मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:02 IST

वैरायटी चौक पर विदर्भवादियों ने जलाई नागपुर करार की होली, अलग राज्य की मांग

विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने स्वतंत्र विदर्भ राज्य की मांग को लेकर नागपुर के वैरायटी चौक पर आंदोलन किया और नागपुर करार की होली जलाई।

वैरायटी चौक पर विदर्भवादियों ने जलाई नागपुर करार की होली, अलग राज्य की मांग
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

स्वतंत्र विदर्भ राज्य बनाने की मांग को लेकर विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने नागपुर के वैरायटी चौक पर आंदोलन किया। इसी दौरान नागपुर करार की होली जलाई गई। आंदोलन करने वालों का कहना था कि यह करार 28 सितंबर 1953 को विदर्भ के विकास के लिए किया गया था।

आंदोलनकारियों ने कहा कि नागपुर करार विदर्भ के लोगों के साथ अन्याय करने वाला साबित हुआ है और अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि विदर्भ के सर्वांगीण विकास के लिए स्वतंत्र राज्य बनाना ही एकमात्र विकल्प है।

यह आंदोलन नागपुर शहर अध्यक्ष नरेश निमजे और जिलाध्यक्ष प्रशांत नखाते की अगुवाई में हुआ। इसमें बड़ी संख्या में विदर्भवादी शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने नागपुर करार की अहम शर्तों का पालन नहीं किया।

समिति का कहना है कि विदर्भ के हक का पैसा और नौकरियां दूसरे क्षेत्रों में भेज दी गईं। इसी वजह से इस क्षेत्र में सिंचाई, सड़कों और सरकारी नौकरियों का बड़ा बैकलॉग बन गया है। आंदोलनकारियों ने दावा किया कि विदर्भ में सिंचाई का 60,000 करोड़ रुपये, सड़कों का 15,000 करोड़ रुपये और सरकारी नौकरियों के 2,47,000 पदों का अनुशेष है। बूटीबोरी, हिंगना समेत जिले की कई और जगहों पर भी आंदोलन हुआ।

समिति ने यह भी दावा किया कि पिछले 21 साल में विदर्भ में 48,000 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। उसके मुताबिक ऊंची पढ़ाई और रोजगार के लिए विदर्भ के नौजवानों को बड़ी तादाद में दूसरे राज्यों और शहरों में जाना पड़ रहा है। समिति का कहना है कि इस पलायन से विदर्भ की आबादी घटी है, जिससे लोकसभा और विधानसभा में भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कम हुआ है।

निमजे ने कहा कि सूखे की वजह से आर्थिक संकट और बढ़ने का डर है। आंदोलनकारियों का कहना था कि महाराष्ट्र राज्य सरकार से विदर्भ को न्याय मिलना मुमकिन नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार बिना देर किए अलग विदर्भ राज्य का ऐलान करे।

आंदोलन में मुकेश मासुरकर, अरुण केदार, सुनील चोखारे, ज्योति खांडेकर, तात्यासाहेब मते, अविनाश काले, मेघा मातुरकर, गुलाबराव धांडे, अनिल केशरवानी, रवींद्र भामोडे, विजया ताजने और सुरेश वर्षे समेत विदर्भवादी कार्यकर्ता शामिल हुए।

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