वनहक्क दावेदारों का सवाल, तीन पीढ़ियों का सबूत कहां से लाएं
चंद्रपुर जिले में गैर-आदिवासी वननिवासियों के वनहक्क दावों को लेकर पुराने कागजात न होने की समस्या सामने आई है, सांसदों और विधायकों से मुद्दा उठाने की मांग।
गोंडपिपरी इलाके में सालोंसाल से जंगल में रह रहे गैर-आदिवासी यानी अन्य पारंपरिक वननिवासियों के सामने अब वनहक्क का दावा साबित करने के लिए पुराने कागजात जुटाने की बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। दावेदार सीधा सवाल कर रहे हैं कि पचहत्तर साल पुराने सबूत आखिर कहां से लाएं।
दरअसल बहुत से परिवारों के पास पूर्वजों के जमाने की मतदाता सूची, राशन कार्ड, घरपट्टी की रसीदें, महसूल के रिकॉर्ड, ग्रामपंचायत के दस्तावेज या ऐसे ही दूसरे पुराने कागजात मौजूद ही नहीं हैं। ऐसे में मांग उठ रही है कि सिर्फ पुराने कागजात न होने की वजह से पात्र दावेदारों के वनहक्क दावे अटकने नहीं चाहिए।
दावेदारों का कहना है कि प्रशासन को कुछ सवालों के साफ जवाब देने चाहिए। तीन पीढ़ियों का सबूत असल में किस रूप में मान्य किया जाता है। अगर पुराने दस्तावेज उपलब्ध न हों तो इसके बदले कौन से सबूत चलेंगे। ग्रामसभा और संबंधित समितियां किन शर्तों पर दावों की पड़ताल करेंगी। इन सवालों पर प्रशासन से स्पष्टता की मांग हो रही है।
साथ ही यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि वनहक्क दावेदारों को सबूत जुटाने के लिए गांव स्तर पर सही मार्गदर्शन मिले और नियमों के तहत जो भी अलग अलग सबूत उपलब्ध हैं, उन पर विचार किया जाए।
इस मुद्दे को लेकर मांग है कि चंद्रपुर की सांसद प्रतिभा धानोरकर, गडचिरोली-चिमूर के सांसद डॉ नामदेव किरसान और जिले के संबंधित विधायक यह सवाल केंद्र और राज्य सरकार के सामने पुरजोर तरीके से रखें। दावेदारों की मांग है कि सांसद लोकसभा में यह सवाल उठाएं और विधायक विधानसभा में यह मुद्दा रखें।
दावेदारों ने यह भी मांग की है कि चंद्रपुर जिले में गैर-आदिवासी वनहक्क के कितने दावे दाखिल हुए, कितने मंजूर हुए, कितने खारिज हुए और कितने दावे अभी भी पेंडिंग हैं, इसकी तालुका के हिसाब से आधिकारिक आंकड़े सरकार जाहिर करे।
इस बीच इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचने के लिए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सुधाकरराव वानखेडे आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। वनहक्क दावों के सबूतों को लेकर स्पष्टता, पात्र दावेदारों को सही मार्गदर्शन और पारदर्शी पड़ताल की मांगों को लेकर यह आंदोलन खड़ा किया जा रहा है। पीढ़ियों से जंगल पर निर्भर परिवारों को सिर्फ पुराने कागजात की दिक्कत की वजह से वनहक्क से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए सरकार से तुरंत स्पष्टता लाने की मांग की जा रही है।