गलत नंबर पर लगे कॉल से मिला परिवार, मुंबई में मिली लापता 19 साल की युवती भाई के साथ घर रवाना
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
वनराई पुलिस ने रात भर मोबाइल नंबर के अंक बदल-बदलकर कॉल किए और उत्तर प्रदेश की लापता युवती को उसके भाई तक पहुंचा दिया।
मुंबई की वनराई पुलिस ने कई गलत नंबरों पर कॉल करने के बाद आखिरकार सही आदमी को ढूंढ निकाला और उत्तर प्रदेश की एक लापता 19 साल की युवती को उसके परिवार से मिलवा दिया। युवती 2 नवंबर को तड़के करीब 3 बजे गोरेगांव ईस्ट में अकेली भटकती मिली थी। उसे अपने घरवालों का फोन नंबर ठीक से याद नहीं था।
पुलिस ने उसके बताए मोबाइल नंबर के अंकों को अलग-अलग तरीके से जोड़कर बार-बार कॉल किए। आखिर एक कॉल उसके भाई से जुड़ गया। भाई मुंबई आया और जांच-पड़ताल के बाद 4 नवंबर को युवती को उसके हवाले कर दिया गया।
गोरेगांव ईस्ट के कमल एस्टेट इलाके में रात की गश्त के दौरान महिला पुलिस कॉन्स्टेबल देवकर की नजर युवती पर पड़ी। वह घबराई हुई थी और रो रही थी। देवकर ने उसे पानी दिया, दिलासा दिया और धीरे-धीरे उसका भरोसा जीता। युवती ने अपना नाम उषादेवी बदलू रैदास बताया। उसने कहा कि वह उत्तर प्रदेश की रहने वाली है, 19 साल की है और मुंबई आ गई थी, लेकिन यहां उसका कोई रिश्तेदार नहीं है और रुकने की कोई जगह भी नहीं।
इसके बाद पुलिस इंस्पेक्टर सुभाषचंद्र पोस्चर मोबाइल-2 टीम के साथ मौके पर पहुंचे। आसपास किसी ने उसे पहचाना नहीं, तो उसे वनराई पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहां सब-इंस्पेक्टर फरांदे ने उससे बात की। भूख लगी है, यह पता चलने पर पुलिस ने उसके खाने का इंतजाम किया।
युवती को एक मोबाइल नंबर याद था, मगर उस पर कॉल करने से घरवालों से बात नहीं हो पाई। तब पुलिस ने उसके याद किए अंकों के अलग-अलग मेल आजमाए और रात भर में एक दर्जन से ज्यादा कॉल किए। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमारे एक अफसर ने देखा कि एक मोबाइल नंबर का आखिरी अंक 6 था। हमने उसकी जगह 9 लगाकर फिर कॉल किया। इस बार फोन उठाने वाला लड़की का भाई कुसमेस कुमार बदलू निकला।"
भाई ने युवती की पहचान की पुष्टि की और पुलिस को बताया कि वह 28 अक्टूबर से लापता है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के तंबौर पुलिस स्टेशन में 29 अक्टूबर को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, मिसिंग रजिस्टर नंबर 26/2026 के तहत। इसके बाद वह उसे घर ले जाने मुंबई के लिए निकला।
घरवाले तब तक मुंबई नहीं पहुंचे थे, इसलिए पुलिस ने युवती के रहने का इंतजाम जोगेश्वरी ट्रॉमा केयर हॉस्पिटल के सखी वन स्टॉप सेंटर में किया। भाई 4 नवंबर को पहुंचा। सब-इंस्पेक्टर जाधव ने गुमशुदगी का रिकॉर्ड जांचा और आधार कार्ड व दूसरे कागजात से दोनों का रिश्ता पक्का किया। इसके बाद उषादेवी को भाई के हवाले कर दिया गया।
इस कार्रवाई में पुलिस इंस्पेक्टर सुभाषचंद्र पोस्चर, सब-इंस्पेक्टर फरांदे और जाधव, महिला पुलिस कॉन्स्टेबल देवकर और पुलिस कॉन्स्टेबल सावंत शामिल थे। टीम ने जोन 3, उत्तर क्षेत्र के डीसीपी गजानन राजमाने और वनराई के सीनियर इंस्पेक्टर अब्दुल रऊफ शेख के मार्गदर्शन में काम किया।
पूरा घटनाक्रम इस तरह रहा। बताया जाता है कि 28 अक्टूबर को उषादेवी उत्तर प्रदेश में लापता हुई। 29 अक्टूबर को परिवार ने सीतापुर के तंबौर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी दर्ज कराई। 2 नवंबर को करीब 3 बजे वनराई पुलिस को वह गोरेगांव ईस्ट में भटकती मिली। रात भर पुलिस उसके याद किए नंबर के अंक बदलकर कॉल करती रही। 4 नवंबर को भाई मुंबई पहुंचा, पुलिस ने उसकी पहचान जांची और दोनों को मिलवा दिया।
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