Microsoft Security का विश्लेषण: असली हमलों में चुनिंदा कमज़ोरियाँ ही इस्तेमाल होती हैं
Microsoft Security के मुताबिक असली हमलों में हैकर सॉफ्टवेयर की कमज़ोरियों के एक छोटे हिस्से का ही फ़ायदा उठाते हैं। इसलिए सबसे ज़रूरी कमज़ोरियों को पहले ठीक करना समझदारी है।
Microsoft Security ने एक विश्लेषण छापा है, जिसमें असली हमलों में इस्तेमाल हुई सॉफ्टवेयर की कमज़ोरियों को देखा गया है। ऐसी कमज़ोरियों को CVE कहा जाता है, यानी हर जानी-पहचानी कमी को दिया गया एक अलग पहचान नंबर।
कंपनी के मुताबिक असली दुनिया में हमले कुछ ही CVE पर केंद्रित रहते हैं, जिनका असर बहुत बड़ा होता है। यानी हर कमज़ोरी पर हैकर हमला नहीं करते।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरक्षा टीमें तीन बातें देखकर तय कर सकती हैं कि पहले क्या ठीक करें: हमले की कितनी संभावना है, कमज़ोरी कितनी खुली हुई है, और हमला होने पर कितना नुक़सान फैल सकता है।
इस विश्लेषण के आँकड़े और बाक़ी ब्योरा मूल रिपोर्ट में है।
आपके लिए इसका मतलब
फ़ोन, कंप्यूटर और ऐप में कमज़ोरियाँ आम हैं, और हैकर उन्हीं का फ़ायदा उठाते हैं जो आसान और असरदार हों। इसलिए दुकान या घर में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस का समय पर अपडेट होना ज़रूरी है।
आप क्या करें
- फ़ोन, कंप्यूटर और ऐप के अपडेट आते ही इंस्टॉल करें।
- पुराना सॉफ्टवेयर या ऐप, जिसका अपडेट अब नहीं आता, इस्तेमाल करना बंद करें।
ये शब्द समझ लें
- CVE
- सॉफ्टवेयर की किसी जानी-पहचानी कमज़ोरी को दिया गया सार्वजनिक पहचान नंबर।
- कमज़ोरी (vulnerability)
- सॉफ्टवेयर में ऐसी चूक जिसका फ़ायदा उठाकर हैकर अंदर घुस सकता है।
यह खबर PT24 ने AI की सहायता से, स्रोत की रिपोर्ट के आधार पर अपने शब्दों में समझाई है। स्रोत के अपने शब्द नीचे बिना बदलाव के हैं।
मूल शीर्षक: What exploited vulnerabilities have in common: A data-driven analysis of real-world attacks
Microsoft Security publishes this report on its own site.
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