दशहरे पर महारेरा ने 435 प्रोजेक्ट पास किए, घर खरीदारों ने मांगी पारदर्शिता
महारेरा ने दशहरे के मौके पर 435 हाउसिंग प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन 210 प्रोजेक्ट की मियाद बढ़ाने और 609 प्रोजेक्ट के प्लान में सुधार को मंजूरी देने से डिलीवरी और निगरानी पर सवाल उठे हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महारेरा ने दशहरे के मौके पर 435 नए प्रोजेक्ट रजिस्टर किए हैं। इन प्रोजेक्ट में कुल 32,981 फ्लैट प्रस्तावित हैं और अनुमान है कि इनमें करीब 23,719 करोड़ रुपये का निवेश होगा। लेकिन इसी के साथ 210 प्रोजेक्ट को मियाद बढ़ाने की मंजूरी मिली और 609 दूसरे प्रोजेक्ट के प्लान में सुधार को हरी झंडी दी गई। इससे प्रोजेक्ट की डिलीवरी और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट रमेश प्रभु महासेवा (महाराष्ट्र सोसाइटीज वेलफेयर एसोसिएशन) के संस्थापक चेयरमैन हैं। उनका कहना है कि रेगुलेटर के काम को इस पर परखा जाना चाहिए कि कितने प्रोजेक्ट पूरे हुए, कितने अटके और कितने लैप्स हो गए। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि घर खरीदारों की हिफाजत में कितनी पारदर्शिता है।
इलाके के हिसाब से देखें तो पुणे क्षेत्र में 140 नए रजिस्ट्रेशन हुए। इनमें सातारा, कोल्हापुर, सांगली और सोलापुर के प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) 201 प्रोजेक्ट के साथ सबसे आगे रहा। विदर्भ में 32, खानदेश में 24 और मराठवाड़ा में 8 प्रोजेक्ट रजिस्टर हुए। दादरा और नगर हवेली में 2 और दमन में 1 प्रोजेक्ट दर्ज हुआ।
नियमों के मुताबिक रेगुलेशन सिर्फ नए रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है। डेवलपर को प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख बतानी होती है और देरी हो तो मियाद बढ़वानी पड़ती है। ऐसा न करने पर प्रोजेक्ट के लैप्स घोषित होने का खतरा रहता है। मंजूर हो चुके प्लान में बदलाव के लिए भी महारेरा की मंजूरी जरूरी है। फिर भी सिर्फ मंजूरी के आंकड़ों से यह साफ नहीं होता कि देरी क्यों हुई और सुधार किस तरह के थे, इसलिए प्रोजेक्ट कितना आगे बढ़ा, यह पता नहीं चलता।
काम के बोझ की बात करें तो अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच महारेरा ने हाउसिंग प्रोजेक्ट के 6486 आवेदनों को मंजूरी देने की जानकारी दी। इनमें से 2056 प्रोजेक्ट को रजिस्ट्रेशन नंबर मिले, 2053 एक्सटेंशन प्रस्ताव मंजूर हुए और 2377 सुधार प्रस्तावों को क्लीयरेंस मिला।
19 अक्टूबर तक की मंजूरियों को जोड़ लें तो कुल 7740 आवेदन मंजूर हुए हैं। इनमें 2491 नए रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट, 2263 एक्सटेंशन और 2986 सुधार शामिल हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि रेगुलेशन का मतलब सिर्फ नए निर्माण का रास्ता खोलना नहीं है। प्रोजेक्ट की समयसीमा और मंजूर प्लान पर नजर रखना भी इसका अहम हिस्सा है।
दिवाली करीब है और महारेरा ने फिर कहा है कि मंजूरी से पहले प्रोजेक्ट को उसके कानूनी, तकनीकी और वित्तीय मापदंड पूरे करने होंगे। प्राधिकरण का यह भी कहना है कि दशहरे की मंजूरियों के लिए उसका रजिस्ट्रेशन विभाग चौबीसों घंटे लगा रहा।
रमेश प्रभु का कहना है, "पारदर्शिता सिर्फ आवेदनों और रजिस्ट्रेशन तक नहीं रहनी चाहिए। महारेरा को हर प्रोजेक्ट की रजिस्ट्रेशन तारीख, मूल और संशोधित डेडलाइन, एक्सटेंशन, कंप्लीशन और ओसी (ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट) की स्थिति, प्रस्तावित और डिलीवर हुए फ्लैट, और देरी या लैप्स की वजहें नियमित रूप से छापनी चाहिए। जहां कानून इजाजत दे, वहां शिकायतों की स्थिति, अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश, एनसीएलटी की कार्यवाही और की गई कार्रवाई भी बतानी चाहिए। 2017 से अब तक कई प्रोजेक्ट में देरी हुई या वे लैप्स हुए हैं। महारेरा को साफ करना चाहिए कि कितने पूरे हुए, कितनों के पास ओसी है और कितने अटके हुए हैं। प्रोजेक्ट के स्तर के रिकॉर्ड पहले उसके पोर्टल पर थे, पर बताया जाता है कि उन्हें आम लोगों की नजर से हटा दिया गया है। आंकड़ों का मिलान जांचे जा सकने वाले रिकॉर्ड से होना चाहिए। त्योहार पर लॉन्च का मतलब यह नहीं कि घर मिल ही जाएंगे।"
2017 से अब तक महारेरा को 56,944 आवेदन मिले हैं और 56,382 प्रोजेक्ट रजिस्टर हुए हैं। 452 आवेदन अतिरिक्त जानकारी मांगकर लौटाए गए और 110 अभी जांच में हैं।
ये आंकड़े अलग-अलग कामों को दिखाते हैं। रजिस्ट्रेशन से नए प्रोजेक्ट जुड़ते हैं, एक्सटेंशन डेडलाइन से जुड़े हैं और सुधार मंजूर प्लान में प्रस्तावित बदलावों के हैं।
महाराष्ट्र के हाउसिंग बाजार की कामयाबी सिर्फ त्योहारी सीजन के रजिस्ट्रेशन से नहीं नापी जाएगी। यह भी देखना होगा कि नए प्रोजेक्ट तैयार घरों में बदलते हैं या नहीं, और मौजूदा प्रोजेक्ट उन समयसीमाओं और प्लान के प्रति जवाबदेह रहते हैं या नहीं, जिन पर खरीदार भरोसा करते हैं।
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