शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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मुंबई: किडनी फेल मां और ब्रेन शंट वाली बेटी का परिवार 45 लाख के कर्ज में, मदद की गुहार

मुंबई: किडनी फेल मां और ब्रेन शंट वाली बेटी का परिवार 45 लाख के कर्ज में, मदद की गुहार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 स्वास्थ्य डेस्क

निकेता खैरे डायलिसिस पर हैं और उनकी 14 साल की बेटी अरिसिया की 12 न्यूरोसर्जरी हो चुकी हैं। परिवार को ट्रांसप्लांट के लिए 8 से 10 लाख रुपये चाहिए।

मुंबई का एक परिवार इस वक्त दोहरी बीमारी और भारी कर्ज से जूझ रहा है। घर में सिर्फ महिलाएं हैं। 46 साल की निकेता खैरे आईटी सपोर्ट प्रोफेशनल हैं और एंड-स्टेज रीनल डिजीज (ESRD) से पीड़ित हैं। उनकी नस की पहुंच (वैस्कुलर एक्सेस) बार-बार फेल हुई है, इसलिए वे हफ्ते में तीन बार होने वाले मेंटेनेंस हीमोडायलिसिस के सहारे ही जिंदा हैं।

उसी घर में उनकी 14 साल की बेटी अरिसिया भट भी गंभीर बीमारी से लड़ रही है। दिमाग से तरल निकालने के लिए उसे आर्टिफिशियल सेरेब्रल शंट लगा है। अब तक उसकी 12 न्यूरोसर्जिकल प्रक्रियाएं हो चुकी हैं, जिनमें पिछले एक साल में ही आठ बड़ी और छोटी प्रक्रियाएं हुईं।

निकेता की किडनी की बीमारी 2012 में जुड़वां बच्चियों की इमरजेंसी डिलीवरी के दौरान पकड़ में आई थी। तब अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ा और इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस नाम की न टलने वाली बीमारी सामने आई। अगले छह सालों में उनकी दोनों किडनियां धीरे-धीरे खराब होकर पूरी तरह बंद हो गईं।

अरिसिया सात महीने में ही पैदा हो गई थी। उसे नवजात अवस्था में दिमाग के अंदर रक्तस्राव (न्यूनैटल इंट्राक्रेनियल हेमरेज) हुआ, जिससे दिमाग की सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड (CSF) सोखने की क्षमता हमेशा के लिए कमजोर हो गई और उसे क्रॉनिक हाइड्रोसेफालस हो गया। खोपड़ी में खतरनाक दबाव रोकने के लिए बचपन में ही सर्जनों ने वेंट्रिकुलोपेरिटोनियल (VP) शंट लगाया। शंट में हमेशा ब्लॉकेज और गंभीर इन्फेक्शन का खतरा रहता है। 14 साल में अरिसिया की 12 न्यूरोसर्जरी हो चुकी हैं। इस साल की शुरुआत में शंट में भयंकर इन्फेक्शन हुआ और वह कोमा में चली गई, जो उसके लिए सबसे मुश्किल दौर था।

लंबे समय की न्यूरोलॉजिकल परेशानी की वजह से अरिसिया का विकास देर से हुआ है। वह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर है और हाइपरएक्टिव भी है। वह पूरी तरह बोल नहीं पाती, ऐसा नहीं है। छोटे शब्दों और वाक्यों में वह अपनी बुनियादी जरूरतें बता देती है। वह पेंसिल नहीं पकड़ सकती और आम स्कूल नहीं जा सकती, लेकिन मोबाइल चलाने में माहिर है। मीडिया फोल्डर खंगालना, वॉल्यूम सेट करना और प्लेलिस्ट लगाना उसके लिए आसान है। उसे बॉलीवुड, हॉलीवुड और मराठी गाने पसंद हैं और वह अपना पसंदीदा गाना 'सांस में तेरी सांस मिली तो' गुनगुनाते हुए पूरे घर को खुश कर देती है।

अरिसिया की जुड़वां बहन अनाइरा दो मिनट बाद पैदा हुई थी। राहुल इंटरनेशनल स्कूल में वह पढ़ाई में अव्वल है, घर के काम में हाथ बंटाती है और बहन की देखभाल भी करती है। अनाइरा कहती है, "कभी-कभी मम्मी को देखती हूं तो लगता है कि मैं बचपना नहीं कर सकती। मैं पढ़ाई पर ध्यान देती हूं, क्योंकि इसी से मम्मी को सुकून दे सकती हूं। हम सब साथ हैं।" निकेता की 66 साल की मां नूतन खैरे घुटनों के घिसने से ठीक से चल भी नहीं पातीं, फिर भी वे घर संभालती हैं और अरिसिया की रोज की देखभाल में मदद करती हैं, जबकि निकेता लंबी शिफ्ट में काम करती हैं।

