वाशिम: तूर के फूलों पर काली इल्ली का बढ़ता प्रकोप, किसानों पर कीड़े काबू करने का अतिरिक्त खर्च
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
फूल आने के अहम दौर में ही कीड़ों का प्रकोप बढ़ने से तूर के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है और किसान चिंता में हैं।
शिरपूर जैन: इस साल बारिश के मनमौजी रवैये और प्रतिकूल मौसम की मार खरीफ की फसलों पर पड़ रही है। अब बची हुई तूर की फसल पर भी इल्ली का प्रकोप बढ़ता दिख रहा है। खेतों में तूर पीले-पीले फूलों से भरी है, लेकिन इन फूलों और कलियों पर इल्ली का हमला शुरू हो गया है, इसलिए किसान चिंता में हैं। फूल आने के अहम दौर में ही कीड़ों का प्रकोप बढ़ने से तूर के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस खरीफ सीजन में बारिश की अनियमितता का बड़ा नुकसान सोयाबीन को हुआ। कई किसानों के खेत में सोयाबीन की बढ़त रुक गई, जबकि हल्दी की फसल भी पानी की कमी से अधूरी हालत में है। किसानों को उम्मीद थी कि तूर अच्छी पैदावार देगी। कुछ इलाकों में तूर के पौधे हरे-भरे हैं और उन पर पीले फूलों की जबरदस्त बहार आई थी। लेकिन फूल और फली लगने की अवस्था में अलग-अलग कीड़ों का हमला दिख रहा है। फलियों को नुकसान पहुंचने से फूल झड़ने और फली झड़ने की समस्या का डर है।
तूर में बड़ी तादाद में फूल लगने का वक्त उत्पादन के लिहाज से अहम होता है। इसी अवस्था में कीड़ों का प्रकोप बढ़े तो फूलों को नुकसान होता है और फलियां कम बन सकती हैं। किसान पहले ही कुदरत की मार से आर्थिक संकट में थे, अब कीड़ों को काबू करने का अतिरिक्त खर्च भी आ खड़ा हुआ है। महंगी कीटनाशक दवाएं छिड़कने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक नतीजा मिलेगा या नहीं, यह फिक्र उन्हें सता रही है।
इल्ली का प्रकोप वक्त रहते काबू में लाने के लिए कृषि विभाग किसानों को कीड़े की सही पहचान, प्रकोप के स्तर और कीड़ों के सही प्रबंधन के बारे में मार्गदर्शन दे। गैरजरूरी तौर पर बार-बार कीटनाशक छिड़कने के बजाय कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उपाय करने की जरूरत है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।