त्रिपुरा में BSF जवानों पर हमले के 9 आरोपी अब भी पकड़ से बाहर, सीमा पर चौकसी बढ़ी
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त्रिपुरा में BSF जवानों पर हुए हमले के 9 आरोपी अब तक पकड़े नहीं गए हैं। पुलिस को आशंका है कि वे बांग्लादेश भाग सकते हैं।
त्रिपुरा में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों पर हुए हमले के मामले में 9 आरोपी अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं। पुलिस ने आशंका जताई है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए ये आरोपी भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके बांग्लादेश भाग सकते हैं। इसी वजह से त्रिपुरा पुलिस ने BSF से कहा है कि वह सीमा पर खास चौकसी रखे।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक BSF ने जो FIR दर्ज कराई है, उसमें 19 हमलावरों के नाम हैं। इनमें से तीन महिलाओं समेत कुल 10 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी 9 आरोपियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान और छापेमारी जारी है।
हमला सोमवार रात को हुआ था। उसके बाद पुलिस ने फौरन तलाश शुरू कर दी थी, जो अब भी चल रही है। आरोपियों के बांग्लादेश भागने की आशंका को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है। कोई भी गैरकानूनी हरकत न हो, इसके लिए खास एहतियात बरता जा रहा है।
मंगलवार को BSF त्रिपुरा फ्रंटियर की महानिरीक्षक प्रिन्सी राणी और सिपाहीजाला जिले के पुलिस अधीक्षक बिजॉय देबबर्मा दूसरे अफसरों के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पर आशाबारी इलाके में पहुंचे। BSF की महानिरीक्षक ने जवानों को सीमा सुरक्षा की सभी मानक प्रक्रियाओं का और ज्यादा सतर्कता से पालन करने को कहा। उन्होंने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से मुलाकात कर उन्हें घटना की जानकारी भी दी।
पुलिस की दी जानकारी के मुताबिक सोमवार को BSF के जवानों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ भारतीय और बांग्लादेशी तस्करों को गांजे की तस्करी करते देखा। जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और एक भारतीय तस्कर को पकड़ लिया। लेकिन कंटीले तार की बाड़ के उस पार मौजूद बांग्लादेशी तस्कर भाग निकले।
उसी वक्त एक और भारतीय तस्कर भी भाग गया। उस पर आरोप है कि उसने यह अफवाह फैलाई कि BSF के जवानों ने उसे पीटा है और इस तरह गांव वालों को भड़का दिया। इसके बाद करीब 50 महिलाएं और पुरुष मौके पर जमा हो गए। उन्होंने BSF की गाड़ी को घेर लिया और जवानों पर हमला कर दिया।
इस हमले में कंपनी कमांडर समेत BSF के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप यह भी है कि हमलावरों ने एक जवान की पंप एक्शन गन छीन ली और BSF की गाड़ी को नुकसान पहुंचाया। इस घटना में एक हमलावर भी जख्मी हुआ।
बुधवार को भी इलाके में तनाव बना रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए BSF, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स और पुलिस ने मिलकर फ्लैग मार्च निकाला। साथ ही सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया गया और खास गश्त लगाई गई।
BSF ने बयान जारी कर कहा है कि दल भारत-बांग्लादेश सीमा की हिफाजत करने, तस्करी रोकने और गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। BSF ने चेतावनी भी दी है कि ड्यूटी कर रहे जवानों को धमकाने या उनके काम में अड़चन डालने की कोशिश हुई तो सख्त कार्रवाई होगी। दल का कहना है कि हमले के बावजूद जवानों ने संयम रखा और जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया।
त्रिपुरा में इससे पहले भी तस्करों की ओर से सुरक्षा बलों के जवानों पर हमले हो चुके हैं। 16 अक्टूबर 2017 को तस्करों की गाड़ी ने BSF की 145वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार मंडल को कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल मंडल की 20 अक्टूबर को मौत हो गई थी। इसी तरह 21 नवंबर 2019 को त्रिपुरा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर दुर्गा कुमार ह्रांगखावल की ड्यूटी के दौरान कथित तस्करों ने गाड़ी से टक्कर मारकर हत्या कर दी थी।
त्रिपुरा की बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा 856 किलोमीटर लंबी है। राज्य के तीन तरफ बांग्लादेश की सीमा है, इसलिए घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार के अपराधों के लिहाज से यह इलाका संवेदनशील माना जाता है। इसी वजह से ज्यादातर सीमावर्ती हिस्सों में बाड़ लगाई गई है।
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