मुंबई के बांधों में पानी तेजी से घटा, 10 फीसदी कटौती के बावजूद 19 दिन में भारी गिरावट
मुंबई को पानी देने वाले सात बांधों का स्टॉक 2 अक्टूबर के 96.05 फीसदी से 21 अक्टूबर को 90.82 फीसदी पर आ गया है।
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मुंबई को पानी पहुंचाने वाले बांधों में स्टॉक तेजी से नीचे जा रहा है। शहर में अभी 10 फीसदी पानी कटौती चल रही है, फिर भी बांधों का पानी तेजी से कम हुआ है। इसे मुंबईवासियों के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।
सिर्फ 19 दिन में बांधों का स्टॉक 75.7 अरब लिटर घट गया है। मुंबई के सात बांधों में पानी 2 अक्टूबर को 96.05 फीसदी था। 21 अक्टूबर को यह 90.82 फीसदी पर पहुंच गया। मुंबई को हर दिन करीब 4664 मिलियन लिटर पानी की जरूरत पड़ती है।
10 फीसदी कटौती के बाद रोज करीब 3690 मिलियन लिटर की सप्लाई मानें तो 19 दिन में 70.1 अरब लिटर पानी दिया जाता है। लेकिन बांधों में इससे ज्यादा पानी कम हुआ है। यह भी दावा किया जा रहा है कि हर दिन 25 करोड़ लिटर पानी वाष्पीकरण यानी भाप बनकर उड़ने से घट रहा है। अक्टूबर में ही स्टॉक इतनी तेजी से गिर रहा है, इसलिए आने वाली गर्मी में मुंबईवासियों पर पानी का संकट मंडरा रहा है।
मुंबई को अप्पर वैतरणा, मिडल वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, भातसा, विहार और तुलसी, इन 7 बांधों से पानी मिलता है। आगे के संभावित जल संकट और 'एल निनो' के बढ़ते असर को देखते हुए मुंबई महानगर पालिका ने पूरे शहर में 10 फीसदी पानी कटौती लागू की है। अगले साल अगस्त-सितंबर 2027 तक पानी पहुंचाने के लिए प्रशासन अभी से सख्त प्लानिंग कर रहा है।
बढ़ती गर्मी की वजह से पानी तेजी से भाप बनकर उड़ रहा है, और इसी से बांधों का जलस्तर जल्दी नीचे आ रहा है। जुलाई को छोड़ दें तो इस साल बारिश औसत तक नहीं पहुंची। अगस्त और सितंबर में बारिश के लंबे अंतराल की वजह से बांध पूरे नहीं भर पाए।
मौसम में बदलाव और एल निनो के संकट की वजह से अगले साल भी बारिश को लेकर अनिश्चितता रह सकती है। इसीलिए प्रशासन ने पहले ही पानी संभालकर इस्तेमाल करने के आदेश दिए हैं।
मुंबई में रोज जितना पानी सप्लाई होता है, उसका करीब 34 फीसदी लीकेज और चोरी में बर्बाद हो जाता है। इसे काबू में करने के लिए महानगर पालिका अब जमीन के नीचे लीकेज ढूंढने वाली नई तकनीक इस्तेमाल कर रही है।
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