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बॉम्बे हाईकोर्ट: शांतिपूर्ण प्रदर्शन बुनियादी हक, पर आम लोगों की परेशानी भी देखी जाए

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध बुनियादी अधिकार है, पर पुलिस कार्रवाई रोकने से पहले आम लोगों की परेशानी भी देखी जाए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को साफ किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी करने से पहले अधिकारियों को उन स्थानीय निवासियों और आने-जाने वालों की परेशानी पर भी सोचना चाहिए, जिन्हें इन प्रदर्शनों से दिक्कत होती है।

यह बात चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) की सुनवाई के दौरान कही। इस PIL में आरोप है कि 10 और 11 अक्टूबर को मुंबई में हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया और पुलिस ने ज़्यादती की।

ये प्रदर्शन दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ हो रहे विरोध के साथ एकजुटता दिखाने के लिए किए गए थे। वकील सागर देवरे ने यह PIL दाखिल की है। उसमें कहा गया है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों को हिरासत में लिया। याचिका में मांग की गई है कि पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने के निर्देश दिए जाएं।

सुनवाई में कोर्ट ने जोर देकर कहा कि विरोध करना हर नागरिक का हक है, मगर ऐसे प्रदर्शन शांतिपूर्ण ही रहने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कोई भी सख्त आदेश देने से पहले प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों का बैकग्राउंड और क्रेडेंशियल जांचा जाना चाहिए।

बेंच ने आगे कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करने का ज़रिया नहीं बनना चाहिए। बेंच के मुताबिक महाराष्ट्र में पुलिस ने आम तौर पर संयम बरता है।

चार दखल देने वालों की तरफ से पेश वकील गायत्री सिंह ने कोर्ट को बताया कि शांतिपूर्ण मार्च में हिस्सा लेने के बाद इन लोगों को कथित तौर पर पूरे एक दिन हिरासत में रखा गया। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद इन्हें घर में नज़रबंद कर दिया गया और जब भी प्रदर्शन हुए, इन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

दूसरे दखल देने वालों की तरफ से पेश सीनियर वकील मिहिर देसाई ने हलफनामा देकर आरोप लगाया कि पुलिस ने दो लोगों को उनके घरों से उठाया था। कोर्ट ने पुलिस की ज़्यादती और गैर-कानूनी हिरासत के आरोपों पर सुनवाई करते हुए इन दलीलों पर गौर किया।

सुनवाई में शिवाजी पार्क इलाके के निवासियों की शिकायतें भी सामने आईं। उनका आरोप है कि प्रदर्शनों से स्थानीय लोगों को परेशानी हुई। निवासियों की तरफ से पेश वकीलों ने अलग-अलग दखल की अर्जियां दाखिल कीं। इनमें दावा किया गया है कि हाई कोर्ट के मौजूदा आदेश ने उस जगह पर ऐसे प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और ओरिजिनल पिटीशनर्स को इन चिंताओं पर भी जवाब देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर, 2026 को होगी।

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