गुरूवार, 5 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

हसन मुश्रीफ और बेटों के खिलाफ PMLA केस बंद, अदालत ने मानी ईडी की क्लोजर रिपोर्ट

हसन मुश्रीफ और बेटों के खिलाफ PMLA केस बंद, अदालत ने मानी ईडी की क्लोजर रिपोर्ट तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 राजनीति डेस्क

विशेष अदालत ने कहा कि मूल अपराध रद्द हो चुका है, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला आगे नहीं चल सकता।

महाराष्ट्र के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता हसन मुश्रीफ और उनके बेटों के खिलाफ 2022 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बंद हो गया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की क्लोजर रिपोर्ट मंजूर कर ली है। वजह यह रही कि इस मामले से जुड़े मूल अपराध रद्द हो चुके हैं।

विशेष PMLA जज एस. वी. सहारे ने मंगलवार को आदेश दिया, जिसकी जानकारी गुरुवार को सामने आई। आदेश में जज ने कहा, "In view of the fact that the predicate offence has been quashed, the offence under the PMLA does not survive।" यानी मूल अपराध रद्द होने की वजह से PMLA के तहत अपराध नहीं बचता। अदालत ने 4 अप्रैल 2022 की प्रवर्तन केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) भी बंद कर दी और केस के कागज ईडी अधिकारियों को लौटाने का निर्देश दिया।

क्लोजर रिपोर्ट मांगते हुए ईडी ने विशेष अदालत से कहा था कि PMLA के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए शेड्यूल्ड अपराध का होना 'sine qua non' यानी जरूरी शर्त है। ईडी की दलील थी कि हाई कोर्ट के आदेशों के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत में कुछ बचा ही नहीं।

यह जांच पुणे के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) की मार्च 2022 की शिकायत से शुरू हुई थी, जो कंपनी कानून के कथित उल्लंघन को लेकर थी। इसके बाद फरवरी 2023 में कोल्हापुर के मुरगुड पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई। आरोप था कि किसानों से जुटाई गई शेयर पूंजी में फर्जीवाड़ा और हेराफेरी की गई।

मामले में मुश्रीफ और उनके बेटों के अलावा कोल्हापुर की सर सेनापति संताजी घोरपड़े शुगर फैक्टरी लिमिटेड और उसके डायरेक्टर भी आरोपी थे। ईडी ने आरोप लगाया था कि 2013-2014 के दौरान फैक्टरी को कई शेल और गैर-असली कंपनियों से करोड़ों रुपये मिले, जिनमें कोलकाता की और रजिस्टर से हटाई जा चुकी कंपनियां भी थीं। यह रकम इक्विटी और प्रेफरेंस शेयर की सदस्यता के नाम पर आई बताई गई।

जांच एजेंसी के मुताबिक कंपनी के वित्तीय विवरणों में 11.35 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश दिखाया गया, जबकि उसके पीछे बैंक का कोई रिकॉर्ड नहीं था। ईडी ने यह भी आरोप लगाया था कि काफी रकम परत-दर-परत और घुमावदार लेन-देन तथा नकद जमा के जरिए फैक्टरी, उससे जुड़ी लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) और डायरेक्टरों के खातों में पहुंचाई गई।

ईडी ने 2023 की शुरुआत में कई जगह तलाशी ली। जुलाई 2024 में उसने 2.07 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें और 7.70 लाख रुपये नकद अस्थायी तौर पर कुर्क किए। दिसंबर 2024 में नई दिल्ली की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इस कुर्की की पुष्टि की।

इसके बाद आरोपियों ने दोनों मूल मामलों को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जून 2025 में हाई कोर्ट ने मुरगुड पुलिस की FIR रद्द कराने की याचिका निपटा दी। कोर्ट ने गौर किया कि जांच अधिकारी पहले ही स्थानीय अदालत में 'C-Summary' रिपोर्ट (यानी मामला न सच, न झूठा) दाखिल कर चुके थे और वह रिपोर्ट मंजूर हो चुकी थी।

पिछले साल 6 नवंबर को हाई कोर्ट ने RoC की शिकायत पर पुणे की अदालत की ओर से जारी प्रक्रिया को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि आरोप 2013-14 के हैं, जबकि कंपनी कानून का संबंधित संशोधन अप्रैल 2021 में लागू हुआ और वह आगे के लिए लागू होता है। उसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता।

#मुंबई#सियासत#PT24#Politics#Mumbai

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे