मंत्रालय में दिवाली काव्यसंध्या, ब्रिजेश सिंह बोले 'आपलं मंत्रालय' हर कर्मचारी का अपना मंच
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दीपावली के मौके पर मुंबई के मंत्रालय में 'आपलं मंत्रालय' गृहपत्रिका की ओर से काव्यसंध्या हुई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने कविताएं सुनाईं।
मुंबई के मंत्रालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के साहित्यिक और सांस्कृतिक हुनर को बढ़ावा देने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) की तरफ से 'आपलं मंत्रालय' नाम की गृहपत्रिका निकाली जाती है। इसी पत्रिका की ओर से दीपावली के मौके पर मंत्रालय के परिषद सभागार में एक भव्य काव्यसंध्या रखी गई थी।
कार्यक्रम में बोलते हुए सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय के प्रधान सचिव और महानिदेशक ब्रिजेश सिंह ने कहा कि इस गृहपत्रिका के जरिए सभी कर्मचारियों को अपने लेखन और अपनी साहित्यिक अभिव्यक्ति को सामने रखने का अच्छा मौका मिलता है।
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लेखन का स्वागत करते हुए ब्रिजेश सिंह ने कहा, "मंत्रालय में कई कवि, लेखक और साहित्य के शौकीन अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। उनके हुनर को मंच मिले, इसीलिए इस काव्यसंध्या का आयोजन किया गया है। 'आपलं मंत्रालय' सिर्फ एक मासिक नहीं है, यह मंत्रालय के हर कर्मचारी का अपना मंच है। सबको इसमें सक्रिय हिस्सा लेकर अपने लेखन को और समृद्ध करना चाहिए।"
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, संचालक (सूचना) डॉ. किशोर गांगुर्डे, संचालक गोविंद अहंकारी, उपसंचालक वर्षा आंधळे और मुख्यमंत्री की जनसंपर्क अधिकारी कीर्ती पांडे खास तौर पर मौजूद थे।
अपर मुख्य सचिव विकास खारगे ने अपने संबोधन में पढ़ने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "पढ़ने से इंसान परिपक्व होता है और उसे सोचने का नया नजरिया मिलता है। आम इंसान को खास बना देने की ताकत पढ़ने में है। इसलिए हर किसी को पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। राज्य सरकार की तरफ से कला, साहित्य और संगीत के क्षेत्र के विकास के लिए कई उपक्रम चलाए जाते हैं, कर्मचारियों को उनका फायदा उठाना चाहिए।"
काव्यसंध्या में मंत्रालय के कवियों ने समाज, संस्कृति और इंसानी भावनाओं पर लिखी कविताएं पेश कीं और मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। कविताएं सुनाने वालों में सतीश मोघे, डॉ. नामदेव भोसले, मीनाक्षी पाटील, लीना संख्ये, अंजली ढमाळ, अजय भोसले, नामदेव कोळी, डॉ. जगदीश मोरे, शशी डंभारे और प्रवीण कुलकर्णी शामिल थे।
इसी कार्यक्रम में नामदेव कोळी के दिवाली विशेषांक 'वाघूर' का प्रकाशन भी मौजूद लोगों के हाथों किया गया।
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