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त्योहारी सीजन में महारेरा की मंजूरी, नागपुर के 27 नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को रजिस्ट्रेशन नंबर

महारेरा ने नागपुर जिले में 27 नए आवासीय प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें करीब 774 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और 2,456 घर बनाने की योजना है।

त्योहारी सीजन में महारेरा की मंजूरी, नागपुर के 27 नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को रजिस्ट्रेशन नंबर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दशहरा और दिवाली के त्योहारी सीजन में महाराष्ट्र के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छी खबर आई है। महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी महारेरा ने नागपुर जिले के 27 नए आवासीय प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है और उन्हें रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर दिए हैं।

इन 27 परियोजनाओं में लगभग 774 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इनमें करीब 2,456 आवासीय इकाइयां बनाने की योजना है।

अगर पूरे महाराष्ट्र की बात करें तो महारेरा ने राज्यभर में 435 नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है। इन प्रोजेक्ट्स में अनुमानित 23,719 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे कुल 32,981 नए घर बनने का रास्ता साफ हो गया है।

इसके अलावा प्राधिकरण ने विकासकों के अनुरोध पर 210 पुराने प्रोजेक्ट्स की समयसीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। साथ ही 609 परियोजनाओं के प्रस्तावों में संशोधन को भी मंजूरी मिली है।

विदर्भ क्षेत्र में कुल 32 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है और इनमें नागपुर सबसे आगे है। जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक नागपुर में 27 परियोजनाओं के लिए 774 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

अमरावती शहर में चार परियोजनाओं के तहत 196 आवासीय इकाइयां बनाने की योजना है। इनमें 34 करोड़ रुपये का निवेश होगा। अकोला में एक परियोजना को मंजूरी मिली है, जिसमें 30 आवासीय इकाइयों के लिए 13 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

नए रजिस्ट्रेशन में सबसे बड़ा हिस्सा पुणे और मुंबई महानगर क्षेत्र का है। मुंबई महानगर प्रदेश (MMR) में 201, पुणे रीजन में 140, ठाणे में 70 और मुंबई शहर व उपनगरों में 63 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। खानदेश और मराठवाड़ा क्षेत्र में 24 नए प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिली है।

महारेरा के नियमों के अनुसार, अगर कोई प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होता तो विकासकों को समय बढ़ाने के लिए आवेदन करना पड़ता है। निर्माण की योजना में बदलाव के लिए भी नियामक की इजाजत जरूरी होती है। इन प्रक्रियाओं का मकसद परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।

त्योहारी सीजन में मिली इन मंजूरियों से राज्य के आवासीय निर्माण क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि असल निवेश और घरों की संख्या इस पर निर्भर करेगी कि ये परियोजनाएं जमीन पर कैसे आगे बढ़ती हैं।

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