर दबाव के इस आरोप को अलग से वेरिफाई नहीं किया जा सका।

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