सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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10:46 IST

ट्रम्प बोले, मिडिल ईस्ट के किसी भी आदमी को 'मोहम्मद' बुला लो; मुस्लिम संगठन भड़के

जॉर्जिया की रैली में नाम को लेकर की गई टिप्पणी पर अमेरिका में मुस्लिम और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है।

ट्रम्प बोले, मिडिल ईस्ट के किसी भी आदमी को 'मोहम्मद' बुला लो; मुस्लिम संगठन भड़के तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने एक बयान को लेकर फिर विवाद में घिर गए हैं। जॉर्जिया राज्य के डाल्टन म्युनिसिपल एयरपोर्ट के एक हैंगर में चुनावी रैली रखी गई थी। वहां भाषण देते हुए ट्रम्प ने 'मोहम्मद' नाम पर तंज भरी टिप्पणी कर दी। मुस्लिम समाज में यह नाम बेहद इज्जत से लिया जाता है। बयान के बाद अमेरिका के मुस्लिम संगठन, मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनीतिक विरोधी उन पर सख्त लहजे में बरस रहे हैं।

रैली में मौजूद लोगों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, "अगर आपको मिडिल ईस्ट (Middle East) के किसी आदमी के नाम पर शक हो, या आपको उसका नाम पता ही न हो, तो आप उसे आराम से 'मोहम्मद' कहकर बुला सकते हैं। यह नाम सही निकलने के चांस करीब 65 परसेंट होते हैं।" ट्रम्प ने आगे यह भी कहा कि वे बरसों से यही करते आ रहे हैं और उनका अंदाजा कभी गलत नहीं निकला।

मुस्लिम समाज में पैगंबर मोहम्मद के लिए गहरी आस्था है। इसी वजह से कई परिवार अपने बच्चों का नाम 'मोहम्मद' रखते हैं। अब ट्रम्प पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने इस धार्मिक और सांस्कृतिक अहमियत की बेइज्जती की है।

भाषण में ट्रम्प ने मिडिल ईस्ट के तनाव और ईरान के सियासी हालात पर भी बात की। ईरान की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में यह अकेला देश है जहां अब किसी को राष्ट्रपति बनने की इच्छा ही नहीं बची। इसके बाद उन्होंने स्टेज पर 'मोहम्मद' नाम के कुछ काल्पनिक लोगों से पूछने की एक्टिंग की कि क्या वे ईरान का राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे। मकसद लोगों को हंसाना था, मगर रैली की भीड़ ने इस पर खास रिस्पॉन्स नहीं दिया और वहां खामोशी छाई रही।

ईरान के मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान हैं। ट्रम्प का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका में सियासी माहौल काफी गरम है। चुनाव प्रचार के बीच ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने अपने भाषण में दोहराया कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। इससे पहले भी अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु प्रोजेक्ट्स को काबू में रखने के लिए कई सैन्य और रणनीतिक कदम उठा चुके हैं।

ट्रम्प के बयान के बाद अमेरिका में नागरिक अधिकारों और मुस्लिम समुदाय से जुड़े संगठन आक्रामक हो गए हैं। अमेरिका के सबसे बड़े मुस्लिम मानवाधिकार संगठन कॉन्सिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशन्स (CAIR) ने इस बयान की कड़ी निंदा की है। इन संगठनों का आरोप है कि सियासी फायदे और वोटरों को बांटने के लिए धार्मिक और नस्लीय अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ट्रम्प अपने चुनाव प्रचार में सोमाली-अमेरिकन और आम मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बार-बार नकारात्मक रूढ़िवादी छवियां (Stereotypes) फैला रहे हैं। CAIR की सालाना रिपोर्ट का हवाला देते हुए जानकारों ने बताया कि अमेरिका में हाल के दिनों में इस्लामोफोबिया (Islamophobia) की घटनाएं बढ़ी हैं। उनके मुताबिक इसके पीछे इस तरह के विवादित भाषण, प्रवासियों पर की जा रही कार्रवाइयां और सियासी बयानबाजी जिम्मेदार है। ट्रम्प की इस नई टिप्पणी से अमेरिका के प्रवासियों और मुस्लिम समाज में बेचैनी का माहौल है।

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