चिटिंग मत करो... शिंदेसेना ने भाजपा को सुनाया, रवींद्र धंगेकर की सीधी प्रतिक्रिया; गोकुल की राजनीति गरमाई
गोकुल दूध संघ पर राज्य सरकार के चार संचालक नियुक्त करने के फैसले पर अब शिंदेसेना ने भी सरकार को सुनाया है।
गोकुल दूध संघ पर राज्य सरकार ने चार संचालक नियुक्त करने का फैसला लिया है। इससे संघ की राजनीति गरमा गई है। कल तक कांग्रेस और ठाकरे की सेना सरकार की आलोचना कर रही थी, अब शिंदेसेना ने भी सरकार को सुना दिया है। शिंदेसेना ने भाजपा से कहा कि गोकुल दूध संघ को किसानों ने छोटे बच्चे की तरह बड़ा किया है, इस संघ का सम्मान करो, लोकतंत्र का सम्मान करो, चिटिंग मत करो। इससे गोकुल के मुद्दे पर गठबंधन के अंदर ही खींचतान का माहौल बन गया है।
चार संचालक नियुक्त होने से शिंदेसेना ने नाराजगी जताई। पार्टी के नेता रवींद्र धंगेकर ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता का जनादेश अहम है। लोकतंत्र में जनादेश लिया जाता है और जनता ने जो जनादेश दिया है, उसका सम्मान रखकर काम करना पड़ता है। लेकिन कोई न कोई कमी रखने की कोशिश करके ऐसे चुनाव में देरी की जा रही है। ये संस्थाएं भूखे-प्यासे रहकर खड़ी की गई होती हैं और किसानों ने इन्हें बच्चों की तरह पाला होता है। इसलिए गोकुल में राजनीति किए बिना नतीजे का सम्मान रखना चाहिए। सरकार को कम से कम दखल देना चाहिए और संस्था को टिकाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, होठों पर एक और पेट में एक नहीं होना चाहिए, जो पेट में है वही होठों पर होना चाहिए। उलटे हाथ से खाने से सीधे हाथ से खाया हुआ कभी भी बेहतर होता है। इन शब्दों में धंगेकर ने भाजपा को सुनाया।
धंगेकर ने कहा कि 1950 में विट्ठलराव विखे पाटील ने महाराष्ट्र में सहकारिता की जड़ें जमाईं। उसे 70-80 साल हो गए हैं। महाराष्ट्र ने सहकारिता में बड़ा योगदान दिया है और कई सहकारी संस्थाओं से जनता का नाता जुड़ा है। इसलिए आज इस संस्था में इतना दखल देना ठीक नहीं है। हम सत्ता में हैं तो भी हमें छुपकर बोलना ठीक नहीं लगता। सहकारिता को खुली छूट दी जानी चाहिए। राज्य में जो-जो मुख्यमंत्री हुए, उन्होंने इन संस्थाओं को ताकत दी और जरूरत पड़ी तो आर्थिक ताकत भी दी। लेकिन गोकुल को देखकर मन को बुरा लगता है। धंगेकर ने उद्वेग जताते हुए कहा कि लगता है, लोकतंत्र है भी या नहीं।
उन्होंने कहा कि ऐसे चुनाव निरपेक्ष होने चाहिए, यही लोकतंत्र की जीत होती है। लोकतंत्र का सम्मान रखकर चिटिंग नहीं करनी चाहिए। पहले सहकारिता में सरकार का दखल नहीं था, अब दखल दिख रहा है। सहकारिता में पार्टी की राजनीति नहीं होनी चाहिए। किसानों की संस्था किसानों के हाथ में ही रहनी चाहिए। राजनीति और दखल से संस्था को परेशान नहीं करना चाहिए। ये संस्थाएं महाराष्ट्र की नसें हैं, सरकार को इन्हें ताकत देनी चाहिए और राजनीतिक नजर से नहीं देखना चाहिए। धंगेकर ने यह भी कहा कि देश के चुनाव से बड़ा गोकुल का चुनाव हो गया है और सवाल किया कि इसमें ऐसा क्या है।
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