कर्जत में किसानों और आदिवासियों का विरोध, सैदोंगर पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग
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कर्जत तालुका पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर दोनों प्रोजेक्ट हमेशा के लिए रद्द करने की मांग की है।
कर्जत तालुका में प्रस्तावित सैदोंगर-1 और सैदोंगर-2 पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के खिलाफ किसान, आदिवासी समुदाय और स्थानीय लोग सामने आए हैं। दोनों प्रोजेक्ट की कुल प्रस्तावित क्षमता 6,000 मेगावॉट है।
कर्जत तालुका पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम एक विस्तृत ज्ञापन कर्जत के तहसीलदार के जरिए सौंपा है। इसमें दोनों प्रोजेक्ट को स्थायी रूप से रद्द करने की मांग की गई है।
समिति ने चेतावनी दी है कि इन प्रोजेक्ट से इलाके के जंगल, खेती की जमीन, नदियां, पानी के स्रोत, जैव विविधता और आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं। समिति के मुताबिक जब तक दोनों प्रोजेक्ट रद्द नहीं होते, आंदोलन लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से जारी रहेगा।
समिति से जुड़े एडवोकेट कैलाश मोरे ने कहा कि ज्ञापन में कर्जत तालुका के पर्यावरणीय महत्व को उठाया गया है। उनके मुताबिक यह तालुका सह्याद्री की पहाड़ियों से घिरा है और यहां घने जंगल, नदियां, नाले और समृद्ध जैव विविधता है।
समिति ने मांग की है कि सरकार का अंतिम फैसला आने तक पेड़ों की कटाई, वन मंजूरियां, निर्माण, सड़क का काम और जमीन अधिग्रहण से जुड़ी सारी गतिविधियां फौरन रोकी जाएं। साथ ही मंजूरी की प्रक्रिया की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और प्रभावित गांव वालों व पर्यावरण विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए।
ज्ञापन में एक खास चिंता यह उठाई गई है कि दोनों सैदोंगर प्रोजेक्ट के लिए पागे नदी पर एक ही साझा जलाशय प्रस्तावित है। समिति चाहती है कि दोनों प्रोजेक्ट का अलग-अलग आकलन करने के बजाय उनका मिलाजुला पर्यावरणीय असर परखने के लिए पूरा Cumulative Impact Assessment हो। इसके अलावा पाली-भूतिवली, पोशीर, शिलार और आसपास के इलाकों के पानी के स्रोतों पर संभावित असर देखने के लिए अलग हाइड्रोलॉजिकल स्टडी की भी मांग है।
समिति ने यह भी मांग की है कि प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी सरकारी मंजूरियां, क्लियरेंस, रिपोर्ट और करार सार्वजनिक किए जाएं और उनकी प्रमाणित कॉपी दी जाए। मांगे गए दस्तावेजों में DPR, EIA रिपोर्ट, पर्यावरणीय मंजूरी, स्टेज-I और स्टेज-II वन मंजूरी, काटे जाने वाले पेड़ों का ब्योरा, वन भूमि के रिकॉर्ड, आदिवासियों के वन अधिकार, ग्राम सभा के प्रस्ताव, जमीन अधिग्रहण के कागज, सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट, हाइड्रोलॉजिकल स्टडी और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की मंजूरियां शामिल हैं। प्रस्तावित 400 KV ट्रांसमिशन लाइन की DPR, सड़कों और मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट से जुड़ी इजाजत, और प्रोजेक्ट कंपनी व सरकार के बीच हुए करारों का ब्योरा भी मांगा गया है।
ज्ञापन में आदिवासी परिवारों और किसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई गई है। समिति ने जानना चाहा है कि कितने आदिवासी परिवार प्रभावित होंगे, व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार क्या हैं, ग्राम सभा की सहमति, खेती की जमीन का अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास का क्या हाल है। उसकी मांग है कि प्रभावित समुदायों के कानूनी अधिकार सुरक्षित होने तक आगे कोई कार्रवाई न हो।
समिति की नौ प्रमुख मांगों में दोनों प्रोजेक्ट का स्थायी रद्दीकरण, सभी संबंधित गतिविधियों पर रोक, मंजूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और प्रभावित गांव वालों व पर्यावरण विशेषज्ञों की समिति शामिल हैं। उसने ज्ञापन मिलने के आठ दिन के भीतर सरकार से साफ लिखित फैसला, की गई कार्रवाई की रिपोर्ट और मांगे गए दस्तावेजों की लिखित जानकारी देने को कहा है।
समिति ने अपने बयान में कहा, "हमें विनाश नहीं, टिकाऊ विकास चाहिए। हम उन Torrent प्रोजेक्ट को स्वीकार नहीं करते, जो कर्जत के जंगल, पानी के स्रोत, खेती और स्थानीय समुदायों के अस्तित्व के लिए खतरा हैं। यह किसी राजनीतिक पार्टी की लड़ाई नहीं है, बल्कि कर्जत की जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। जब तक दोनों Torrent प्रोजेक्ट रद्द नहीं होते, हमारा संघर्ष नहीं रुकेगा।"
ज्ञापन सौंपते समय कर्जत तालुका पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारी और पाली गांव के कई लोग मौजूद थे।
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