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सचिन वाझे की जमानत हाईकोर्ट ने रद्द की, एंटीलिया और मनसुख हिरन केस

सचिन वाझे की जमानत हाईकोर्ट ने रद्द की, एंटीलिया और मनसुख हिरन केस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 अपराध डेस्क

बॉम्बे हाईकोर्ट ने NIA की अपील मंजूर कर स्पेशल कोर्ट का जमानत आदेश रद्द कर दिया।

मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी सचिन वाझे को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। गुरुवार को हाईकोर्ट ने 2021 के एंटीलिया बम स्केयर और मनसुख हिरन हत्या मामले में निचली अदालत से मिली उनकी जमानत रद्द कर दी।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने यह आदेश दिया। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA ने स्पेशल कोर्ट के 29 सितंबर के आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसमें वाझे को जमानत दी गई थी। बेंच ने यह अपील मंजूर कर ली। हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया, "स्पेशल कोर्ट का आदेश रद्द और निरस्त किया जाता है। NIA की अपील मंजूर की जाती है।"

वाझे एंटीलिया बम स्केयर केस में आरोपी हैं। फरवरी 2021 में उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई वाले घर के पास विस्फोटकों से भरी एक SUV मिली थी। इस मामले में संभावित गवाह रहे मनसुख हिरन बाद में मृत पाए गए, उनकी हत्या हुई थी।

इससे पहले हाईकोर्ट ने स्पेशल NIA कोर्ट से मिली जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसी वजह से पूर्व असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर वाझे ठाणे सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बने रहे, जहां वे पिछले पांच साल से बंद हैं।

NIA ने इस बर्खास्त पुलिस अधिकारी की जमानत का विरोध किया था। एजेंसी का कहना था कि वाझे गवाहों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और सबूत मिटा सकते हैं। NIA के वकील ने कहा, "वे (वाझे) पहले एक फर्जी एनकाउंटर केस में आरोपी रहे हैं। वे पुलिस अधिकारी थे, जिनका काम जनता की हिफाजत करना था। लेकिन उन्होंने खुद आपराधिक गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने सिर्फ डर और दहशत फैलाने की कोशिश ही नहीं की, बल्कि एक आदमी की हत्या की।"

अक्टूबर में NIA की अपील पर हुई पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वाझे की लाइफस्टाइल पर हैरानी जताई थी, खासकर महंगी गाड़ियों के इस्तेमाल पर। बेंच ने यह भी ध्यान दिलाया कि वाझे ओबेरॉय होटल के एक कमरे में करीब 100 दिन रुके थे। कोर्ट ने पूछा कि असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रैंक का अफसर इतनी महंगी गाड़ियां कैसे चला सकता है। हाईकोर्ट के मुताबिक वाझे की आर्थिक स्थिति, आचरण और पेशेवर रिकॉर्ड से जुड़ी ये बातें उन पर लगे आरोपों को परखने के लिए अहम हैं।

NIA की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में गवाहों के बयान रखे, जिनमें असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रहते हुए वाझे के महंगी और लग्जरी गाड़ियां इस्तेमाल करने का जिक्र था। सिंह ने एक गवाह का बयान पढ़कर सुनाया, जिसके मुताबिक वाझे काली मर्सिडीज में चलते थे और साथ वालों से अपने मोबाइल फोन बंद करवा देते थे।

कोर्ट ने पूछा कि क्या वह मर्सिडीज वाझे की ही है और क्या इस बात का कोई सबूत है कि गाड़ी उनके नाम पर रजिस्टर्ड थी। NIA ने हां में जवाब दिया तो कोर्ट ने पूछा कि क्या असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर का इतनी महंगी कार रखना आम बात है। कोर्ट ने टिप्पणी की, "चूंकि हमने अब तक किसी असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को मर्सिडीज चलाते नहीं देखा..."

कोर्ट ने NIA से वाझे की बाकी गाड़ियों की जानकारी भी मांगी और पांच गाड़ियों की सूची देखी, जिनका इस्तेमाल उन्होंने असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रहते हुए किया। सूची में एक सफेद BMW, एक काली वोल्वो, एक सफेद मर्सिडीज, एक सफेद टोयोटा लैंड क्रूजर प्राडो और एक और काली मर्सिडीज शामिल थीं। इतनी गाड़ियां देखकर कोर्ट ने कहा, "उनके पास पांच गाड़ियां हैं..."

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि NIA के जमा किए बयानों के मुताबिक वाझे महंगी मर्सिडीज में मुंबई पुलिस कमिश्नर के दफ्तर और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के निवास 'वर्षा' तक गए थे। सिंह ने कोर्ट को बताया कि वाझे दक्षिण मुंबई के एक सेवन-स्टार होटल में करीब 100 दिन रुके थे। कोर्ट ने सवाल किया कि उस वक्त करीब 90,000 रुपये महीना कमाने वाला पुलिस अधिकारी इतना महंगा रहन-सहन कैसे निभा सकता था। NIA ने बताया कि वाझे की मालिकाना और इस्तेमाल वाली इन गाड़ियों को इस केस में कथित वसूली से जोड़कर देखा जा रहा है।

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