शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

मुंबई में रैपिडो यात्रियों की शिकायत: राइडर और नंबर प्लेट ऐप से मेल नहीं खाते, सुरक्षा पर सवाल

जुर्म PT24 अपराध डेस्क

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस के एक संदिग्ध के कथित तौर पर रैपिडो बाइक-टैक्सी राइडर रहने की खबरों के बाद मुंबई के यात्री ऐप आधारित सवारी की सुरक्षा पर अपने अनुभव बता रहे हैं।

अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर फायरिंग के मामले में एक संदिग्ध के बारे में खबरें आई हैं कि वह कथित तौर पर रैपिडो में बाइक-टैक्सी राइडर के तौर पर काम कर चुका था। इसके बाद ऐप से चलने वाली सवारी सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा पर फिर से सवाल उठ रहे हैं।

रैपिडो से सफर करने वाले मुंबईकरों का कहना है कि ऐप पर जो राइडर और गाड़ी दिखती है, वह अक्सर पिकअप पर आने वाले राइडर और गाड़ी से अलग निकलती है। इसके अलावा लापरवाही से गाड़ी चलाने, इमरजेंसी में मदद तक पहुंचने की दिक्कत और सफर खत्म होने के बाद राइडर की जानकारी न मिलने की शिकायतें भी हैं। खास तौर पर महिला यात्री कहती हैं कि इन खामियों की वजह से शहर में सफर करते वक्त वे असुरक्षित महसूस करती हैं।

नाहुर की रहने वाली नंदिनी केलुस्कर के मुताबिक बाइक आई तो न नंबर प्लेट मिली, न राइडर का चेहरा। जल्दी में होने से वे बैठ गईं, लेकिन रास्ते में राइडर ट्रैफिक के बीच खतरनाक रफ्तार से बाइक दौड़ाने लगा। धीमे चलने को कहा तो उसने मजाक में टाल दिया। ऐप में इमरजेंसी बटन ढूंढा, पर स्थानीय अधिकारियों या तुरंत मदद से सीधे जुड़ने का कोई आसान तरीका नहीं मिला। उन्होंने कहा, "मैं बहुत डर गई थी।"

बोरीवली की ईशा खटू का कहना है कि ऐप का हेलमेट पहने एक अनजान आदमी आ गया, पर नंबर प्लेट स्क्रीन से अलग थी और चेहरा ऐप में दिए नाम वाले आदमी का नहीं था। उनके मुताबिक देर रात मुंबई में ऐसा मेल न खाना दिल बैठा देता है। उन्होंने कहा कि पहले वे इस शहर में कभी असुरक्षित नहीं लगीं, पर ऐसी लापरवाही से डर लगता है।

बांद्रा की कनक राजाध्यक्ष ने बांद्रा से सायन के लिए बाइक बुक की थी। बाइक का मॉडल और नंबर प्लेट, दोनों ऐप की जानकारी से अलग थे। यह उनकी पहली बाइक-टैक्सी राइड थी, इसलिए उन्होंने सफर रद्द कर दिया। राइडर ने उनसे बहस की। दोस्तों ने बाद में बताया कि रैपिडो के साथ ऐसा काफी होता है।

मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव संजना साहू पनवेल के पास रसायनी से घाटकोपर शिफ्ट हो रही थीं और उन्होंने रैपिडो कार बुक की। ड्राइवर का नाम और नंबर प्लेट मिल गए, पर कार पर पीली की जगह प्राइवेट सफेद नंबर प्लेट थी। पूछने पर ड्राइवर ने कहा, "Rapido pe chalta hai apna khudka gadi."

