शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

दिवाली पर झी मराठी के कलाकारों ने खोले बचपन के किस्से, किसी को पकवान तो किसी को किला पसंद

दिवाली पर झी मराठी के कलाकारों ने खोले बचपन के किस्से, किसी को पकवान तो किसी को किला पसंद तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

झी मराठी के आठ कलाकारों ने बताया कि बचपन की दिवाली कैसी थी और अब काम के बीच वे त्योहार कैसे मनाते हैं।

दिवाली आते ही घर की सफाई, पकवान की तैयारी, नए कपड़ों की खरीदारी, आकाश कंदील, रंगोली और दीयों की रोशनी याद आने लगती है। इस त्योहार पर परिवार के सब लोग एक साथ जुटते हैं। फिर भी हर किसी की दिवाली की यादें अलग होती हैं। किसी को मां के साथ की गई सफाई याद रहती है, किसी को दोस्तों के साथ बनाया किला, तो किसी को घर में बना पकवान। वक्त के साथ जिम्मेदारियां बढ़ीं और काम का तरीका बदल गया, मगर दिवाली का उत्साह आज भी वैसा ही है।

इस बार की दिवाली पर झी मराठी के कलाकारों ने अपने बचपन की यादें और आज की दिवाली के बारे में बातें की हैं। किसी को बचपन में मां का हाथ बंटाकर पकवान बनाना अच्छा लगता था, तो किसी को दोस्तों के साथ किला बनाने का चाव रहता था।

'सनई चौघड़े' सीरियल में जय का रोल करने वाले राज हंचनाळे के लिए यह दिवाली खास है। उन्होंने कहा, "कहते हैं कि भगवान जब देता है, तो दोनों हाथों से भरकर देता है। इस बार मुझे इसका सच्चा अनुभव हो रहा है। इस साल दिवाली में मेरी जिंदगी में लक्ष्मी दो रूपों में आई है। एक मेरी छोटी बेटी और दूसरा दर्शकों का भरपूर प्यार!" सीरियल को 'बेस्ट शो' का अवॉर्ड मिलने की खुशी भी उन्होंने जताई। उनके मुताबिक दर्शकों का प्यार और सोशल मीडिया पर आने वाले मैसेज उन्हें बहुत अच्छे लगते हैं। वे इस बार परिवार और छोटी बेटी के साथ पारंपरिक तरीके से दिवाली मनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों का प्यार और आशीर्वाद ही उनकी असली ताकत है।

'कमळी' में कमळी बनी विजया बाबर शूटिंग की वजह से इन दिनों दिवाली की तैयारी में मां की ज्यादा मदद नहीं कर पातीं। पर बचपन की यादें उनके लिए खास हैं। घर में सबसे छोटी होने के कारण वे स्कूल या कॉलेज से लौटकर मां के साथ सफाई करती थीं। विजया कहती हैं, "मुझे पकवान बनाना बहुत पसंद है। बचपन में मैं मां से बिना रंग वाले सादे दीये मंगवाती थी और घर बैठकर उन्हें खूब रंगती थी। मेरे हाथ से रंगा हुआ दीया दिवाली के दिन घर में जलता था, इससे मुझे बहुत खुशी होती थी।"

'कृष्णाई की लेकी' में शंकर का किरदार निभाने वाले रोहित परशुराम काम के सिलसिले में मुंबई में रहते हैं, इसलिए पहले की तरह तैयारी में शामिल नहीं हो पाते। बचपन में वे हर काम में आगे रहते थे, घर के पंखे साफ करने से लेकर मां के साथ पकवान बनवाने तक। उनके हिसाब से गरमागरम गुजिया खाने का मजा ही अलग है। पिताजी के साथ भोर के बाजार में दिवाली की खरीदारी करना और अपनी पसंद का आकाश कंदील लाना भी उन्हें याद है। स्कूल में आकाश कंदील बनाने की प्रतियोगिता का मजा भी उन्होंने लिया है। भोर की दिवाली, उन दिनों की ठंड और धुंध उन्हें आज भी याद आती है।

'तारिणी' की तारिणी यानी शिवानी सोनार के लिए दिवाली हमेशा से पसंदीदा त्योहार रही है। सेट पर भी और घर पर भी दिवाली मनती है, इसलिए यह खुशी पूरे 10 से 12 दिन मिलती है। इस बार घर की सजावट की जिम्मेदारी उन्होंने ली है और वे ऑनलाइन खरीदारी कर रही हैं। उन्हें छह कोनों वाला, एक ही रंग का पारंपरिक आकाश कंदील खास पसंद है। भाई के साथ किला बनाना उनकी खास याद है। मिट्टी जमा करना, पत्थर लाना, किले के छोटे सैनिक खरीदना या पुराने सैनिकों को रंगना, इन सबका शौक उन्हें आज भी है। इसलिए पकवान से ज्यादा दिलचस्पी उन्हें दिवाली में किला बनाने में है।

'धाकटी सुनबाई' में वेदांत बने मंदार जाधव बताते हैं कि अब वे दिवाली की तैयारी में घर की सफाई में थोड़ी मदद करते हैं, खरीदारी करते हैं और पकवान का मजा लेते हैं। बचपन में नए कपड़े, पटाखे और मां के हाथ का पकवान उन्हें खास उत्साहित करते थे। दिवाली से पहले घर सजाना, आकाश कंदील बनाना, लाइटिंग करना और तरह-तरह के पकवान बनाना, इन सबका अलग ही मजा था। अब जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं, पर उत्साह और खुशी वैसी ही है। उनके लिए दिवाली परिवार के साथ वक्त बिताने और खुशी मनाने का सुंदर अनुभव है।

'सनई चौघड़े' में असावरी का रोल करने वाली जुई पुष्पा प्रफुल्ल गोगरी के लिए दिवाली का मतलब परिवार के साथ धमाल-मस्ती है। मां और बहनों के साथ सफाई करते हुए होने वाली मस्ती, सजावट की खरीदारी और घर में साथ बैठकर पकवान बनाना उन्हें पसंद है। पिछले तीन साल से दिवाली का सामान जुई खुद खरीदती हैं। खुद कमाकर घर की जिम्मेदारी निभाने में उन्हें खुशी मिलती है। हर साल बहन निकिता के साथ रंगोली बनाने की याद उन्हें भावुक कर देती है। शादी के बाद बहन हैदराबाद में रहती है, इसलिए रंगोली बनाते वक्त जुई को उसकी बहुत याद आती है।

'कमळी' में ऋषी बने निखिल दामले के लिए दिवाली साल के पसंदीदा त्योहारों में से एक है। वे बताते हैं कि इसकी मुख्य वजह मां और दादी के हाथ का पकवान है। हर साल पूरा परिवार जुटकर पार्टी करता है, पकवान खाता है और तरह-तरह के खेल खेलता है। बचपन में दोस्तों के साथ किला बनाना उनकी दिवाली की सबसे सुंदर याद है। महाराष्ट्र के अलग-अलग किलों की प्रतिकृतियां बनाने और किला बनाने की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का उन्हें खास शौक था। इस बार शूटिंग की वजह से तैयारी में शामिल न हो पाने का अफसोस भी उन्होंने जताया।

'कृष्णाई की लेकी' में गौरी का रोल करने वाली ट्विंकल यादव बचपन में दिवाली पर गांव जाती थीं। वहां सब साथ बैठकर पकवान बनाते थे और वे शौक से यह सब देखती थीं। थोड़ी-बहुत मदद भी करती थीं, पर उनका ज्यादा ध्यान पटाखे फोड़ने पर रहता था। अब दिवाली की खरीदारी से लेकर घर के लिए क्या चाहिए और क्या नहीं, इस चर्चा तक वे मां के साथ शामिल रहती हैं। पहले सिर्फ छोटी-मोटी मदद करने वाली ट्विंकल अब पकवान बनाने में भी मन से हाथ बंटाती हैं। इस तरह झी मराठी के कलाकारों ने बचपन की यादों और आज की बदली जिम्मेदारियों के जरिए इस त्योहार की खुशी बयान की है।

#नागपुर#PT24#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे