मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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21:34 IST

AI बनाने वालों ने ही सरकारों को चेताया, कंट्रोल हाथ से निकलने का खतरा

दुनिया की सबसे ताकतवर AI सिस्टम बनाने वाली कंपनियों और रिसर्चरों ने खुद आगाह किया है कि टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उसे कंट्रोल करने के नियम उतनी रफ्तार से नहीं बन पा रहे।

AI बनाने वालों ने ही सरकारों को चेताया, कंट्रोल हाथ से निकलने का खतरा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की रफ्तार दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, और अब इसी टेक्नोलॉजी को बनाने में सबसे आगे रहे एक्सपर्ट्स की तरफ से ही गंभीर चेतावनियां आने लगी हैं। दुनिया के सबसे पावरफुल AI सिस्टम डेवलप करने वाली कंपनियों और रिसर्चरों का कहना है कि AI की क्षमता जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके मुकाबले इसे रेगुलेट करने की रफ्तार काफी धीमी है। इससे आने वाले समय में सरकारों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

AI की इस रेस में आगे निकलने के लिए कंपनियों और देशों के बीच जो होड़ मची है, उसकी वजह से सेफ्टी, कंट्रोल और ताकत के एक जगह सिमटने जैसे मुद्दे अब पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गए हैं।

AI सिस्टम अब सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं रहे। ये टेक्स्ट बनाना, कोड लिखना, रिसर्च में मदद करना, तस्वीरें और वीडियो तैयार करना जैसे कई पेचीदा काम भी कर पा रहे हैं। आगे चलकर अगर ये सिस्टम और ज्यादा स्वायत्त हो गए, तो इन पर इंसानों का कंट्रोल कितना असरदार रह पाएगा, यह सवाल उठ खड़ा हुआ है। AI डेवलप करने वाले कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जैसे-जैसे इस टेक्नोलॉजी की क्षमता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके सेफ इस्तेमाल के लिए जरूरी सिस्टम और नियम भी उसी रफ्तार से बनने चाहिए।

बेहद एडवांस AI बनाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर, बहुत बड़ी मात्रा में डेटा और मोटा आर्थिक निवेश चाहिए होता है। इसी वजह से यह आशंका जताई जा रही है कि आगे चलकर इस अत्याधुनिक AI टेक्नोलॉजी पर गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों का ही दबदबा बन सकता है।

ऐसे हालात में AI के डेवलपमेंट से जुड़े फैसले लेने और इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की ताकत चंद संस्थाओं के हाथ में सिमट सकती है। इससे पारदर्शिता, जिम्मेदारी और आम जनता के हित से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।

AI सेक्टर में मची इस होड़ की वजह से कंपनियां लगातार नए और पहले से ज्यादा पावरफुल मॉडल बनाने में जुटी हैं। लेकिन टेक्नोलॉजी जिस रफ्तार से डेवलप हो रही है, उसके मुकाबले कानून और रेगुलेटरी सिस्टम बनने में कहीं ज्यादा वक्त लग रहा है।

इसलिए AI के डेवलपमेंट को पूरी तरह रोकने के बजाय, सेफ्टी, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए साफ नियम बनाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में AI इंसानी जिंदगी के और भी ज्यादा क्षेत्रों में पहुंचने वाला है, ऐसे में इसके डेवलपमेंट और कंट्रोल के बीच बैलेंस बनाए रखना सरकारों के लिए बेहद जरूरी होगा।

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