रविवार, 11 अक्टूबर 2026

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22:55 IST

विश्व बैंक ने पाकिस्तान को दक्षिण एशिया की सूची से हटाया, MENAAP में डाला

विश्व बैंक ने अपने क्षेत्रीय वर्गीकरण में बदलाव कर पाकिस्तान को दक्षिण एशिया से बाहर कर दिया है। पाकिस्तान में इस पर नाराज़गी है।

विश्व बैंक ने पाकिस्तान को दक्षिण एशिया की सूची से हटाया, MENAAP में डाला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

विश्व बैंक ने अपने क्षेत्रीय वर्गीकरण (Regional Classification) में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव में पाकिस्तान को 'दक्षिण एशिया' की सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है। पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब उसे विश्व बैंक की तरफ से यह एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय झटका लगा है।

नई व्यवस्था के हिसाब से दक्षिण एशियाई देशों की सूची में अब भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका और पाकिस्तान (MENAAP) नाम के नए समूह में रखा गया है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान के सियासी और आर्थिक हलकों में काफी हलचल मची है और लोगों में गुस्सा देखा जा रहा है।

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार शहबाज़ राणा ने 'एक्सप्रेस टीवी' पर अपने खास विश्लेषण वाले कार्यक्रम में इसके पीछे की कहानी बताई। उनके मुताबिक विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा (Ajay Banga) भारतीय मूल के हैं और उनकी योजना थी कि विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र का मुख्य दफ्तर नई दिल्ली में बने। भारत और पाकिस्तान के बीच बिगड़े राजनयिक रिश्तों और तनाव को देखते हुए, अगर यह दफ्तर भारत में होता तो पाकिस्तानी अफसरों को बार-बार नई दिल्ली का दौरा करना पड़ता। इससे वीज़ा और सुरक्षा के गंभीर सवाल खड़े हो जाते।

इन्हीं संभावित दिक्कतों और राजनयिक उलझन से बचने के लिए पाकिस्तान सरकार ने विश्व बैंक के इस पुनर्गठन पर चुपचाप सहमति दे दी थी। लेकिन अब यही फैसला उसके गले की फांस बन गया है और वहां तीखी आलोचना और विरोध शुरू हो गया है। पाकिस्तानी जानकारों का कहना है कि इस फैसले को मंजूरी देना एक भयंकर रणनीतिक गलती थी। भारत-पाकिस्तान तनाव की वजह से भारत के साथ एक ही क्षेत्रीय मंच पर रहने से बचने की कोशिश में पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया में अपनी भौगोलिक और रणनीतिक जगह गंवा दी है।

विश्लेषकों के मुताबिक क्षेत्रीय वर्गीकरण सिर्फ कागज़ी बात नहीं है। इसका सीधा असर वैश्विक विकास निधि, फंड के बंटवारे और नीतिगत फैसलों पर पड़ता है। अब तक पाकिस्तान की तुलना भारत और बांग्लादेश जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से होती थी, जहां खेती और सामाजिक विकास के मुद्दे एक जैसे थे। MENAAP समूह में आने के बाद उसकी सीधी तुलना सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे बेहद अमीर तेल उत्पादक देशों से की जाएगी।

विश्व बैंक की ताज़ा आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक MENAAP क्षेत्र में गरीबी का स्तर कोविड से पहले वाले स्तर पर पहुंच गया है और लगातार बढ़ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे क्षेत्र की कुल अत्यंत गरीब आबादी में से लगभग आधे लोग अकेले पाकिस्तान में रहते हैं। सऊदी अरब और UAE जैसे ऊंची आमदनी वाले देशों के समूह में रखे जाने से पाकिस्तान की खराब आर्थिक हालत दुनिया के सामने और साफ दिखने लगी है।

पाकिस्तानी सरकारी अफसरों ने दावा किया है कि इस बदलाव से देश की भौगोलिक पहचान या सीधी आमदनी की स्थिति पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद जानकार इसे पाकिस्तान के लिए बड़ी राजनयिक हार मान रहे हैं। दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर भारत का बढ़ता असर और विश्व बैंक में भारत की जगह को देखते हुए साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय समीकरणों में पीछे छूटता जा रहा है।

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