सांताक्रुज की माया शर्मा खार से सांताक्रुज के ऑटो सफर के बाद राइडर को ढूंढना चाहती थीं, पर उसकी प्रोफाइल स्क्रीन से गायब थी। बहस के दौरान वे ड्राइवर और नंबर प्लेट की फोटो लेना भूल गई थीं। कस्टमर सपोर्ट से गाड़ी की जानकारी मांगी तो जवाब आने में चार घंटे से ज्यादा लग गए। उनका सवाल है कि बाकी ऐप सफर के बाद भी जानकारी देते हैं, तो रैपिडो क्यों नहीं देता।

दादर की प्रिया कदम ने दफ्तर से लौटते वक्त रैपिडो ऑटो बुक किया और उसी वक्त उनकी मैनेजर ने उबर ऑटो बुक किया। दोनों राइड तुरंत मंजूर हो गईं, फिर पता चला कि एक ही ड्राइवर ने दोनों प्लेटफॉर्म पर दोनों बुकिंग ले ली थीं। उन्होंने पूछा कि ड्राइवरों को ऐसी व्यवस्था क्यों मिलनी चाहिए।

रैपिडो से राइडर और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन में फर्क, ट्रिप की जानकारी तक पहुंच और यात्री सुरक्षा पर छह खास सवाल पूछे गए थे। कंपनी का जवाब मुख्य चिंताओं पर नहीं था, खासकर इस पर कि ऐप में दिखने वाला राइडर और नंबर प्लेट आने वाली गाड़ी से अलग क्यों हो सकते हैं। कंपनी ने कहा, "रैपिडो में यात्री की सुरक्षा हमारी बड़ी प्राथमिकता है और सफर के दौरान मदद के लिए हमारे पास कई इंतजाम हैं।"

कंपनी के मुताबिक यात्री ऐप में लाल इमरजेंसी बटन से SOS दबाकर 24 घंटे चलने वाली इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम से जुड़ सकते हैं। यह सुविधा राइड शुरू होते ही मिल जाती है। इससे सेव किए गए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को अलर्ट भेजा जा सकता है और हादसे की सूरत में एम्बुलेंस का इंतजाम हो सकता है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच की राइड के बाद कस्टमर केयर टीम सुरक्षा जांचने के लिए यात्री से संपर्क भी करती है।

रैपिडो ने कहा कि बुकिंग कन्फर्म होते ही कैप्टन और गाड़ी की जानकारी यात्री को दी जाती है और कंपनी के पास भी रहती है। सफर के बाद किसी घटना की रिपोर्ट के लिए जानकारी चाहिए तो सपोर्ट टीम से मांगी जा सकती है। इसमें यात्री का अकाउंट और ट्रिप की जानकारी जांची जाती है, ताकि जानकारी सही व्यक्ति को ही मिले। सुरक्षा की शिकायत हो तो ऐसे अनुरोध प्राथमिकता से निपटाए जाते हैं। कंपनी ने यात्रियों से गड़बड़ियां ऐप में दर्ज करने की अपील की।

छह सवालों में यह भी पूछा गया था कि ऐप की नंबर प्लेट कभी-कभी आने वाली गाड़ी से अलग क्यों होती है, इमरजेंसी कॉलिंग की आसान सुविधा क्यों नहीं है, सफर के बाद जानकारी क्यों नहीं मिलती, जानकारी देने में घंटों क्यों लगते हैं, और राइडर या गाड़ी न मिलने पर यात्री को क्या करना चाहिए, सफर करना चाहिए या नहीं।

एक रिपोर्टर ने खुद अंधेरी रेलवे स्टेशन से अंधेरी ईस्ट में दोस्त के घर के लिए राइड बुक की। राइडर काली सुजुकी एक्सेस स्कूटर पर बिना हेलमेट आया। नंबर प्लेट ऐप की जानकारी से अलग थी, पर OTP मिल गया तो सफर शुरू हुआ। ट्रैफिक बढ़ने पर राइडर ऐप का रूट छोड़कर तंग गलियों में घुसा और लापरवाही से चलाने लगा। गलियों में रोशनी कम थी और वह धीमा चलने को तैयार नहीं था। रिपोर्टर ने दोस्त को फोन पर हाल बताया, पुलिस के पास जाने की चेतावनी दी और राइडर और नंबर प्लेट की फोटो ली। सफर खत्म होते ही ऐप से राइडर की जानकारी गायब हो गई। रिपोर्टर ने शिकायत दर्ज नहीं की।

#मुंबई#जुर्म#PT24#Crime#Mumbai

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे