शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

मुंबई में बढ़ती गर्मी से जानवर बेहाल, अक्टूबर में पशु अस्पतालों में बढ़े मामले

मुंबई में बढ़ती गर्मी से जानवर बेहाल, अक्टूबर में पशु अस्पतालों में बढ़े मामले तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 स्वास्थ्य डेस्क

मानसून के बाद की गर्मी का असर मुंबई के पालतू जानवरों और पक्षियों पर दिख रहा है। परेल के BSDP पशु अस्पताल में इस महीने कई कुत्ते, बिल्लियां और पक्षी लाए गए।

मानसून के बाद की गर्मी का असर अब शहर के जानवरों पर साफ दिख रहा है। परेल के बाई साकरबाई दिनशॉ पेटिट (BSDP) हॉस्पिटल फॉर एनिमल्स में सिर्फ इसी महीने ऊंचे तापमान की वजह से 25 कुत्ते, 10 बिल्लियां, 38 चील, 47 कबूतर और 15 कौवे लाए गए। राहत की बात यह रही कि इनमें सिर्फ एक की मौत दर्ज हुई।

BSDP हॉस्पिटल के मैनेजिंग डॉक्टर डॉ. मयूर डांगर के मुताबिक इस महीने अस्पताल में आए कुल मामलों में से 20 से 30 फीसदी मामले गर्मी से जुड़े थे। उन्होंने कहा, "ऐसे मामले गर्मियों और अक्टूबर में हमेशा आते हैं, लेकिन इस साल तापमान ज्यादा है, इसलिए बढ़ोतरी दिख रही है। शहर में जिन कुत्तों और बिल्लियों ने दूषित पानी पिया था, उन्हें पीलिया की वजह से भी लाया गया।"

प्राइवेट पशु डॉक्टर भी मामलों में उछाल की बात कर रहे हैं, खासकर अक्टूबर में। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. शैलेश पेठे ने कहा, "हीट स्ट्रेस की वजह से लाए गए मरीजों में करीब 25 फीसदी का इजाफा हुआ है और अक्टूबर का पहला हफ्ता खास तौर पर खराब रहा।"

डॉ. पेठे ने समझाया कि मोटे फर वाली गैर-देसी नस्ल के कुत्तों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है। उनके मुताबिक, "वॉक के लिए बाहर निकलने पर भी गर्मी सेहत पर भारी पड़ती है। कुत्ते पानी भी कम पीते हैं और गर्मी से डिहाइड्रेशन और किडनी की दिक्कतें हो सकती हैं। अगर पालतू जानवर के मालिक वक्त पर ध्यान दें तो इन परेशानियों से निपटा जा सकता है।"

डॉक्टरों के मुताबिक गर्मी का असर छोटे-बड़े सभी जानवरों पर पड़ता है। अंधेरी के वेटरनरी डॉक्टर हितेश स्वाली ने कहा, "झोपड़ियों में रहने वाले कई जानवर परेशान हैं। जो जानवर हमेशा एयर-कंडीशन्ड कमरों में रहते हैं, उन्हें जोड़ों का दर्द हो रहा है। प्रदूषण की वजह से आंखों से पानी बहने की शिकायत लेकर भी जानवर लाए जा रहे हैं।"

प्राइवेट डॉक्टरों ने बताया कि अक्टूबर से दिसंबर तक उनके क्लिनिक में आमतौर पर कम भीड़ रहती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में हालात बदले हैं। चेंबूर की वेटरनरी डॉक्टर और पेन स्पेशलिस्ट डॉ. दीपा कात्याल इंजीनियर ने कहा, "गर्मी का असर हमेशा सीधा नहीं होता। ज्यादा तापमान में परजीवी और कल्चर तेजी से पनपते हैं, इसलिए इन्फेक्शन के कई मामले दिख रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "लोग कुत्तों को वॉक की जगह पूल में ले जाते हैं और वहां से उन्हें कान और त्वचा के इन्फेक्शन हो जाते हैं। एसी वाले घरों में जानवर पानी कम पीते हैं, जिससे कब्ज, यूटीआई और चलने-फिरने की दिक्कतें दिखती हैं। हो सकता है जानवरों को सीधा हीटस्ट्रोक न हो, लेकिन गर्मी का असर बना रहता है।"

PETA इंडिया में वेटरनरी सर्विसेज की सीनियर डायरेक्टर डॉ. मिनी अरविंदन ने बताया कि गर्मी के महीनों में PETA इंडिया रोज कम से कम एक गंभीर हीटस्ट्रोक केस संभालती है और हीट वेव के दौरान ऐसे केस और ज्यादा होते हैं। उन्होंने कहा, "अब वायु प्रदूषण भी जानवरों पर गंभीर असर डाल रहा है और हमारे इमरजेंसी केस बढ़ा रहा है। खराब हवा से आंख, नाक और गले में जलन, खांसी, उबकाई, घरघराहट और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।"

डॉ. स्वाली और डॉ. पेठे के मुताबिक उनके पास रोज पांच से सात संदिग्ध हीट-रिलेटेड बीमारी के मामले आ रहे हैं। डॉ. पेठे ने बताया कि इनमें से एक या दो आमतौर पर हीटस्ट्रोक से जुड़े होते हैं, जबकि सामान्य तौर पर ऐसे मामले तीन से पांच होते थे। एक प्राइवेट वेटरनरी डॉक्टर ने कहा, "मैं आमतौर पर रोज करीब 50 पालतू जानवर देखता हूं, लेकिन तापमान बढ़ने के साथ यह संख्या करीब 70 हो गई है।"

#मुंबई#सेहत#PT24#Health#Mumbai

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे