दिवाली से पहले दिवा में आरओबी के पास इमारत गिराई गई, रोहिदास मुंडे भड़के
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दिवा में आरओबी प्रोजेक्ट के बगल की इमारत पर नगर निगम ने बुलडोज़र चलाया। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उप जिला प्रमुख रोहिदास मुंडे ने इसे आम लोगों पर अन्याय बताया है।
दिवा शहर में आरओबी यानी रेलवे ओवरब्रिज प्रोजेक्ट के नाम पर आम किसानों और नागरिकों के साथ अन्याय हो रहा है। यह गंभीर आरोप शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के उपजिला प्रमुख एड. रोहिदास मुंडे ने महानगरपालिका प्रशासन पर लगाया है।
मुंडे के मुताबिक 5 नवंबर 2026 को दिवाली से ठीक पहले आरओबी के बगल वाली एक इमारत पर महानगरपालिका ने बुलडोज़र चलाकर उसे ज़मींदोज़ कर दिया। इसके बाद इमारत में रहने वाले लोगों के सामने बेघर होने की नौबत आ गई है और उनके परिवारों की गृहस्थी खुले में आ गई है। उन्होंने याद दिलाया कि 28 अक्टूबर 2021 को भी दिवाली के मौके पर दिवा आरओबी प्रोजेक्ट के लिए कुछ इमारतों पर तोड़क कार्रवाई हुई थी। आज वही घटना फिर दोहराई गई है।
किसानों के मुआवज़े का सवाल भी इसी मामले से जुड़ा है। शिकायत है कि इस प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले पांडुरंग हरी भोईर और दूसरे किसानों को उनकी ज़मीन का सही मुआवज़ा अब तक नहीं मिला है। मुआवज़े का मसला अटका हुआ है और इसी वजह से ये किसान आरओबी प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। एड. मुंडे का आरोप है कि प्रशासन इस मुद्दे पर बातचीत करके इंसाफ देने के बजाय सीधे तोड़क कार्रवाई कर रहा है।
मुंडे ने यह भी पूछा कि चर्चा है कि इस प्रोजेक्ट की चपेट में कई राजनीतिक नेताओं की इमारतें और संपत्तियां भी आ रही हैं, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। उनका सवाल था कि आम किसानों की ज़मीन पर खड़ी इमारतों पर ही महानगरपालिका का हथौड़ा क्यों चलता है, और क्या कानून सिर्फ गरीब और आम नागरिकों के लिए है।
उन्होंने पूछा कि पिछले पांच साल से प्रशासन क्या कर रहा था। प्रोजेक्ट की प्लानिंग के वक्त ही प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मुआवज़े का सवाल क्यों नहीं सुलझाया गया, और दिवाली के ठीक पहले ही लोगों के घरों पर बुलडोज़र चलाने की याद प्रशासन को अचानक क्यों आती है। मुंडे का कहना है कि इस पूरे मामले में महानगरपालिका अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है और कार्रवाई के पीछे के फैसले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह मांग उन्होंने की है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी की ओर से इस अन्याय का कड़ा विरोध किया जा रहा है। मुंडे के अनुसार दिवा शहर की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक स्तर पर भी विरोध जताया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्ताधारी शिंदे गुट के स्थानीय जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर ठोस रुख अपनाएंगे।
रोहिदास बामा मुंडे ने चेतावनी देते हुए कहा, "विकास के नाम पर आम लोगों को बेघर करना विकास नहीं है। आरओबी हमें भी चाहिए, लेकिन किसानों को मुआवज़ा दिए बिना, नागरिकों के पुनर्वास का इंतज़ाम किए बिना और राजनीतिक नेताओं की संपत्तियों को छोड़कर सिर्फ आम आदमी के घरों पर हथौड़ा चलाना हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। विकास सबका होना चाहिए, तबाही सिर्फ गरीब किसानों की ही क्यों? इस अन्याय के खिलाफ हम नागरिकों के साथ मज़बूती से खड़े रहेंगे।"
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