आठवले बोले, उद्धव ठाकरे और फडणवीस को साथ लाने की कोशिश कर सकता हूं
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केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि वे उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बीच-बचाव की भूमिका निभाने को तैयार हैं।
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शुक्रवार को कहा कि शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच वे मध्यस्थ बनने को तैयार हैं। आठवले के मुताबिक, वे आगे चलकर दोनों नेताओं को हमेशा के लिए साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रमुख आठवले मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे, देवेंद्र फडणवीस और राज ठाकरे ने एक ही मंच साझा किया। आठवले ने कहा कि ये नेता एक मौके पर साथ आए थे। उनका कहना था कि शादी-ब्याह और दूसरे सामाजिक कार्यक्रमों में नेता अक्सर एक मंच पर दिखते हैं।
आठवले ने कहा, "मुझे लगता है कि वे इस मौके पर साथ आए। नेता शादी और दूसरे कार्यक्रमों में अक्सर मंच साझा करते हैं। उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस का एक मंच पर आना सोचना मुश्किल था, लेकिन राज ठाकरे ने उन्हें एक दिन के लिए साथ ला दिया।"
उन्होंने यह भी कहा, "मैं भी आगे चलकर देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए साथ लाने की कोशिश कर सकता हूं।"
उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के एक साथ दिखने पर महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच लोगों का ध्यान गया है। आठवले के बयान से इन नेताओं के बीच सुलह की संभावना को लेकर चल रही अटकलों को और हवा मिली है।
इससे पहले 29 अक्टूबर को शिवसेना (UBT) नेता और वर्ली के विधायक आदित्य ठाकरे ने समुद्र में "फ्लोटिंग होर्डिंग" लाने के राज्य सरकार के कदम की आलोचना की थी। उन्होंने इस फैसले को "बेहद गैर-जिम्मेदाराना, शायद भ्रष्ट और मुंबई की खूबसूरती बिगाड़ने वाला" बताया।
महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड ने शहर के प्रमुख वॉटरफ्रंट पर बार्ज पर फ्लोटिंग विज्ञापनों के लिए टेंडर बुलाए थे। 28 अक्टूबर को मुख्यमंत्री फडणवीस को लिखे पत्र में आदित्य ठाकरे ने इसका विरोध किया। उन्होंने लिखा, "मैं आपको समुद्र में अब 'फ्लोटिंग होर्डिंग' जोड़कर शहर को बदसूरत करने पर अपनी साफ आपत्ति जताने के लिए लिख रहा हूं।"
पत्र में आगे लिखा था, "सबसे पहले सर, बेरोकटोक प्रदूषण और उसके खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई न होने की वजह से शहर के ज्यादातर लोग तट से थोड़ी दूर से भी समुद्र नहीं देख पाते। दुख की बात है कि होर्डिंग ठेकेदारों के गठजोड़ का साथ देने वाले इस बेतुके फैसले से जो कुछ दिखेगा, वह नागरिकों के चेहरे पर चिपके विज्ञापन ही होंगे, जो पहले से ही जमीन पर बेलगाम प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।"
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