मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026

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राज्य वन्यजीव मंडल का फैसला: दो नए अभयारण्य और 14 संवर्धन आरक्षित क्षेत्र मंजूर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडल की 26वीं बैठक में दो नए अभयारण्यों और 14 संवर्धन आरक्षित क्षेत्रों को मंजूरी दी गई।

राज्य वन्यजीव मंडल का फैसला: दो नए अभयारण्य और 14 संवर्धन आरक्षित क्षेत्र मंजूर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडल की 26वीं बैठक हुई। इस बैठक में राज्य के दो नए आरक्षित वनक्षेत्रों को 'वन्यजीव अभयारण्य' (Wildlife Sanctuary) घोषित किया गया। साथ ही राज्य के 7 जिलों में 14 नए संवर्धन आरक्षित क्षेत्रों (Conservation Reserves) के प्रस्ताव भी पास किए गए।

बैठक में वनमंत्री गणेश नाईक, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय खंदारे, प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एम. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) श्रीनिवास रेड्डी और मित्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी मौजूद थे।

गडचिरोली जिले का 'कोलामार्का संवर्धन आरक्षित क्षेत्र' अब आधिकारिक तौर पर वन्यजीव अभयारण्य बन गया है। यह इलाका बेहद दुर्लभ माने जाने वाले जंगली भैंसों के आवास के लिए जाना जाता है। जंगली भैंसों का संरक्षण और बेहतर ढंग से हो, इसी मकसद से यह फैसला किया गया।

दूसरा अभयारण्य ठाणे और पालघर जिलों की सीमा में आने वाले तानसा वन्यजीव अभयारण्य से जुड़ा है। इसे मानव रहित करने के लिए 'नवीन विस्तारित तानसा वन्यजीव अभयारण्य' का प्रस्ताव मंजूर हुआ। इसमें गांव ओगदा, खोडदे, तिरमाळ, पाचघर, फणसाड और आमले, इन छह गांवों का 588.767 हेक्टेयर राजस्व और निजी क्षेत्र शामिल करने को मंडल ने मान्यता दी है।

संवर्धन आरक्षित क्षेत्रों की बात करें तो पुणे, रायगड, नाशिक, नंदुरबार, ठाणे, पालघर और चंद्रपुर जिलों के 14 क्षेत्रों को मंजूरी मिली है। पुणे और रायगड में वेल्हे मुळशी और लोणावळा हैं। पुणे में भोरगिरीगड, नाशिक में दिंडोरी, सुरगणा और ताहराबाद, तथा नंदुरबार में चिंचपाडा है। रायगड में अलिबाग और घेरा माणिकगड, ठाणे में गुमतारा, पालघर में जव्हार, आशेरीगड और धामणी, और चंद्रपुर में एकारा को यह दर्जा मिला है।

मंडल ने भंडारा जिले के कोका वन्यजीव अभयारण्य के 100.139 वर्ग किलोमीटर और छत्रपति संभाजीनगर के जायकवाडी पक्षी अभयारण्य के 255.79 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को 'संकटग्रस्त वन्यजीव आवास' (Critical Wildlife Habitat) घोषित करने को भी मंजूरी दी।

मुख्यमंत्री ने अभयारण्यों में बांधों की मरम्मत, पुनर्वास और गाद निकालने के कामों के लिए हर बार अलग मंजूरी लेने के बजाय प्रबंधन योजना में सुधार करने को कहा। इसके आधार पर 3 महीने में नई नियमावली (SOP) बनाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को 'प्राकृतिक आपदा' घोषित करने, व्याघ्र परियोजनाओं के कोर और बफर क्षेत्र को शांति क्षेत्र घोषित करने, और बफर क्षेत्र के इच्छुक गांवों के पुनर्वास के लिए नई नीति बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

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