परिवार पर मेडिकल और निजी कर्ज मिलाकर 45 लाख रुपये से ज्यादा का बोझ है। इसमें 25 लाख रुपये का वह लोन भी है जो निकेता ने नौ महीने की बीमारी की छुट्टी के दौरान अपने रिहायशी फ्लैट पर लिया। बार-बार डायलिसिस, शंट इन्फेक्शन और इमरजेंसी में PICU में भर्ती होने से इंश्योरेंस की सारी लिमिट खत्म हो चुकी है। अब निकेता के ट्रांसप्लांट और अरिसिया की न्यूरोलॉजिकल देखभाल के लिए इमरजेंसी फंड के तौर पर परिवार को 8 लाख से 10 लाख रुपये की तुरंत जरूरत है।

निकेता के मुताबिक उनके पूर्व पति ने 2017 में बच्चियों के लिए पैसे देना बंद कर दिया। 2022 के तलाक के समझौते में गुजारे का कोई प्रावधान नहीं था। निकेता ने कहा, "मेरे एक्स-हसबैंड ने 2017 में मदद बंद कर दी और मुझे घर चलाने और ट्यूशन फीस भरने के लिए 20 लाख रुपये तक के पर्सनल लोन लेने पड़े। 2020 में जब मेरी किडनियां फेल हुईं, तो इलाज के लिए मैंने अपना फ्लैट 25 लाख रुपये में गिरवी रखा। इस साल जब अरिसिया बेहोश हुई, तो मैंने बार-बार अपने पूर्व पति से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने जवाब तक नहीं दिया। दोनों बेटियों के नाम के आगे कानूनी तौर पर उन्हीं का सरनेम भट लगता है।"

मीरा रोड के मीरा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. महेश प्रसाद ने बताया कि निकेता को जिंदा रखना अब जोखिम भरी चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा, "लंबे समय तक डायलिसिस कराने वाले मरीजों के लिए सबसे बड़ी अड़चन वैस्कुलर एक्सेस होती है। निकेता के मामले में एवी फिस्टुला कई बार फेल हो चुका है, जिससे बार-बार सर्जिकल कैथेटर डालने और ब्लडस्ट्रीम इन्फेक्शन के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। हर प्रक्रिया पर 50,000 से 75,000 रुपये खर्च होते हैं, जबकि उनके मंथली मेंटेनेंस डायलिसिस और दवाओं का खर्च 40,000 से 50,000 रुपये के बीच है। ट्रांसप्लांट ही उनकी जान बचाने का पक्का रास्ता है।" डॉ. प्रसाद के मुताबिक निकेता इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस की पुष्ट मरीज हैं, यह धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है जिसके इलाज के विकल्प सीमित हैं। उनकी किडनियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं और वे तीन साल से ज्यादा समय से नियमित मेंटेनेंस हीमोडायलिसिस पर हैं।

निकेता खुद को सिर्फ हालात की शिकार नहीं मानतीं। वे वर्कप्लेस में फ्लेक्सिबिलिटी और मेडिकल लीव देने के लिए TCS का शुक्रिया अदा करती हैं, लेकिन कहती हैं कि गंभीर पारिवारिक बीमारी से जूझ रहे सिंगल पैरेंट देखभाल करने वालों के लिए कोई सुरक्षा जाल न होना देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी कमी है। उन्होंने कहा, "मेरे पास कॉर्पोरेट नौकरी है और अपनी बात रखने की पढ़ाई भी, फिर भी एक घर में दो पुरानी बीमारियों ने मुझे 45 लाख के कर्ज में डुबो दिया। जिन परिवारों के पास कॉर्पोरेट सहारा नहीं है, उनका क्या होगा? ऑर्गन फेल होना किसी की निजी नाकामी नहीं है।"

निकेता का कहना है, "मैं 20 साल की उम्र से काम कर रही हूं, कॉलेज में तीन पार्ट-टाइम काम किए। मैं कभी पैसे की मदद नहीं मांगना चाहती थी। लेकिन आज मेरी जिंदगी मेरी दो बेटियों की है। अगर मेरा दिल रुक गया, तो अरिसिया का इलाज रुक जाएगा और अनाइरा का सहारा छिन जाएगा। हम चार औरतें हैं, शरीर से कमजोर, पर हमारे चारों दिल एक साथ धड़कते हैं। बस मुंबई हमें धड़कते रहने में मदद करे।" उनके पूर्व पति किरण भट ने कहा कि उन्होंने बेटियों की परवरिश या इलाज में पैसे का योगदान नहीं दिया है, वे खुद भी हाल में सेहत की दिक्कतों से जूझ रहे हैं और फिलहाल मेडिकल लीव पर हैं। उन्होंने माना कि निकेता अपनी बीमारी के बावजूद दोनों बेटियों की जिम्मेदारी अकेले अच्छी तरह संभाल रही हैं।

मदद करने के लिए बैंक का नाम कोटक महिंद्रा बैंक, ब्रांच मीरा-भायंदर ब्रांच (ठाणे-मीरा भायंदर रोड), खाताधारक का नाम निकेता नितीन खैरे, खाता नंबर 2052854440 और IFSC कोड KKBK0000649 है।

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